कश्मीर का नक्शा तक तो देखा नहीं कायदे से, लगे हैं ज्ञान बांटने

ये लेख उन महानुभावों को समर्पित है जो कश्मीर का ‘क ख ग’ यानी ABC भी नहीं जानते, पर रमज़ान के दौरान सेना के ‘Cease Fire’ पर ज्ञान बांट रहे हैं.

ये जितने ज्ञानी गुणी जन हैं, मैं दावे के साथ कहता हूँ कि इन्होने ज़िन्दगी में कश्मीर का नक्शा नहीं देखा कायदे से.

हमने भी नहीं देखा था साल भर पहले तक.

वो तो भला हो JKSC मने Jammu Kashmir Study Circle वालों का, जिन्होंने छोटी छोटी सभा गोष्ठियां कर हमको कश्मीर का असली नक्शा दिखाया… और उस नक्शे के साथ कश्मीर की असलियत दिखाई.

अपने drawing room में बैठ के हम दरअसल कश्मीर को मीडिया और न्यूज़ चैनल्स की नज़र से देखते हैं, या यूं कहें कि सिर्फ इतना देखते हैं जितना वो दिखाते हैं. हमारी कश्मीर के बारे में सिर्फ इतनी सी समझ है जितनी इन न्यूज़ चैनल्स और समाचार माध्यमों ने बनाई है.

जम्मू काश्मीर का कुल रकबा है लगभग 2 लाख 22 हज़ार वर्ग किलोमीटर. इसमें से बमुश्किल 1 लाख वर्ग किलोमीटर आज भारत के पास है. बाकी तो नेहरू ने पाकिस्तान और चीन को दे दिया…

उस बचे हुए 1 लाख वर्ग किलोमीटर में से सिर्फ 10% इलाका और जनसंख्या ही अशांत है… उस अशांत एरिया में भी सिर्फ कुछ Pockets या कुछ गांव या शहरी, अर्धशहरी कस्बों के मुहल्ले ही अशांत है…

घाटी के सिर्फ 5 जिले अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और श्रीनगर ही अशांत हैं. इन जिलों में भी सिर्फ छोटी छोटी Pockets, कुछ गांव या कुछ मुहल्ले ही अशांत हैं.

आज पाकिस्तान परस्त अलगाववादी इस बात को ले के परेशान हैं कि उनकी आज़ादी की लड़ाई सिमट के घाटी के कुछ मुहल्लों भर तक सीमित रह गयी है. शेष कश्मीर न उस से सहमत है, न उसमें हिस्सा लेता है और न वो पाकिस्तान के साथ जाना चाहता है.

काश्मीर घाटी की (मैं जम्मू और लेह लद्दाख रीजन की बात नहीं कर रहा हूँ) भी 90% जनसंख्या अलगाववादियों और पत्थरबाजों के साथ नही है. आज ये अलगाववादी घाटी में पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुके हैं, isolate हो चुके हैं.

सेना लगातार काश्मीर में सदभावना अभियान (Goodwill Missions) चलाती है जिससे आम कश्मीरी अवाम भारतीय सेना को पसंद करता है. पाकिस्तानी एजेंडा घाटी के सिर्फ 5 जिलों की कुछ छोटी छोटी pockets में चलता है और ये जो भी आतंकी या पत्थरबाजी की घटनाएं होती है ये उन्ही सीमित pockets में होती हैं… शेष काश्मीर को सेना से कोई दिक्कत नहीं है.

ये जो रमज़ान में भारतीय सेना ने suspension of operation किया है (जी हाँ, ये Cease Fire नहीं है. Cease Fire दो शत्रु देशों की सेनाओं के बीच होता है. कश्मीर हमारा अपना है, अभिन्न अंग). ये suspension of operation उसी आम कश्मीरी अवाम के लिए किया है.

ये उसी अवाम को संदेश दिया है कि देख लो… हम तो शांति से बैठे हैं रमज़ान में, ये आतंकी ही रमज़ान में हथियार चलाने का गैर इस्लामिक काम कर रहे हैं…

बाकी घाटी में न तो कोई ऑपरेशन रुका है, न गोली बारी… जैसे पहले गोली का जवाब गोली से दिया जाता रहा है वैसे ही अब भी दिया जा रहा है…

वैसे भी, गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन Para Military Forces होती हैं, Army नही. MHA सेना को सिर्फ advisory दे सकता है जो सेना के लिए बाध्यकारी नही होता. यूँ भी सेना का बयान आ गया है कि सभी ऑपरेशन स्थगित नहीं किये जा सकते.

ये सिर्फ और सिर्फ एक goodwill mission है जो अलगाववादियों और शेष कश्मीरी अवाम में एक दुराव पैदा करेगा. शायद इसीलिये अलगाववादियों – आतंकियों ने इसे एक नाटक नौटंकी करार दे नकार दिया है.

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