विज्ञान और वैज्ञानिक -1 : आइंस्टाइन का व्यक्तित्व मन को लुभाता, कृतित्व लेकिन समझ में नहीं आता

सापेक्षता के सिद्धान्त को समझने की इच्छा है लोगों की. सरल भाषा में इस तरह कि कोई महत्त्व की बात छूट न जाए. आइंस्टाइन का व्यक्तित्व मन को लुभाता है ; कृतित्व लेकिन समझ में नहीं आता है.

अगली कुछ श्रृंखला आइंस्टाइन, उनके पूर्ववर्ती व परवर्ती विद्वानों पर. यान्त्रिकी पर. भौतिकी की उस शाखा पर, जो एक ओर परमाणु के भीतर क्वॉण्टम-जगत में चली गयी है तो दूसरी ओर अन्तरिक्ष की विस्तृति में.

बिना स्थिति, गति, त्वरण, डायमेंशन, प्रकाश, पदार्थ, ऊर्जा जैसे शब्दों को ढंग से समझे आप आइंस्टाइन या भौतिकी की भाषा नहीं समझ सकते. आप नहीं बूझ पाएँगे कि हिग्ग्स बोसॉन किसे कहते हैं आख़िर और पार्टिकिल-कोलाइडर क्या बला है.

सो अगणितीय भाषा में भौतिकी से मिलाने का प्रयास रहेगा. कई बातें अस्पष्ट होंगी, कई छूट जाएँगी. लेकिन सत्य बिलकुल जाना ही न जाए और लोग विज्ञान-निरक्षर बने रहें, उससे अच्छा और बेहतर अर्धसत्य जानना है. फिर जिन्हें जानना होगा, वे पूर्ण की ओर स्वयं बढ़ लेंगे.

यह पहली कड़ी है. आगे सम्बद्ध विषयों पर बात आहिस्ता-आहिस्ता.

आइंस्टाइन को जानना चाहते हैं? व्यक्ति को कि कृतकर्म को? व्यक्ति आइंस्टाइन में ज़्यादा रुचि न लीजिए. अधिक ध्यान से कृतकर्म को समझिए. यक़ीनन किसी की जीवनी पढ़ना उसके भौतिकी-अनुसन्धान को पढ़ने से अधिक आसान है. इसीलिए लोग व्यक्ति आइंस्टाइन के बारे में लहालोट रहते हैं, बिना यह जाने कि सौ साल पहले उस आदमी ने दरअसल क्या किया और क्या कहा था.

आइंस्टाइन को हम दो मुख्य बातों के लिए याद करते हैं. पहला है प्रकाश-विद्युत्-प्रभाव (फ़ोटोइलेक्ट्रिक इफ़ेक्ट ) और दूसरा है सापेक्षता का सिद्धान्त.

ध्यान रहे प्रकाश-विद्युत्-प्रभाव एक प्रयोग-सिद्ध प्रभाव है और इसी के लिए आइंस्टाइन को भौतिकी के लिए नोबल पुरस्कार मिला. इस प्रभाव में प्रकाश के कणों का, जिन्हें फ़ोटॉन कहते हैं , किसी पदार्थ पर पड़ने के कारण पैदा होने वाली गतिविधियों की हम बात करते हैं.

फ़ोटॉन पदार्थ से टकराते हैं, तो पदार्थ से इलेक्ट्रॉन निकलते हैं. जिन भौतिक-नियमों के अन्तर्गत निकलते हैं, वे ही इस प्रकाश-विद्युत्-प्रभाव में बताये गये हैं. (ध्यान रहे कि विद्युत् दरअसल इलेक्ट्रॉनों के बहाव को ही कहा जाता है! इलेक्ट्रॉन और इलेक्ट्रीसिटी जुड़े हुए तो हैं!)

लेकिन आइंस्टाइन को विश्व में प्रसिद्धि फ़ोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के कारण नहीं मिली. उन्हें यश मिला सापेक्षता-सिद्धान्त के कारण. ऐसा क्यों हुआ, इसे समझना भी कोई बहुत मुश्किल नहीं. इस प्रभाव में विज्ञान का इन्द्रजाल-भाव नहीं है.

सोलर पैनलों से लेकर कम्प्यूटर-स्कैनरों तक और डिजिटल कैमरों से लेकर ऑप्टिकल डिटेक्टरों तक इनका प्रयोग चाहे जितना किया जा रहा हो, लेकिन इसमें उस जादू की अनुभूति नहीं होती, जिसके सामने हम चकरा सकें और चमत्कार से अभिभूत हो सकें.

फ़ोटॉन-इलेक्ट्रॉन जैसे कणों की हरकतें आम आदमी को प्रभावित करती भी हों, तो वह उनकी सूक्ष्मताओं में अभिरुचि नहीं रखता. आम आदमी स्थूल सोच वाला है. वह उन्हीं बातों पर अधिक ग़ौर करता और करना चाहता है जो स्थूल होने के साथ-साथ ब्रह्माण्ड में व्यापक हों और जिनमें एक कल्पनातीत भाव का समावेश भी हो.

सापेक्षता इन मायनों में अनबूझी रहकर भी खरी उतरती है. जी हाँ! हम जब विज्ञान पढ़ते हैं, तो उसमें इन्द्रजाल या जादू ढूँढ़ते हैं. ऐसी बात जो हमें अचम्भित कर दे. जिसके कारण हमारी आँखें विस्मय से फटी रह जाएँ और बुद्धि हतप्रभ.

सापेक्षता कुछ ऐसी है कि हमें ढंग से समझ में (ढंग से क्या, अधिकांश को थोड़ी भी! ) नहीं आती. सो हम दूसरों की देखा-देखी तालियाँ बजाते हैं. अमुक कह रहा कि बड़ा वैज्ञानिक है, तो बड़ा होगा. गेट-अप से तो सचमुच बुद्धिजीवी लगता है. होगा भी. बजाओ ताली. करो उद्घोष. जय आइंस्टाइन. यह आदमी सचमुच रॉकस्टार है! ऋषि है, मुनि है, मनीषी है! अमुक है, ढमुक है. अलाना है, फलाना है.

आइंस्टाइन के प्रकाश-विद्युत्-प्रभाव पर अभी बात नहीं. उसे जाने दीजिए. उसमें ग्लैमर नहीं है. अभी बात सापेक्षता की. और सापेक्षता की बात शुरू करते समय यह बता दूँ कि शब्द को आइंस्टाइन ने नहीं गढ़ा. यह शब्द हज़ारों सालों से अस्तित्व में था. तमाम प्राचीन व मध्ययुगीन दार्शनिक अपनी बातों और लेखों में इसका प्रयोग करते थे. लेकिन फिर लगभग चार सौ साल पहले एक वैज्ञानिक जन्मा, जिसने विज्ञान के सन्दर्भ में पहली बार सापेक्षता को ढंग से समझा और समझाया. वह आदमी इतालवी गैलीलियो गैलीली था.

हम अपनी बात गैलीलियो से शुरू करेंगे. क्योंकि गैलीलियो को जो नहीं जानेगा, वह आइंस्टाइन और सापेक्षता को नहीं जान सकता.

(मैं बहुत सरल भाषा में धीमे चलूँगा, ताकि सब साथ चलें. अन्यथा भौतिकी द्वारा आतंकित रहते हुए अधिसंख्य लोगों को कुछ हासिल नहीं होगा और आइंस्टाइन का अन्ध-जयघोष जारी रहेगा.)

क्रमश:

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