तानाशाह मोदी : बहुत याद आता है वो गुज़रा जमाना

देखिये भैया आप मानें ना मानें, लेकिन मोदी तानाशाह हैं ये तो पक्की बात है.

मोदी राज में आज़ादी छिन गयी, बोलने की आज़ादी न रही, फोटो पोस्ट करने की आज़ादी भी जाति रही.

इनटॉलेरेंस अपने चरम पर है. मने अब तो हद ही हो गयी, बहुत याद आता है वो गुज़रा ज़माना, वो आज़ादी की खुशबू और मौसम सुहाना.

जी, मुझे तो सच में पुराना ज़माना याद आता है. पुराना मने अपने मनमोहन सिंह जी का ज़माना. क्या गज़ब की आज़ादी का अनुभव होता था, जो चाहे करो कोई रोक टोक नहीं.

ये बात अलग है कि वो ज़माना खुद मनमोहन सिंह (MMS) के लिए आज़ादी नहीं गुलामी का दौर था, पर बाकियों के लिए तो वो स्वर्णिम युग था. इस मुए मोदी ने आ कर सब चौपट कर दिया, आज़ादी छीन ली सबकी, देश को गर्त में डाल दिया.

MMS के ज़माने में कितनी आज़ादी थी जहां चाहो, जो चाहो करो, जिधर मन करे उधर mms बना डालो, फिर चाहे वो हाइकोर्ट का चेम्बर ही क्यों ना हो, कोई रोकने टोकने वाला नहीं था.

और एक इधर देखिये मोदी राज में एक भी mms नहीं आया किसी केंद्रीय मंत्री का, इस सरकार को देश की जनता के मनोरंजन का तनिक भी ख्याल नहीं है.

आज़ादी तो MMS के ज़माने में थी, वो kiss of love, वो bra free day, वो free sex, वाह क्या आज़ादी थी, मुए संघी मोदी ने सब बन्द करवा दिया.

मैं तो कहता हूं मोदी को अक्ल ही नही बहुत intolerant हैं मोदी, अच्छे भले बच्चे बच्चियां टूरिज्म को सपोर्ट कर रहे थे मोदी ने बन्द करवा दिया.

और नही तो क्या… वे सब दिल्ली में ये सब कर के बता रहे थे देखो खजुराहो में तो मूर्तियां हैं यहां हम लाइव डेमो देते हैं, अब मोदी क्या जाने ये आज़ादी का स्वाद, खुद तो ज़िंदगी भर के संघ के गुलाम रहे हैं.

सबसे बड़ा नुकसान अगर मोदी ने कहीं किया है तो वो है जन्नत ए कश्मीर का, सोनिया सरकार के समय क्या जन्नत हुआ करता था कश्मीर, रोज़ दीवाली मनती थी, जिधर देखो उधर फायरिंग होती थी, हर गली हर चौराहे फायरिंग, रोज़ रात को फायरिंग.

अरे भैया ये दीवाली की तरह आतिशबाज़ी का अपना तरीका था आतंकवादियों का, फ्री की आतिशबाज़ी देखने को मिलती थी… मोदी ने पटाखा माफिया से पैसे ले कर फ्री आतिशबाज़ी बन्द करवा दी, अब पैसे दे कर आतिशबाज़ी खरीदनी पड़ती है.

मोदी को कश्मीर की इस आज़ादी भरी दीवाली से जलन होती थी इसलिए वहां सेना का आतंक फैला दिया. क्या गज़ब की आज़ादी थी खान्ग्रेस के ज़माने में, आतंकवादी अपनी पूरी गैंग के साथ मय हथियारों के फेसबुक पर फोटो अपलोड करते थे, पोस्ट कमेंट लाइक किया करते थे.

मोदी ने आते ही लाइक की जगह सब को सेना से ठुकवा दिया, एक भी नही बचा सब के सब को जन्नत पहुँचा दिया, अब दीवाली कैसे मनेगी? मोदी ने संघी दीवाली मना कर एक ही रात में ऐसी आतिशबाज़ी की कि पूरा मज़ा ही खत्म कर दिया.

सोनिया सरकार के समय कितनी आज़ादी थी… कश्मीर में क्या, पूरे देश में जहां देखो वहां बम धमाके कर सकते थे, क्या कश्मीर क्या दिल्ली जहां देखो वहाँ आतंकवादियों को दीवाली मनती थी, जगह जगह बम धमाके.. वाह क्या मंज़र था.

इस मोदी को आज़ादी से नफरत है पूरी आजादी ही खत्म कर दी, ना तो कोई बम धमाके कर पा रहा है न फेसबुक पर पोस्ट डाल पा रहा है, मोदी इतने intolerant हैं कि किसी बेचारे हेडमास्टर के आतंकवादी बेटे ने FB पर फोटो डाली नहीं कि उधर उसका एनकाउंटर करवा दिया.

हद है यार, उसके मासूम दोस्त भी निपटा दिए, मने अब इस देश मे कोई अपनी फोटो भी नही डाल सकता क्या? मोदी हेडमास्टर विरोधी हैं, मोदी हाय हाय, मोदी अस्तिफा दो.

बहुत याद आता है वो गुज़रा ज़माना, वो आतंकवाद की खुशबू वो आज़ादी का बहाना.

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