मीडियाई गड़रिये

भेड़िया आया भेड़िया आया का झूठा शोर मचाने वाले गड़रिये की तरह आजकल देश में मीडियाई गड़रियों की एक फौज तैयार हुई है जो सिर्फ झूठा शोर मचाकर देश की आंखों में केवल धूल झोंकने का कुटिल कार्य कुछ इस तरह कर रही है.

बात ठीक से समझ में आये इसलिए पहले जरा इस तथ्य से परिचित हो जाइए कि…

15 मई को आये कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणामों में कर्नाटक की निवर्तमान कांग्रेसी सरकार के 30 केबिनेट मंत्रियों में से 17 मंत्री चुनाव हार गए हैं.

पिछली बार जिन 122 सीटों पर कांग्रेस को विजय मिली थी उनमें से 74 सीटों पर कांग्रेस इस बार हार गई है.

स्वयं निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पिछली बार अपने गृह जनपद की जिस चामुंडेश्वरी सीट से विजयी होकर विधानसभा में पहुंचे थे उस चामुंडेश्वरी सीट पर सिद्धारमैया को 36 हज़ार से अधिक वोटों से पराजय मिली है.

अब जरा याद करिये पिछले 2-3 महीनों की उन न्यूज़ चैनली बहसों, खबरों और रिपोर्टों को.

जिन न्यूज़ चैनली बहसों, खबरों और रिपोर्टों में शामिल पत्रकारों, रिपोर्टरों और तथाकथित बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा चीख-चीख कर बार बार यह दावा लगातार किया जा रहा था कि मैं कर्नाटक का दौरा कर के आया हूं. वहां के हर वर्ग के बहुत से लोगों से मेरी बात हुई है. मुझे सिद्धारमैया और उनकी सरकार के प्रति कर्नाटक के लोगों में कहीं कोई निराशा या नाराज़गी नहीं दिखी है. सिद्धारमैया ने वहां बहुत काम किया है. उनकी सरकार के खिलाफ वहां किसी प्रकार की कोई Anti incumbency (सत्ता विरोधी लहर) मुझे नहीं दिखाई दी है.

एबीपी, आजतक, एनडीटीवी, CNN NEWS18, INDIA TODAY आदि न्यूज़ चैनल ऐसी बहसों खबरों और रिपोर्टों से पटे पड़े थे.

आश्चर्यजनक रूप से इन बहसों, खबरों और रिपोर्टों से यह तथ्य भी गधे के सिर से सींग की तरह गायब था कि निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ गम्भीर भ्रष्टाचार की 47 शिकायतें लोकायुक्त के पास दर्ज हुईं थीं.

लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता के मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ 50 हज़ार करोड़ की अघोषित अवैध सम्पत्ति की साक्ष्यों सहित शिकायत भी पिछले 5 सालों से लोकायुक्त के पास ठण्डे बस्ते में पड़ी हुई है.

इन शिकायतों पर लोकायुक्त ने 5 सालों तक ना कोई सुनवाईं की, ना कार्रवाई की. कर्नाटक की सरकार इन शिकायतों पर कुंडली मारे बैठी रही. अतः वह 47 शिकायतें 5 साल से ठण्डे बस्ते में पड़ी हैं.

यह शिकायतें कितनी सच, कितनी गम्भीर और कितनी घातक थीं? इसका जवाब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया समेत 17 केबिनेट मंत्रियों की शर्मनाक हार स्वयं दे देती है.

अतः आज यह सवाल प्रासंगिक है कि कर्नाटक के चुनावी रणक्षेत्र के ग्राउण्ड ज़ीरो का गहन दौरा और अध्ययन करने के अपने दावे के साथ पिछले 2-3 महीनों से न्यूज़ चैनलों पर कर्नाटक की कांग्रेसी सरकार और उसके मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का गुणगान भांडों की तरह करते रहे इन राजनीतिक पोंगा पण्डितों और प्रेस्टिट्यूट्स के गैंग कर्नाटक की कौन सी जनता से कहां और क्या बात कर के आये थे?

गम्भीर भ्रष्टाचार के 4 दर्जन संगीन आरोपों में लोकायुक्त के यहां नामज़द सिद्धारमैया की भ्रष्टाचारी करतूतों का जिक्र करनेवाला कोई एक भी आदमी इन राजनीतिक पोंगा पण्डितों और प्रेस्टिट्यूट्स को कर्नाटक में क्यों नहीं मिला?

दरअसल सच यह है कि न्यूज़ चैनली भांडों की यह टीम सुनियोजित तरीके से कर्नाटक की जनता के साथ ही साथ देश की जनता की आंखों में अपने सफेद झूठ की धूल झोंक कर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना रही थी.

इसके साथ ही साथ इन राजनीतिक पोंगा पण्डितों और प्रेस्टिट्यूट्स के गैंग यह पेशबंदी भी कर रहे थे कि यदि उनकी इतनी कोशिशों के बावजूद भी कर्नाटक में BJP की पूर्ण बहुमत की सरकार बन ही जाए तो कांग्रेस EVM में छेड़छाड़ की दलील यह कहकर दे सके कि हमारी सरकार के खिलाफ कोई Anti Incumbency (सत्ता विरोधी लहर) नहीं थी इसलिए EVM से छेड़छाड़ कर के हमें हराया गया है.

इन राजनीतिक पोंगा पण्डितों और प्रेस्टिट्यूट्स की मक्कारी और बेशर्मी की हद तो देखिए कि हर कांग्रेसी कुकर्म और कलंक के भद्दे गन्दे दाग अपनी जुबान से साफ करने वाला, न्यूज़ चैनलों पर कांग्रेसी चरण वन्दना में व्यस्त रहने वाला यह संगठित गैंग हर उस पत्रकार, अखबार, न्यूज़ चैनल और सोशल मीडिया को मोदी भक्त गोदी मीडिया कहकर अपमानित करता रहता है जो इनकी तरह कांग्रेसी कुकर्मों/करतूतों पर पर्दा नहीं डालता तथा रात दिन केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तर्करहित तथ्यहीन किन्तु विषाक्ततम आलोचना में व्यस्त नहीं रहता.

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