सनातन धर्म : एक साधे सब सधे

किसी भी वस्तु में मूल्य (price/value) कहां से आता है?

पदार्थ में द्र्व्यमान (mass) कहां से आता है?

भले ही उपरोक्त दोनों प्रश्न Mccaulay शिक्षा पद्वति के कारण अलग अलग विषयों के प्रतीत होते हों, पहला प्रश्न अर्थशास्त्र से संबंधित है तो दूसरा भौतिक शास्त्र से, किन्तु इन दोनों प्रश्नों का मूल सैद्धांतिक चिंतन एक ही है.

फिर भी पहले प्रश्न का उत्तर कोई भी अर्थशास्त्र का छात्र बड़ी आसानी से दे सकता है किन्तु दूसरे प्रश्न का उत्तर बड़े से बड़े वैज्ञानिक के पास भी नहीं होगा.

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मुद्रा (currency) के अस्तित्व में आने से पहले मानव वस्तु के बदले में वस्तु का ही लेन देन कर रहा था. यह ठीक वैसा ही है जैसा भौतिकशास्त्री ब्रह्मांड के शुरुआती क्षणों ( primitive universe) में gravitons नाम के जादुई कणों के आपसी आदान-प्रदान (exchange) की कल्पना करते हैं.

जादुई इसलिए क्योंकि ये कण fermions (matter से संबंधित) और bosons (forces से संबंधित) दोनों की तरह व्यवहार कर सकते हैं. किन्तु exchanges बढ़ने पर fermions और bosons का अलग अलग अस्तित्व देखने में आता है ठीक वैसे ही जैसे बार्टर प्रणाली अधिक समय तक व्यवहारिक नहीं रह पाती और अंततः मुद्रा और वस्तु अलग अलग अस्तित्व में आ जाते हैं.

मुद्रा के अस्तित्व में आते ही अधिकाधिक मूल्य (अर्थ/mass) को लंबी दूरी तक ले कर जाना सरल हो जाने के कारण व्यापार में विस्तार होना शुरू हो जाता है तो वहीं भौतिकी में भी goods condensate बढ़ने के साथ ही ब्रह्मांड का भी विस्तार शुरू हो जाता है.

धीरे धीरे वस्तुओं का आदान प्रदान बढ़ने के साथ ही वैवाहिक और व्यापारिक संबंधों (bonds) के स्थापित होने से एक जटिल समाज की रचना होती है तो वहीँ आर्थिक जगत में भी और अधिक जटिल उपक्रम जैसे प्रतिभूतिया, स्टॉक एक्सचेंज derivatives, SWAPS, forward rate agreement इत्यादि अस्तित्व में आने लगते हैं तो वहीँ भौतिक संसार में भी कणों के परस्पर मिलन (bonds) के चलते जटिल भौतिक पदार्थों की रचना आरम्भ होती है.

इस से सिद्ध होता है कि दो अलग अलग प्रतीत होने वाली घटनाओं के पीछे का governing principle भी वस्तुतः एक ही है. अर्थशास्त्र और भौतिकी के पीछे एक ही cosmic law काम कर रहा है.

वह सनातन सिद्धांत जिन से सामाजिक, आर्थिक और भौतिक जगत की संरचना होती है, वह मौलिक नियम (fundamental laws) जो सभी विषयों का आधार हैं उनको ही भारतवर्ष में सनातन धर्म (eternal cosmic law) कहा जाता है.

आपको निर्णय लेना है, आप अपने बच्चों को स्कूलों में क्या पढ़ाना चाहते हैं, Physics, Maths , Economics …… या सिर्फ सनातन धर्म?

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