इतनी ही चिंता है, तो मुक्त कराओ न ज्ञानवापी के नीचे दबा कराहता मंदिर

काशी पौराणिक नाम है. हज़ारों लाखों सालों से काशी नाम चला आ रहा है. पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है. मध्यकाल मे बनारस कहने लगे. आधुनिक समय मे वाराणसी हो गया.
बनारस आम बोल चाल में बोला जाता है.

बनारस की पहचान गंगा जी से और काशी विश्वनाथ मंदिर से. जब औरंगज़ेब ने मंदिर का विध्वंस कर उसके ऊपर ज्ञानवापी मस्जिद बना दी, तो रानी अहिल्याबाई ने 1780 में आधुनिक मंदिर का निर्माण कराया पुराने मंदिर के बगल में. पुराना असली मंदिर तो आज भी ज्ञानवापी के नीचे दबा कराह रहा है.

मोदी जी ने वादा किया था कि बनारस का विकास करूँगा, क्योटो बना दूंगा. सबको क्योटो चाहिए.

शेक्सपियर के नाटक Merchant of Venice की नायिका Portia की तरह सब कहते हैं कि कलेजा निकाल लो पर एक बूंद भी खून नही बहना चाहिए.

हर बनारसी को क्योटो चाहिए पर एक्को इंच भूमि नही देंगे. एक्को ईंट इधर से उधर नहीं होनी चाहिए. क्योटो बना दो.

पहले बनारस को समझ लीजिये कि बनारस है क्या? कैसे बना बसा और ऐसे क्यों बना बसा. मुख्य शहर को मंदिरों और गलियों का शहर कहते हैं. पूरा बनारस संकरी गलियों और गलियों से भी बदतर सकरी सड़कों का शहर है.

पुराना बनारस कोई नया आधुनिक शहर नहीं है बल्कि हज़ारों साल पुराना है, जिस पर पिछले हज़ार साल के इतिहास में न जाने कितने आक्रमण हुए और मंदिर को न जाने कितनी बार तोड़ा गया.

इसलिए तत्कालीन नियोजकों ने जान बूझ के बनारस में तंग सकरी गालियां – सड़कें बनाई जिससे कि सेनाएं आक्रमण न कर सकें. मंदिर तक सेना लाव लश्कर समेत पहुंच ही न पाए.

वो पुराना ज़माना था जब बनारस पैदल चलता था. आज का मोदी जी का बनारस 20 लाख से ऊपर की आबादी वाला और देश का सबसे बड़ा Tourist स्थल है जहां विदेशी कम देशी तीर्थ यात्री श्रद्धालु लाखों की संख्या में आते हैं.

शहर इन लाखों मेहमानों का स्वागत कर सके उसके लिए इसे कुछ Redesign तो करना ही होगा. सड़कें चौड़ी करनी ही होंगी, गालियां जिनमें एक साथ दो आदमी नही चल सकते उन्हें चौड़ा करना ही होगा. अब कुछ बनाने के लिए कुछ तो तोड़ना हटाना पड़ेगा ही.

अब बनारस के तो कण कण में भोले बाबा विद्यमान हैं. जहां भी फरसा हथौड़ा चलेगा ऊ बाबा पे ही न गिरेगा? जब कण कण बाबा का ही है तो आखिर नया कहां बने, कैसे बने? क्योटो बने भी तो कहां बने? कैसे बने?

विश्वनाथ जी के इर्द गिर्द एक Corridor बन रहा है जिससे होके लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर सकें. उस corridor के लिए कुछ मकान का अधिग्रहण किया है सरकार ने, करोड़ों का मुआवज़ा दिया हर मकान मालिक को और सालों से काबिज़ किरायेदारों को नए corridor पर commercial space में दुकान देने का वादा. पर कांग्रेसी चिल्ला रहे हैं कि मोदी क्योटो बनाने में मंदिर विध्वंस कर रहा?

कांग्रेसियों, तुम कब से मंदिर विध्वंस की चिंता करने लगे? इतनी चिंता है अगर मंदिर की तो मुक्त कराओ न ज्ञानवापी के नीचे दबा कराहता मंदिर. कांग्रेसियों मथुरा और काशी के मंदिर की भी चिंता करो.

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