राहुल गांधी ज़रा याद करो, ऐसा तो कभी पाकिस्तान में भी नहीं हुआ था

कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने वहां येदियुरप्पा के शपथग्रहण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा तो सैनिक तानाशाही वाले पाकिस्तान सरीखे देशों में होता है.

अपने इस बयान से दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत को पाकिस्तान से भी बदतर घोषित करने वाले राहुल गांधी की इतनी दीन-हीन, दरिद्र और दारुण राजनीतिक समझ और राजनीतिक याददाश्त पर तरस आता है.

राहुल गांधी और कांग्रेसी फौज को शायद याद नहीं इसलिए याद दिलाना ज़रूरी है कि…

कर्नाटक में येदियुरप्पा की पार्टी भाजपा तो विधानसभा की 47% सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. वो सरकार बनाने की कोशिश कर रही है. यह कोई अजूबा नहीं है. पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया के हर लोकतांत्रिक देश में हमेशा ऐसा होता है.

लेकिन… राहुल गांधी और कांग्रेसी फौज ज़रा याद करे…

18 सितम्बर 2006 की तारीख को. यह वह तारीख़ है जिस दिन अपने 3 निर्दलीय साथियों के साथ मिलकर एक राज्य की भाजपा सरकार गिराने वाले निर्दलीय को अपना समर्थन देकर कांग्रेस ने उसे राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी थी.

इसके परिणामस्वरूप उस निर्दलीय मुख्यमंत्री ने दुर्दान्त बेरहमी के साथ सरकारी खज़ाने को जमकर लूटा था. इस लूट के कारण उसे जेल भी जाना पड़ा था.

राहुल गांधी और कांग्रेसी फौज को याद नहीं आया हो तो बता दूं कि वह निर्दलीय मुख्यमंत्री मधु कौड़ा था जिसे अपने समर्थन से झारखण्ड राज्य का CM बनाकर सरकारी खज़ाने की बेरहम लूट खसोट करने की खुली छूट कांग्रेस ने सिर्फ इसलिए दे दी थी क्योंकि उसने झारखण्ड की सरकार गिरायी थी.

राहुल गांधी और कांग्रेसी फौज को पता नहीं ज्ञात है या नहीं, इसलिए बता दूं कि झारखंड में निर्दलीय मधु कौड़ा के साथ मिलकर कांग्रेस ने जिस तरह लोकतन्त्र की धज्जियां उड़ायीं थी, वैसा पाकिस्तान में भी आजतक नहीं हुआ है.

ऐसी कांग्रेसी करतूतों का यह कोई पहला या अकेला उदाहरण नहीं है.

1979 में मोरारजी देसाई की सरकार गिराने वाले मात्र 48 सांसदों के एक गुट के नेता चौधरी चरण सिंह को अपने बाहरी समर्थन से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाकर इसलिए पुरस्कृत किया था क्योंकि चौधरी चरण सिंह ने पूर्ण बहुमत की सरकार गिरा कर कांग्रेसी की मंशा पूर्ण कर दी थी.

अपना मतलब सिद्ध होते ही 29 जुलाई 1979 को अपने समर्थन से प्रधानमंत्री बनवाने वाली कांग्रेस ने केवल 21 दिन बाद 20 अगस्त 1979 को अपना समर्थन वापस लेकर चरण सिंह की सरकार गिरा दी थी.

राहुल गांधी और कांग्रेसी फौज को पता नहीं ज्ञात है या नहीं, इसलिए बता दूं कि 1979 में केवल 48 सांसदों के समर्थन वाले गुट की सरकार बनाकर मात्र 21 दिन बाद उसको गिराकर कांग्रेस ने जिस तरह लोकतन्त्र की धज्जियां उड़ायीं थी, वैसा तो पाकिस्तान में भी आजतक नहीं हुआ है.

1991 में जनता दल से अलग होकर वीपी सिंह सरकार गिराने वाले 54 सांसदों के नेता चन्द्रशेखर को अपने समर्थन से प्रधानमंत्री बनाने के केवल 4 महीने बाद कांग्रेस ने चन्द्रशेखर की सरकार गिरा दी थी.

राहुल गांधी और कांग्रेसी फौज को पता नहीं ज्ञात है या नहीं, इसलिए बता दूं कि 1991 में चन्द्रशेखर सरकार को समर्थन देने फिर वापस लेने की शर्मनाक नौटंकी से कांग्रेस ने जिस तरह लोकतन्त्र की धज्जियां उड़ायीं थी, वैसा तो पाकिस्तान में भी आजतक नहीं हुआ है.

और अन्त में एक और उदाहरण…

1996 में 543 सदस्यीय लोकसभा में मात्र 79 सीटों वाले गठबन्धन में शामिल 43 सीटों वाले जनता दल के एचडी देवेगौड़ा को अपने बाहरी समर्थन से प्रधानमंत्री बनाकर कांग्रेस ने 10 महीने बाद वो सरकार गिरा दी थी.

राहुल गांधी और कांग्रेसी फौज को पता नहीं ज्ञात है या नहीं, इसलिए बता दूं कि कांग्रेस ने जिस तरह अपने समर्थन से देवेगौड़ा की सरकार बनाने के केवल 10 महीने बाद उस सरकार को गिराकर लोकतन्त्र की धज्जियां उड़ायीं थी, वैसा तो पाकिस्तान में भी आजतक नहीं हुआ है.

इसलिए राहुल गांधी अपने आज के भाषण में सुधार करें और भाजपा पर आरोप लगाने के बजाय यह स्वीकार करें कि भारत में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाकर उसकी हालत पाकिस्तान से भी बदतर करने का कुकर्म कांग्रेस कई कई बार किया है.

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