भारत के ईसाई-मुस्लिमों का सोनिया कांग्रेसी गठबंधन और डोडो हिन्दू

भविष्य में विश्व के विचारकों और बुद्धिजीवियों के लिये भारत के कर्नाटक में हुआ 2018 का विधानसभा चुनाव, हिन्दुओं को लेकर एक संदर्भ के रूप में हमेशा याद किया जायेगा.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव को हिन्दुओं के विनाश या उत्थान की एक महत्वपूर्ण घटना माना जायेगा.

उसको या तो हिन्दुओं द्वारा पारसियों का अनुसरण करते हुये विस्थापित रूप में अप्रवासी बन कर रहने वाली नस्ल के संदर्भ में याद किया जायेगा या फिर इसको हिन्दुओं की नस्ल की अवचेतना के जागृत होने के संदर्भ में याद किया जायेगा.

मैं इस बात को पूरी गंभीरता से कह रहा हूँ क्योंकि कर्नाटक चुनाव के इर्दगिर्द ऐसी घटनाएं प्रकाश में आयी हैं जो हिन्दुओं के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर गयी हैं.

मुझे आज यह मानने में कोई हिचक नहीं है कि भारत में, तमाम कमियों के बाद भी, राजनैतिक सत्ता में हिन्दुओं के हितों की रक्षा के लिये सिर्फ एक ही दल भाजपा है.

इसके सिवाय सारे ही दलों के लिये हिन्दू, जाति और संप्रदायों में बंटी नस्ल है जिसको उनके ही स्वार्थों की चाशनी में लपेट कर उनके ही अस्तित्व को नेपथ्य में सफलतापूर्वक धकेला जा सकता है.

स्वतंत्रता से पहले और बाद में भी हिन्दुओं को बांटने का जो काम ढंके छिपे और बौद्धिकता के नाम पर किया जाता था, वह अब सभी अन्य दलों द्वारा 2014 के बाद से हर वर्ष और निर्लज्जता और हेठी से किया जाने लगा है.

इस काम में जहां वामपंथियों का पूरा सहयोग रहा है वहीं इसका नेतृत्व कई दशकों से, पूरी तरह से कांग्रेस की सोनिया गांधी के हाथ में रहा है. आज भी सोनिया गांधी वह केंद्र बिंदु है जहां से हिन्दुओं के अस्तित्व के संकट का प्रादुर्भाव हो रहा है.

जब कर्नाटक के चुनाव से ठीक पहले, वहां की कांग्रेस सरकार द्वारा लिंगायत हिन्दुओं को हिन्दुओं से अलग मानकर, एक अलग धर्म के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया था, तब ही यह समझ जाना चाहिये था कि आज कांग्रेस के लिये हिन्दू कोई प्राथमिकता नहीं है.

कांग्रेस के लिये ईसाई प्राथमिकता है और हिन्दुओं के विरुद्ध मुसलमान उनका एक स्वभाविक सहयोगी है. हम आज उस मुहाने पर पहुंच गये हैं कि जहां हमको यही पता नहीं है कि जो हिन्दू, हमारे सामने, हमारे ही अस्तित्व पर घात कर रहा है वो हिन्दू है भी या नहीं.

आज भाजपा, और उसमें भी विशेष रूप से आरएसएस व मोदी के विरुद्ध विषवमन करती हुई कांग्रेस व उसका साथ देते हुये लोग जो हिन्दू नाम से खड़े हैं, वे धीरे धीरे उन नामों के पीछे छिपे अपने ईसाई चेहरे को सामने लाने से नहीं झिझक रहे हैं.

वह आज इस लिये ऐसा करने की हिम्मत कर रहे हैं क्योंकि वे स्वयं अपने स्वार्थों के अधीन धर्म परिवर्तन कर चुके हैं और उन्हें हिन्दुओं की स्वार्थ के प्रति आसक्ति वाली मानसिकता का पूरा बोध है.

इसको आप बीजापुर लिंगायत डिस्ट्रिक्ट एजुकेशनल एसोसिएशन (BLDE Association) के अध्यक्ष डॉ एम बी पाटिल द्वारा सोनिया गांधी को 10 जुलाई 2017 में लिखे पत्र से बखूबी समझ सकते हैं, जो अभी प्रकाश में आया है.

उस पत्र में डॉ पाटिल बड़ी स्पष्टता से कहते है कि उन्होंने सोनिया गांधी के निर्देशों का पालन करते हुये कुछ मंत्रियों के साथ ग्लोबल क्रिश्चियन कौंसिल (GCC) और वर्ल्ड इस्लामिक ऑर्गेनाईजेशन (WIO) के प्रतिनिधियों से, कर्नाटक में 2018 के चुनाव को लेकर मुलाकत की है.

उन प्रतिनिधियों से मिल कर कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने व 2019 के लोकसभा में भाजपा को हराने के लिये जो रणनीति, एक मत से स्वीकारी गई है उसके अनुसार, ईसाई और मुसलमान को उनके धर्म के आधार पर एकजुट किया जाय और हिन्दुओं को जाति, उपजाति और सम्प्रदायों के आधार पर विघटित किया जाये.

लिंगायत को हिन्दू धर्म से अलग, एक अल्पसंख्यक की मान्यता दिये जाने की मांग करने को प्रोत्साहित किया जाय और उसके लिये जो आयोजन होंगे उसमे कांग्रेस के लोग लिंगायत बन कर शामिल होंगे.

