विज्ञान और वैज्ञानिक – 3 : न्यूटन के गति के नियम और गैलीलियो

सन् 1632 चल रहा है और आगरे में ताजमहल की नींव पड़ चुकी है. इसी समय इटली में एक वैज्ञानिक गैलीलियो गति की सापेक्षता के सन्दर्भ में अपने कुछ विचार प्रकट करते हैं , जिन्हें बाद में गैलीलियन सापेक्षता के नाम से जाना जाता है.

जब भी आप कहें कि ‘ आप चलते हैं’, तो यह कोई निरपेक्ष वाक्य नहीं. आपको यह बताना होगा कि आप किसके सापेक्ष चलते हैं. निरपेक्ष गति नाम की कोई घटना होती ही नहीं. गति एक ऐसी घटना है, जो सापेक्ष है.

पार्क में बैठा आदमी पार्क के सापेक्ष स्थिर है. लेकिन सूर्य के सापेक्ष वह उस पृथ्वी के साथ घूम रहा है, जिस पर पार्क स्थित है. किसी उड़ते गुब्बारे पर बैठी मक्खी उस गुब्बारे के सापेक्ष स्थिर है. लेकिन पृथ्वी के सापेक्ष चूँकि गुब्बारा उड़ रहा है, सो ज़ाहिर है , वह मक्खी भी गुब्बारे के संग उड़ ही रही है.

अपनी पुस्तक डायलॉगो में गैलीलियो किसी जलपोत में यात्रा करते व्यक्ति का उदाहरण देते हैं. यह जलपोत एकदम निश्चित गति से चल रहा है. अब अगर खिड़की-दरवाज़े बन्द हों और यह व्यक्ति बाहर न झाँक सके तो क्या यह बता पाएगा कि उसका पोत पानी में चल रहा है? नहीं, यह ऐसा नहीं कर पाएगा.

आप हवाई यात्रा करते हैं. जब हवाई जहाज़ टेक-ऑफ़ करता है और ऊपर आसमान में पहुँच जाता है, तो बहुधा उसकी गति निश्चित हो जाती है और घटती-बढ़ती नहीं. ऐसे में अगर खिड़कियाँ बन्द हों, तो क्या आपके लिए यह बता पाना सम्भव होगा कि हवाई जहाज़ उड़ रहा है? नहीं.

गैलीलियो अपनी गैलीलियन सापेक्षता की परिकल्पना कुछ इस तरह देते हैं:

एक ही दिशा में, एक ही गति से चलते दो दर्शक अगर यान्त्रिकी के प्रयोग करेंगे, तो उनके नतीजे एक-से आएँगे और उनमें अन्तर नहीं मिलेगा. इस निष्कर्ष को आज हम गैलीलियन इनवेरियेंस या गैलीलियन अ-अविभेद के नाम से जानते हैं. ( समान गति से एक ही दिशा में चलते दोनों दर्शकों के यान्त्रिक प्रयोगों के नतीजों में विभेद यानी वेरियेंस नहीं होगा. )

उदाहरण के लिए रामू-श्यामू की रेल-यात्राओं को ले लीजिए. रामू फरक्का एक्सप्रेस में उत्तर की ओर सौ की गति से जा रहा है. श्यामू राजधानी एक्सप्रेस में उत्तर की ही ओर सौ की गति से. गतियाँ एकदम स्थिर हैं, घट-बढ़ नहीं रहीं. न रेलगाड़ियों की दिशाएँ बदल रही हैं. अब चाहे गेंद गिराने वाले या गेंद लुढ़काने वाले ( या ऐसे ही कोई भी ) यान्त्रिक प्रयोग करें दोनों, एक-से नतीजे पाएँगे.

गैलीलियो के प्रयोग और इस परिकल्पना से हमें एक जानकारी मिलती है : मुक्त गति से चलने वाली कोई भी वस्तु एक निश्चित गति से एक निश्चित दिशा में चलती रहेगी. वह न रुकेगी, और न मुड़ेगी.

आप सोचेंगे और पूछेंगे कि ऐसा हमारे रोज़मर्रा के जीवन में क्यों नहीं होता. हम अगर कोई गेंद लुढ़काते हैं, तो वह रुकती क्यों है? या फिर वह किसी एक ख़ास दिशा में मुड़ क्यों जाती है?

इन सब बातों के कारण कुछ ऐसे बल हैं, जो या तो गेंद को रोकते हैं या फिर उसे मोड़ते हैं. गेंद अपने आप न रुकती है, न मुड़ती है. अगर उसे रोकने वाले और मोड़ने वाले बल न हों, तो आपकी यह गेंद अनन्त काल तक एक ही दिशा में चलती चली जाएगी.

गैलीलियो हमें वहाँ लाकर खड़ा कर देते हैं, जहाँ आइज़ेक न्यूटन की भौतिकीय सीमा शुरू होती है. गैलीलियो न्यूटनीय भौतिकी की नींव रखते हैं और उनकी बातों पर न्यूटन के सिद्धान्त पल्ल्वित होते हैं. अब हम न्यूटन और गैलीलियो पर कुछ बातें और करेंगे.

क्रमश:

विज्ञान और वैज्ञानिक -1 : आइंस्टाइन का व्यक्तित्व मन को लुभाता, कृतित्व लेकिन समझ में नहीं आता

विज्ञान और वैज्ञानिक – 2 : गैलीलियो गैलीली से मुलाक़ात से पहले

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