राष्ट्रपति से शिकायत करने की याद तब क्यों नहीं आयी मनमोहन?

दस बरस तक इस देश का प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह आज दर्जन भर कांग्रेसी नेताओं के साथ राष्ट्रपति के पास यह लिखित शिकायत करने पहुंच गए.

शिकायत यह कि कर्नाटक के हुबली जिले में 6 मई को हुई चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि “…कांग्रेस के नेता कान खोलकर सुन लीजिए, अगर सीमाओं को पार करोगे, तो यह मोदी है, लेने के देने पड़ जाएंगे…”

मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उपरोक्त वाक्य को भड़काऊ और धमकी देने वाला बता कर राष्ट्रपति से मांग की है कि वो भविष्य में ऐसी भाषा नहीं बोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चेतावनी दें.

मनमोहन सिंह की इस शिकायती नौटंकी पर हंसी भी आ रही है और क्रोध भी आ रहा है क्योंकि…

इन्हीं मनमोहन सिंह की सरकार में पी. चिदम्बरम वित्तमंत्री/गृहमंत्री थे. उन्हीं चिदम्बरम की बीबी, बेटे और बहू के नाम से दुनिया के 19 देशों में फैली हुई लगभग 20 हज़ार करोड़ की अघोषित/अवैध सम्पत्तियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लगभग ढाई वर्षों की गहन जांच पड़ताल के बाद चिन्हित करने में सफलता पाई है.

3 दिन पूर्व उन्हीं सम्पत्तियों की विस्तृत सूची समेत इनकम टैक्स ने पी. चिदम्बरम उनकी बीबी, बेटे और बहू के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है.

लेकिन अपनी सरकार में वित्तमंत्री/गृहमंत्री रहे पी. चिदम्बरम के परिवार की 20 हज़ार करोड़ की अघोषित/अवैध सम्पत्ति पर मनमोहन सिंह ने एक शब्द भी नहीं बोला है. आखिर क्यों?

तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज़ शरीफ़ ने तीन दिन पूर्व ही सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि 26/11 को मुम्बई पर हुआ आतंकी हमला पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ही किया था.

इससे पूर्व अमेरिकी, यूरोपीय व रूसी समेत दुनिया की कई अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने भी एकमत से कहा था कि 26/11 को मुम्बई पर हुआ आतंकी हमला पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ही किया है.

लेकिन 26/11 को मुम्बई पर हुए पाकिस्तान के आतंकी हमले के बाद तत्कालीन मनमोहन सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल रहमान अंतुले ने हमले में पाकिस्तानी आतंकी कसाब के हाथों मारे गए ATS चीफ हेमंत करकरे की हत्या का दोषी अपराधी पाकिस्तानी आतंकवदियों के बजाय देश के तथाकथित हिन्दू आतंकवादी संगठनों को बताकर अजमल कसाब को निर्दोष साबित कर उसको बचाने की कोशिश की थी.

कुछ इसी तरह सत्तारूढ कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने बाकायदा ’26/11 हमला RSS की साज़िश’ शीर्षक वाली एक किताब का लोकार्पण किया था. ऐसा कर के दिग्विजय सिंह ने मुम्बई पर 26/11 का हमला करने के अपराधी पाकिस्तान और उसके आतंकवादियों को बचाने का निर्लज्ज प्रयास सार्वजनिक रूप से किया था.

लेकिन अपनी सरकार के एक मंत्री तथा अपनी पार्टी के राष्ट्रीय नेता की ऐसी देशद्रोही करतूतों पर मनमोहन सिंह ने तत्कालीन राष्ट्रपति से शिकायत क्यों नहीं की थी?

अपनी सरकार में मंत्री और अपनी पार्टी के नेता के खिलाफ मनमोहन सिंह ने किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई क्यों नहीं की थी?

अतः मनमोहन सिंह से देश आज इस सवाल का जवाब चाहता है कि… राष्ट्रपति से शिकायत करने की याद आप को तब क्यों नहीं आयी मनमोहन?

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