मर्द बनों मर्द, इश्क़ बच्चों के बस की बात नहीं!

एक बार जब किसी ने पूछा कि लोग म्यूज़िक/संगीत क्यों पसंद करते हैं तो हमें जवाब सूझा Escape. जैसे Dirty Picture में एक दृश्य है जहाँ विद्या बालन खुद को हंटर मार रही होती है और नाच रही होती है. पीछे बैकग्राउंड में गाना चल रहा होता है किसी दक्षिण भारतीय फिल्म का, “नाक मुका, नाक मुका” जैसा कुछ.

अब ये गाना मुझे पसंद है क्योंकि खुद को हंटर पड़ रहे हों तो नाचना नामुमकिन है! इन्सान छटपटा रहा होगा, नाच कैसे सकता है? इसलिए हीरोइन इम्प्रेस्सिव लगती है, एक रोल पाने के लिए ऐसा कर सकती है इसलिए वो हीरोइन है.

लेकिन गैंग्स ऑफ़ वासेपुर में श्री श्री रामाधीर सिंह जी कह गए है कि जब तक भारत में सिनेमा बनता रहेगा लोग CUTE बनते रहेंगे. तो आजकल फिल्मों से प्रेरणा पाए कई नवयुवकों से मेरी मुलाकात अक्सर होती है.

ये घर से भाग के आये होते हैं, ज्यादातर इश्क में. इनका बहाना कॉमन होता है, “स्टेशन पे कहीं पर्स और मोबाइल चोरी हो गया है, पैसे जमा करने हैं घर जाने के लिए इसलिए कुछ काम चाहिए.” जितने अच्छे से इन्हें खुद पता होता है कि वो झूठ बोल रहे हैं उतने ही अच्छे से इन्हें काम पर रखने वालो को भी पता होता है कि ये झूठ बोल रहे हैं. मगर दो तीन घंटे ढूँढने पर कोई न कोई काम मिल जाता है.

समस्या काम मिलने के बाद शुरू होती है. काम किसी बस-ट्रक ड्राईवर, या cook के हेल्पर जैसा होता है, कभी कभी मिस्त्री भी अपने साथ रख लेते हैं. अब ना तो इन्हें दिन में 12 – 14 घंटे के शारीरिक श्रम की आदत होती है, ना ही इन्हें उस भाषा की आदत होती है जिसमें बात होती है.

रहने की जगह इनके हिसाब से hygienic नहीं होती. पीने का पानी भी ढंग का नहीं मिलता. तो ऐसे में किसी को पूरे 24 घंटे काम पे टिकता नहीं देखा है. ज्यादातर दोपहर के खाने के बाद यानि ढाई तीन बजे या शाम सात बजे तक गायब हो जाते हैं.

अगर घर छोड़ कर निकलने की सोच रहे हैं तो मेरी सलाह हमेशा वाली है, Its a JUNGLE out there! तो दो चार गालियाँ भी पड़ रही हों तो घर में रहिये बच्चे. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी से प्रेरणा लेकर सिक्यूरिटी गार्ड से हीरो बनने की कोशिश मत कीजिये. उसकी एक जीत के पीछे कम से कम हज़ार लोग हारे हैं. कईयों की हिम्मत टूटी है इतनी मेहनत में.

तीस साल लगा के पहाड़ तोड़ने के लिए दशरथ मांझी जैसे मर्द चाहिए होते है मर्द! इश्क़ बच्चों के बस की बात नहीं!

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  1. ये कच्चे घडो़ं की कलगी है, जरा भी जोर से उठाया कि गई गर्दन गैर के हाँथ।

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