अवैध शरणार्थियों से कैसे निपटें? हंगरी के तरीके से या इंग्लैण्ड की तिकड़म से!

गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई भारत की स्थायी समस्याएं हैं. इनके अलावा दो समस्याएं आज की सरकार के लिए महत्वपूर्ण है, पहले की सरकारों के लिए महत्वपूर्ण नहीं रही कभी.

NGO और शरणार्थी… दूसरे देशों से आये हुए शरणार्थी.

ऐसा नहीं है कि NGO और इललीगल माइग्रेंट्स से केवल भारत ही परेशान है. और भी देश परेशान हैं.

हंगरी में काफी समय से एक NGO, मुस्लिम देशों से आये शरणार्थियों के लिए काम कर रहा था.

ये NGO अरबपति जॉर्ज सोरोस द्वारा चलाया जाता था. और हंगरी में लीगल माइग्रेंट्स के साथ इललीगल माइग्रेंट्स भी घुसाता था.

इस बार हंगरी में जो सरकार चुनाव जीतकर बनी, उसने अपना एक चुनावी वादा पूरा किया.

NGO को मिलने वाले दान पर बम्पर टैक्स लगा दिया. कर्मचारियों के पीछे जासूस छोड़ दिए. उनका काम करना मुश्किल कर दिया. किसी देश, मीडिया, अमेरिका के अरबपति सोरोस की वॉर्निंग धमकी नहीं सुनी.

पिछले हफ्ते सोरोस की NGO हंगरी में बंद हो गयी.

[George Soros’ Open Society foundation ends operations in Hungary]

हंगरी में राइट विंग की सरकार थी. उसने चुनाव में वादा किया था.

लेकिन इंग्लैंड में तो सरकार लिबरल है. सेक्युलर है. मीडिया विश्व का सबसे बड़ा सेक्युलर है. बीबीसी भारत तक को सेक्युलरता सिखाता है.

लेकिन इंग्लैंड पर भी इललीगल माइग्रेंट्स का दबाव है. पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत, अफ्रीका, वेस्ट इंडीज से आये लीगल, इललीगल शरणार्थी.

इंग्लैंड ने लीगल और इललीगल माइग्रेंट्स के साथ इललीगल रवैया अपनाया.

कोई शरणार्थी भाई इंग्लैंड से निकला अपने देश भारत, पाकिस्तान आया. पीछे से इंग्लैंड ने उसका पासपोर्ट अटका दिया, सुनिश्चित किया कि वो वापस इंग्लैंड न आ पाए.

खैर ये बड़ी बात नहीं.

कोई भाई बीमार पड़ा तो उसका इलाज नहीं होने दिया.

न जाने कितने स्टूडेंट्स को उनका वीज़ा खत्म करके वापस भेज दिया कि वो फर्जी तरीके से इंग्लिश का टेस्ट क्लियर करके आये थे.

फर्स्ट डिपोर्ट देन आस्क.

“पहले वापस भेजो फिर पूछो” की वीजा सही है या गलत. खुद को कानूनी सही साबित करने की जिम्मेदारी माइग्रेंट की है सरकार की नहीं.

इंग्लैंड में अपराधियों को बसने की इजाजत नहीं है. माइग्रेंट्स के टैक्स रिटर्न में मामूली गड़बड़ी को आधार बनाकर उनको अपराधी घोषित किया गया और देश से निकाला गया.

पिछले हफ्ते इन इललीगल स्टेप्स की जानकारी आम हो गयी. बड़ी छीछालेदर हुई. सरकार ने पहली बार एक मुस्लिम साजिद जावेद को होम सेक्रेटरी बनाकर अपनी सेक्युकरता फिर से साबित की.

[A post-colonial reckoning: on the Windrush scandal]

जावेद भाई ने एक भावुक बयान दिया कि मेरा परिवार भी इन कदमों का शिकार हो सकता था. आओ सभी मिलकर इंग्लैंड को आगे बढ़ाएं.

आदमी कमीना हो तो अंग्रेज़ों के जैसा हो. बिना कमीनगी के आदमी सेक्युलर नहीं हो सकता.

हमारी सरकार कोई मुखौटा लगाती भी है तो अपने ही लोग चिल्लाने लगते हैं कि मुस्लिम पार्टी को गले लगा लिया. रोहिंग्या को बसा लिया. सीज फायर कर दिया. कश्मीर को पैसा दे दिया.

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