ताड़पत्र : दलित राजनीति करने वालों के कुतर्कों की पोल खोलता साक्ष्य

दलित संगठनों के फायरब्रांड नेता जी लोग दहाड़ते हैं कि ब्राह्मणों ने हमारा तीन हजार साल तक शोषण किया. हमारे रोजगार व संपत्ति के अधिकार को सीमित करके हमें समाज में पशुवत जीवन जीने के लिए विवश किया.

अब प्रश्न ये है कि क्या ब्राह्मण सचमुच इतने क्रूर थे? जिस समाज का सुबह से लेकर शाम तक का समस्त कार्य धर्म से जुड़ा था, भला वो इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है?

मैं आपको दर्शनशास्त्र के बड़े-बड़े तर्कों में नहीं फँसाना चाहता. आज मैं आपको कुछ प्रामाणिक साक्ष्य प्रस्तुत करूँगा, जो दलित राजनीति करने वालों के कुतर्कों की पोल खोल देगा.

राकेश पासवान जी मेरे एक दलित मित्र हैं. उन्होंने मेरे साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी पास की थी. वे अभी दिल्ली में वकालत की प्रैक्टिस कर रहे हैं.

वे कट्टर हिन्दुवादी और भाजपा समर्थक हैं. अकेले भीम-मीम नेक्सस से भिड़ जाते हैं. इसका कारण यह है कि उन्होंने बहुत सूक्ष्मता से दिल्ली विश्वविद्यालय के मुस्लिम समुदाय के छात्रों की कट्टरता का अवलोकन किया है.

राकेश भाई बहुत धार्मिक हैं और जन्म कुण्डली में विश्वास करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें उनका जन्म का दिन और समय नहीं पता था.

वो कई महीने से मेरे पीछे पड़े थे कि आप पहले किसी नाड़ी ज्योतिष वाले से मेरा ताड़पत्र निकलवा दीजिए, जिस पर से जन्म दिन और समय ज्ञात करके खुद से मेरी कुण्डली बना दीजिए.

14 मई, 2018 को मैं उन्हें लेकर पश्चिम विहार स्थित एक अगस्त्य नाड़ी केन्द्र पर गया. वहाँ उन लोगों ने उनके दाहिने हाथ के अँगूठे का निशान लिया और आधा घंटा प्रतीक्षा करने के लिए कहा.

आधे घंटे बाद, उन लोगों ने इनका ताड़पत्र निकाल दिया. उस पर उनका नाम, पिता का नाम, माता का नाम, चार भाई बहनों का विवरण बिलकुल सही-सही लिखा था. उस पर उनका जन्म-दिन, जन्म-राशि, जन्म-नक्षत्र व कुण्डली के ग्रहों की स्थिति का वर्णन बिलकुल सही लिखा हुआ था.

सबसे सुन्दर बात यह थी कि ऋषि अगस्त्य जी जब राकेश जी का भाग्य लिख रहे थे तो भगवान शिव व माता पार्वती के साथ गणेश जी से आशीर्वाद लेते हैं कि जिससे राकेश नाम के जातक की भविष्यवाणी बिलकुल सटीक हो सके.

ये बात अपने आप में कितनी दिव्य है कि हमारी चिन्ता हमारे पूर्वजों को आज से हजारों साल पहले थी. ये ताड़पत्र कितना हजार साल पुराना है, इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है.

अगर ब्राह्मण पक्षपाती होते तो परम पूज्य ऋषि अगस्त्य आज के एक दलित का भाग्य हजारों साल पहले नहीं लिख देते. दलित तो दूर की बात है, उन्होंने तो मुसलमान और ईसाई व्यक्तियों की भी भविष्यवाणी ताड़पत्र पर लिख रखी है.

जो मलेच्छ हमारे महादेव के शिवलिंग पर कटाक्ष करते हैं, हमारे अवढरदानी भोले बाबा ने अगस्त्य ऋषि के द्वारा उन मलेच्छों को भी पुत्रवत आशीर्वाद देते हुए उनके भाग्य को भी उद्घाटित किया है.

ऐसे पुरातन पुरूष कभी दलित विरोधी नहीं हो सकते. मैं आठ साल से लगा हूँ, इतने प्रयासों के बाद भी मुझे मेरा ताड़पत्र नहीं मिला और राकेश भाई को पहले ही प्रयास में तथा प्रथम दिन ही मिल गया. ये दर्शाता है कि उन पर माता पार्वती, पिता महादेव और ऋषि अगस्त्य की विशेष कृपा है.

अगर विरोध करने की ही बात है तो इसका अधिकार सिर्फ मुझे है. सबका ताड़पत्र मिल रहा है, खाली बाबूसाहब का नहीं मिल रहा है. ऋषि अगस्त्य द्वारा उपेक्षित होकर मैं अपने आप को कितना दमित, शोषित, वंचित महसूस कर रहा हूँ, यह मेरा घायल हृदय ही समझता है.

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