डिजिटल युग में पब्लिक पॉलिसी : कुछ प्रश्न

मेरे लेख पाषाण युग इसलिए समाप्त नहीं हुआ क्योकि उस युग में पत्थरो की कमी हो गयी थी पर कई कमेंट आये.

उन कमेंट्स को मैं पब्लिक पॉलिसी या जन नीति की कसौटी पर तौलना चाहूँगा. कुछ विचार आपके समक्ष रखूँगा (इन प्रश्नों को मैं पहले भी उठा चुका हूँ); उत्तर की अपेक्षा है.

अगर पब्लिक पॉलिसी के नजरिये से देखें तो सरकार की क्या नीति होनी चाहिए?

अब पहला विचार यह है कि सरकार को क्या यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उत्पादकों, व्यवसायियों और दुकानदारों को अधिक लाभ मिले या उपभोक्ताओ को सस्ता उत्पाद मिले?

दूसरा, किस बिंदु पर उत्पादकों, दुकानदारों और उपभोक्ताओ का हित एक हो सकता है?

तीसरा, क्या सरकार छोटे और पारम्परिक व्यवसायियों को बचाने के लिए नवयुवक और नवयुवतियों को ऑनलाइन उद्यम लगाने से मना कर सकती है?

चौथा, क्या सरकार – या कोई भी राजनैतिक दल या हम स्वयं भी – डिजिटल युग में आने वाले नए इनोवेशन या खोज को रोक सकते है?

पांचवां, इस डिजिटल युग में विश्व भर में होने वाले व्यापारों और उद्यमों से कैसे टक्कर लेंगे, अगर हम अपने देश में ही इस युग के विकास पर रोक लगा देंगे?

छठा, कैसे ऑनलाइन विक्रेता और छोटे दुकानदार अपना काम कर सकें, साथ ही नए इनोवेशन या खोज, नए उद्यमों और नवयुवक और नवयुवतियों को भी बढ़ावा मिले?

सातवां, कुछ ही वर्षो में पेट्रोल का उत्पादन करने वाले देशों का एकाधिकार ख़त्म हो जायेगा. क्या हम गैर पारम्परिक ऊर्जा के स्रोतों का उत्पादन बंद कर दे, क्या इलेक्ट्रिक कार मार्केट में ना आने दे, क्यों कि पेट्रोल पंप के मालिक की दुकाने बंद हो जाएगी?

इलेक्ट्रिक कार में लगभग 24 मूविंग पार्ट्स या घूमने वाले हिस्से होंगे, जबकि पेट्रोल कार में लगभग 150 होते है. क्या कार मैकेनिक के जॉब चले जाने के डर से भारत में इलेक्ट्रिक कार ना आने दे?

आठवां, रिटेल दुकानदार अपने कर्मचारियों को कितना वेतन देते हैं? क्या वह वेतन उन कर्मचारियों के सामान्य जीवन-यापन के लिए उचित है?

नौवां, सरकार ने मिनिमम वेतन की दर तय की हुई है. लेकिन उत्पादों की कीमतें कैसे तय करेंगे? क्या सरकार बतलाएगी कि जूते की कीमत क्या होनी चाहिए? या फिर सेल फ़ोन की, जिसमे हर छः महीने में नया फीचर जैसे कि शक्तिशाली कैमरा, मेमोरी, फ़ास्ट प्रोसेसर इत्यादि के बाद भी दाम वही रहता है?

या फिर आटे की कीमत, चाहे गेंहू शरबती हो, ऑर्गेनिक हो, या फिर बेसन और सोया का मिक्स हो? किस अनुपात में अन्य अनाज का आटा मिक्स होना चाहिए, क्या सरकार इसे निर्धारित करेगी? या फिर, अगर उद्यमी या ऑनलाइन विक्रेता पांच किलो आटे पर एक किलो बेसन फ्री में देना चाहे तब सरकार को क्या करना चाहिए?

वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था का बंटाधार वहां के कम्युनिस्ट शासकों ने बाज़ार में कीमतों में हस्तक्षेप से किया. ह्यूगो चावेज़ ने सत्ता हथिया ली और पूरी अर्थव्यवस्था को नारे, स्लोगन और रेवड़ी बांटकर तहस-नहस कर दिया. वर्ष 2015 में वहां पर पानी का दाम पेट्रोल से महंगा हो गया था.

दसवां, जब थ्री डी प्रिंटर से हम वस्तुए स्वयं घर में प्रिंट कर लेंगे, जैसे कि जूते, कार के पुर्जे, खिलौने, इत्यादि, तब खुदरा व्यापारी क्या करेगा?

डिजिटल युग के बारे में मैं कहना चाहूंगा कि हमारी आँखों के सामने चौथी औद्योगिक क्रांति हो रही है. पहली क्रांति भाप की मशीन, जिसने जानवरों की शक्ति पर हमारी निर्भरता कम की; द्वितीय बिजली की मशीन जिसने मॉस प्रोडक्शन या बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा दिया; तृतीय सूचना की क्रांति जिसने हमें कनेक्ट किया; और अब चौथी डिजिटल जिसमें मानवीय या फिज़िकल, सूचना या डिजिटल और जैविक या जेनेटिक दुनिया को जोड़कर एक नयी संरचना 10 से 20 वर्षो में लागू हो जाएगी जो आज तक के सभी मानवीय प्रयासों और विकास को उलट-पलट देगी.

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  1. बेशक ये उलट-पलट पूरे जोर-शोर से दस्तक दे चुका है, आगत समय में ये सवाल निश्चित ही सुरसा-मुख सदृश्य विकराल होने वाले हैं।

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