बनारस हादसा : क्या हम सबक लेंगे?

बनारस. कैंट रेलवे स्टेशन के पास मंगलवार को निर्माणाधीन फ्लाईओवर का स्लैब गिरने के बाद दर्जनों वाहन नीचे दब गए और साथ ही दब गए उसमें बैठें 50 से ज़्यादा लोग. 10 से ज़्यादा की मौत की आशंका बताई जा रही है.

हादसा शहर के सबसे प्रमुख मार्ग पर हुआ है जिससे हादसे के बाद हर ओर चीख पुकार मच गई.

ऐसे खतरनाक हादसे में भी लोग राजनीति पर उतर आए हैं और पुल गिरने को लेकर प्रशासन को घटिया माल के उपयोग के लिए दोषी ठहरा रहे हैं जबकि पुल नहीं गिरा है, कहा जा रहा है कि पुल को जोड़ने के लिए लगाई जा रही बीम अनियंत्रित होकर पलट गई.

हमारे देश में जहाँ ट्रेन क्रासिंग बंद हो जाने के बाद भी बैरिकेडिंग के नीचे से गाड़ी निकालने का प्रयास करते हैं, वहां कैंट जैसी रोड पर हर तरह की सावधानियां भी असफल हो जाती है.

कहा जा रहा है कि कंस्ट्रक्शन ज़ोन को घेरा गया था लेकिन पर्याप्त मात्रा में जगह लेकर नहीं, क्योंकि उतनी चौड़ी सड़क वहाँ है ही नहीं, न ही सड़क के किनारे कोई ख़ास अतिरिक्त फुटपाथ ही है. और इतना तो सिर्फ़ बीम गिरने से हुआ है, न जाने पूरी स्लैब गिरती तब क्या होता…

जनता जनार्दन बेरिकेडिंग तोड़ शॉर्टकट रास्ते बनाने में व्यस्त हैं यहाँ तक कि स्टेशन के आस-पास उस फ्लाईओवर के निर्माणाधीन हिस्से के नीचे ही दुकानें तक सजी हुई हैं, सारे घेराव को नज़रंदाज़ करके या फ़िर हफ़्ते देकर.

ज़रूरी है कि जनता को भी ऐसे समय में सावधानी बरतना चाहिए. अनुशासन केवल सड़क पर ट्रैफिक पुलिस का ही काम क्यों होता है, स्वानुशासन अपनाकर ही ऐसी दुर्घटनाओं में मृत्यु का आंकड़ा कम किया जा सकता है.

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