सरकारी बंगला छूट गया, बंगला लूट का सपना टूट गया

सुप्रीम कोर्ट ने आज साफ कर दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर सरकारी बंगलों का आवंटन अवैध है. और उन सरकारी बंगलों में रह रहे पूर्व मुख्यमंत्री उन बंगलों को तत्काल खाली करें.

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 2016 में ही कर दिया था लेकिन बहुत ईमानदार और सिद्धांतवादी तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश भैया क्योंकि हमेशा गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते हैं इसलिए उन्होंने विधानसभा में प्रस्ताव पास कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धन गरीब पूर्व मुख्यमंत्रियों का घर छीनने की कोशिश को नाकाम कर दिया था.

आज सुप्रीम कोर्ट ने अखिलेश भैया द्वारा गरीबों के हक के लिए चले गए उस दांव को भी खारिज कर दिया और निर्धन गरीब तथा अपने लिए घर तक नहीं खरीद पाने की क्षमता वाले पूर्व.मुख्यमंत्रियों से उनके सरकारी बंगले छीन लिए.

एक नज़र उन बंगलों पर…

उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में 5 सरकारी बंगले जिसमें शुगर कॉरपोरेशन का मुख्यालय भी शामिल था, को ध्वस्त कर लगभग 5 एकड़ भूमि में एक सरकारी बंगला तैयार किया गया था. उस बंगले का पता था 13 मॉल एवेन्यू.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने पूर्व मुख्यमंत्री को आवंटित होने वाले बंगले के नियम के बहाने यह बंगला (13 मॉल एवेन्यू) स्वयं को ही आजीवन के लिए एलॉट कर दिया.

यही नहीं, इस बंगले की साज सज्जा पर सरकार के 86 करोड़ रूपये भी फूंक दिए गए थे.

इसी तरह मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर एकड़ों में बनी आलीशान सरकारी कोठी पूर्व मुख्यमंत्री के कोटे के नाम पर स्वयं को एलॉट कर दी थी.

इसके ठीक बगल वाली आलीशान कोठी को अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए पूर्व मुख्यमंत्री के कोटे के नाम पर स्वयं को एलॉट कर दिया था.

मुलायम और अखिलेश के नाम पर आवंटित दोनों कोठियों की साज सज्जा पर भी 50-60 करोड़ से अधिक खर्च किये गए.

चूंकि अखिलेश यादव को बैडमिंटन खेलने का शौक है इसलिए स्वयं को आवंटित बंगले में अखिलेश भैया ने एक एयरकंडीशंड बैडमिंटन हॉल भी बनवा डाला था.

पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर कल्याण सिंह, एनडी तिवारी, रामनरेश यादव, रामप्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह को भी सरकारी बंगले आवंटित किये गए हैं. किंतु इन लोगों को आवंटित बंगले ना तो बहुत विशाल हैं ना ही उनकी साज सज्जा पर करोड़ों रूपये खर्च किये गए थे.

उल्लेखनीय है कि मॉल एवेन्यू और विक्रमादित्य मार्ग केवल राजधानी लखनऊ के ही नहीं, बल्कि देश के उन इलाकों में से एक हैं जहां ज़मीन की कोई निश्चित कीमत नहीं है.

यहां जमीन की कीमत कम से कम 50 हज़ार रुपये प्रति वर्गफुट से लेकर 2 लाख रुपये प्रति वर्गफुट तक है. इन इलाकों में स्थित निजी कोठियों और बंगलों की कीमत भी 50 से 100 करोड़ के पार तक जाती हैं.

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