अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस : याद दिलाता भूली बिसरी ऐतिहासिक कहानियां

संग्रहालय न होते अगर तो हम उन वस्तुओं को किस तरह से देख पाते जिनका ज़िक्र हम किताबों में पढ़ते हैं या जिनको हमने पुरानी तस्वीरों में कहीं देखा है.

ये संग्रहालयों का ही योगदान कि आज हम अपने इतिहास की दुर्लभतम चीज़ों को देख पा रहे हैं और आगे भी हमारी अनेकों पीढियां इनको देखकर पिछली सदी को समझ सकेगी.

हमारे देखते-देखते ही सदी बदल गयी. परंतु, गुज़री सदी अपने पीछे अनगिनत निशानियाँ छोड़ गयी जिनको म्यूजियम में रखकर सदा-सदा के लिये अमर कर दिया गया.

तो जब भी नई सदी ये जानना चाहेगी कि उससे पहले लोग किस तरह से जीते या किस तरह के यंत्रों का इस्तेमाल करते थे तो अधिक मुश्किल न होगा क्योंकि, अब तो तकनीक की वजह से बहुत कुछ संग्रह कर के कम से कम जगह में रख पाना संभव हुआ जो पहले कठिन था. क्योंकि अब तो बहुत-से जरुरी डाक्यूमेंट्स को बहुत बड़ी मात्रा में डिजिटली स्टोर किया जा सकता हैं.

प्रत्येक देश, प्रत्येक प्रांत, प्रत्येक नगर की अपनी थोड़ी-बहुत सांस्कृतिक विरासत होती है जिसे संजोकर ही लंबे समय तक जीवंत रखा जाता है और यदि ऐसा न किया जाता तो हमें ये किस तरह पता चलता कि किस जगह, किस समय, किस तरह की प्राचीन शैलियाँ प्रचलित थी. चाहे वो बोलचाल हो या पुस्तकें या फिर बर्तन, कपड़े और फिर चाहे वो उसकी स्थानीय धरोहर हो, इनसे ही उसे समझने में आसानी होती हैं.

ये तो हुई उन वस्तुओं के संग्रह की बात जिनका संबंध इतिहास से होता इसके अतिरिक्त बहुत-से लोगों के पास भी कुछ न कुछ ऐसा होता जो अनमोल हैं तो उनके परिवारवाले भी उसे धरोहर के रूप में सुरक्षित रख देते जिससे कि उनके खानदान की विरासत पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को अपने वैभवशाली इतिहास से परिचित करवा सके और यही वजह कि लोगों के भीतर दुर्लभ चीजों को सहेजने की प्रवृति उत्पन्न हुई जिसने संग्रहालय को जन्म दिया.

‘अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ का यही उद्देश्य कि हम जो अपने आप में खोये, मशीन बनने में जुटे हैं, वे थोड़ा-सा समय निकालकर आज के दिन और यदि आज संभव न हो तो कभी-न-कभी इन स्थानों का भ्रमण करें और अपने देश, अपनी मातृभूमि, जन्मभूमि के उस गौरवशाली इतिहास को जाने, जिसने हमें विश्व पटल पर मान-सम्मान के साथ स्थापित किया और जिसकी वजह से हम अपने देश पर गर्व करते हैं.

इसलिये आज के दिन सरकार म्यूज़ियम में घूमना-फिरना निःशुल्क रखती है ताकि अधिक-से-अधिक संख्या में लोग वहां जाये और इस दिन को संग्रहालय में मनाये.

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