इसी के साथ आपको (सोनिया गांधी को) बड़े हर्ष से यह सूचित करना है कि GCC और WIO, लिंगायतों को हिन्दू धर्म से अलग करने के लिये जो बड़े बड़े आयोजन होंगे उसकी व्यूह रचना में व आर्थिक रूप से सहयोग देंगे.

अंत मे डॉ पाटिल, सोनिया गांधी को ‘हिन्दुओ को तोड़ो और मुसलमानों को जोड़ो’ के मंत्र के भरोसे 2018 के चुनाव जीतने का पूरा भरोसा देते हैं और साथ में सोनिया गांधी के आशीर्वाद और पालन करने के लिये भावी निर्देशों की कामना करते हैं.

यह पूरा पत्र सोनिया गांधी और कांग्रेसियों के चरित्र का जीता जागता प्रलेख है जो हिन्दुओं की नस्ल पर पिछले चार दशकों में हुये और आगे होने वाले कुठारघातों को लिपिबद्ध कर रहा है.

बात यहाँ ही खत्म नहीं हुई है, अब तो चर्च अपनी संरक्षिका सोनिया गांधी के लिये मुखर हो गया है. दिल्ली के आर्चबिशप अनिल जोसफ थॉमस कूटो ने अगले लोकसभा के चुनाव में नई सरकार की कामना के लिये सभी ईसाइयों को हर शुक्रवार, प्रार्थना करने व व्रत रखने को कहा है.

इस आर्चबिशप को भारत का आज का वातावरण लोकतंत्र के लिये खतरा लग रहा है. आज ईसाई का धर्म के आधार पर राजनीति करना धर्मनिर्पेक्षता है और हिन्दुओं में एकता होना धर्मनिर्पेक्षता के विरुद्ध है.

जो लोग आज कर्नाटक में कांग्रेस को 78 सीट मिल कर दूसरे स्थान पर पहुँचने को किसी तरह की जय समझने की भूल कर रहे हैं, वे भविष्य की अनिश्चितता की अनदेखी करेंगे.

कांग्रेस आगामी एक वर्ष हम सब हिन्दुओं के स्वार्थों को बोली लगायेगी और हमको अपने ही स्वार्थों में डुबा कर भविष्य के ईसाई और मुसलमानों को तैयार करेगी.

आज हम यहां पर बौद्धिक अहंकार में शुचिता और आदर्शो को लेकर भाजपा के नेतृत्व की असफलताओं को लेकर खिल्ली उड़ाने का जो उपक्रम कर रहे हैं, वह हमारे भाजपा को वोट करने को तो सुनिश्चित अवश्य कर रहे हैं लेकिन साथ तटस्थों की ‘नोटा’ की सेना भी तैयार कर रहे हैं.

यह नकारत्मकता से उपजी ‘नोटा’ की तरफ लगती कतार, सिर्फ हिन्दुओं की है. कोई भी मुस्लिम या ईसाई नोटा की तरफ झांकता भी नहीं है. इसी के साथ वह भी नोटा की तरफ नहीं देखता है जिसने ‘नोटा’ के चिंतन को भारत के चुनावों में जोड़ा है.

इस 2018 के चुनाव ने 2019 के लोकसभा के चुनाव की कांग्रेसी रणनीति पर मोहर लगा दी है और वह विपक्ष की तरफ से और धार के साथ हिन्दुओं के बीच फेंका जायेगा.

मेरा मानना है कि आज विपक्ष के साथ हिन्दू विघटन के अस्त्र को लिये जो भी हिन्दू खड़ा है वह हिन्दू नही रह गया है. वह कल का ईसाई या मुसलमान है.

आज हमने इससे कुछ नहीं सीखा और बचे हुए हिन्दुओं ने संगठित होने में जाति, सम्प्रदाय और बौद्धिक अहंकार को प्राथमिकता देने की भूल की तो यह निश्चित मानिये आपकी आगामी पीढ़ी या तो कल की ईसाई और मुसलमान होगी या फिर अपने देश से भागी दूरस्थ देशों में शरण लिए पारसी.

और फिर इतिहास हम हिन्दुओं की तुलना उस डोडो पक्षी से करेगा जो मॉरीशस में मानवों के कदम रखने से पहले वहां राज करते थे. उनका वहां मानवों के आने से पहले कोई शत्रु नहीं था इसलिये वह पक्षी वर्ग में होते हुए भी थलचर था.

वो पूरा धर्मनिरपेक्ष और नोटा प्रजाति का था. उसने शताब्दियों में उड़ने की अपनी नैसर्गिक क्षमता ही खत्म कर दी थी. उसका परिणाम यह हुआ कि पहले तो उसने आये हुये मानवों से डरना छोड़ दिया और जब उसको वाकई डर पैदा हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी और 17वीं शताब्दी के अंत तक यह डोडो पक्षी मानव द्वारा अत्याधिक शिकार किये जाने के कारण धरती से ही विलुप्त हो गया.

यदि हिन्दुओं ने आज भी कल के अभागे हिन्दुओ को चिह्नित नहीं किया और इस मुस्लिम इसाई गठबंधन से नहीं चेते तो यह निश्चित मानियेगा कल भारत मॉरीशस होगा और यहां का हिन्दू डोडो पक्षी की गति को प्राप्त होगा.

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  1. यदि भविष्य में ऐसा हुआ तो वह अत्यन्त दुःखद होगा।

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