परी : एक वीभत्स लेकिन सकारात्मक हॉरर फिल्म

मैंने जब परी का प्रोमो देखा तो एक परमब्रत चटर्जी और अनुष्का का किसिंग सीन देख ये लगा कि क्या ये हॉरर फिल्म में ये सब पर सब का भी अर्थ था. परी के लिए मैं काफी प्रतीक्षा रत थी. ये फ़िल्म साधारण हॉरर नहीं है. काफी समझने वाली फिल्म है एक बेहतर स्क्रिप्ट के साथ. हां ये तंत्र मंत्र की दुनिया का घृणित सच उल्टी कर दे, ऐसा दिखाया है. Prosit Roy ने बहुत अच्छा निर्देशन किया.

कहानी है बांग्लादेश के एक गांव से नाबालिग लड़कियों के गायब होने से शुरू होती और इसके बाद शुरू होता शिशु कंकाल विशेष कर खोपड़ी मिलने का सिलसिला.

कहानी को समझने के लिए मैं पहले एक विशिष्ट धर्म में आत्मा दुरात्मा की कहानी को बता दूं. हमारे धर्म में नर पिशाच होते हैं वैसे ही एक धर्म से इफ़रित शैतान का जिक्र किया है इस फ़िल्म में.

इरफित किसी को दिखाई नहीं देता है, बस उसकी साँसों की आवाज़ सुनायी पड़ती है. वो नाबालिग लड़कियों से बिना शरीर सबन्ध स्थापित कर शैतान की और औलादों को जन्म देता है.

इफ़रित की औलाद के जन्म देने की प्रक्रिया अल्हाद चक्र कहलाती हैं, जिन लड़कियों से वो संबंध बनाता है उनके हाथ पर उनके अनुयायी एक निशान गोद देते. इफ़रित की औलादें गर बिना नाल और खेड़ी के पैदा होती तो वो शैतान होती पर जो सामान्य नाल से, खेड़ी संग पैदा होती वो इंसान होती, सामान्य इंसान.

कायनात आंदोलन इन्हीं औलादों को ढूंढ मारने के लिए जिसे आम बांग्लादेशी मानते पर सरकार इनके अमानवीय तरीकों के चलते इस पर प्रतिबंध लगा रखा है पर छुप कर ये होता है.

अर्नब (परमब्रत चटर्जी), पियाली (रिताभरी चक्रबर्ती) को विवाह के लिए पसंद कर अपने माता पिता संग लौट रहा होता है कि तभी एक मुस्लिम स्त्री उसकी कार से टकरा मर जाती है.

पुलिस केस में आत्महत्या सामने आती है और खोजबीन पर जंगलों में उसके घर बेड़ियों में बंधी उसकी बेटी रुखसाना (अनुष्का ) मिलती है. मुर्दा घर में रुखसाना की माँ की लाश देख एक कर्मचारी समझ जाता है कि ये स्त्री से इफ़रित शैतान ने संभोग किया था और इस लिए वो इसकी सूचना फ़ोन से प्रोफेसर कासेम अली (रजत कपूर) को देता है जो कि कायनात आंदोलन का मुखिया है और छिप कर ये आंदोलन चला रहा.

कासेम अली, रुखसाना को बुरी तरह ढूंढ रहा है क्योंकि वो इफ़रित की आखिरी औलाद है. रुखसाना इसलिए जा के अर्नब के घर छिप जाती है. अर्नब धीरे धीरे रुखसाना को इंसान के तौर तरीके सिखाता है.

धीरे धीरे रुखसाना अर्नब से प्रेम करने लगती है और प्रयास कर शारीरिक सम्बन्ध बना गर्भवती हो जाती है. रुखसाना के अपने प्रति बढ़ते पागलपन के चलते डर कर अर्नब प्रोफेसर कासेम को रुखसाना का पता बता देता है.

प्रोफसर रुखसाना को मृत्यु देने के लिए बहुत यातना देता है पर उसके गर्भवती होने का सुन उसे मारता नहीं है. अपनी शक्तियों से रुखसाना कैद से निकल अर्नब को पाने चलती है जिसके लिए वो पहले प्रोफेसर का खून करती है फिर पियाली के घर पहुंचती है.

पियाली को मारने के पहले ही उसकी प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है, पियाली नर्स है और अपनी ओथ के लिए रुखसाना की मदद करती है.

रुखसाना शैतान की लड़की है पर वो अर्नब के सामान्य बच्चे को जन्म दे गायब हो जाती है. अर्नब उसे ढूंढता है और जंगलों में पाता है. शैतान की बेटी 29 दिन के मासिक धर्म के चक्र की तरफ गंदा खून नही गंदा जहर उगलती है गर ये जहर उसने किसी के शरीर को न दिया तो वो खुद मर जाती है. रुखसाना भी इसी दर्द से तड़प रही होती है. अर्नब को ये विश्वास दिला कि उसकी औलाद सामान्य इंसान है वो अपने ज़हर संग मर जाती है.

फ़िल्म शैतान जिन्न ईश्वर खुदा की बातों से एक कहानी बना ये संदेश देती है कि हर इंसान में जानवर है और जानवर भी इंसान. प्रोफेसर कासेम शैतान को खत्म करने के नाम पर खुद जानवर है जो शैतान की बेटी को खत्म करने के नाम पर उसके साथ गलत करता है इसलिए वो उसको मारती है. वहीँ शैतान की बेटी प्रेम पा कर खुद को ही बदलना चाहती है.

फ़िल्म की छायांकन अधिकतर अंधेरे में है पर अच्छा है. परम ब्रत एक अजीब से चुप रहने वाले संजीदा लड़के के किरदार में जमे हैं. डर का भाव परम अच्छे से दिखाते हैं.

अनुष्का ने बहुत उम्दा अभिनय किया है. पूरी फिल्म में बस वो एक दृश्य में हंसी है. अनुष्का होम प्रोडक्शन के लिए अच्छी स्क्रिप्ट चुनती है भले ही वो व्यवसाय पर खरी न जाये. NH10 और परी दोनों ही उम्दा हैं.

प्रोफेसर कासेम के किरदार में रजत जल्लाद लगे हैं. रीताभरी सामान्य और सुंदर लगी हैं. फ़िल्म का हर दृश्य नहीं लिख सकती पर गहन विश्लेषण करने वाले कुछ दृश्य को मान जाएंगे कि क्या दृश्य है!

जैसे कासेम की अपने पोते को खाना खिलाते हुए पीएचडी के छात्र से बाते करते हुए उसे आंखों से धमकाना, कासेम का रुखसाना की मुक्ति के लिए उस पर अत्याचार. फ़िल्म देखने लायक और शायद ये समीक्षा पढ़ देखेंगे तो और समझ आएगी बस फ़िल्म के कुछ दृश्य बहुत वीभत्स हैं, बहुत ज़्यादा, खास कर वो दृश्य जहां अल्हाद चक्र से पैदा हो रही शैतान की औलादों को कायनात आंदोलन द्वारा मारना और काली जादूगरनी को गोश्त का लालच दिखा रुखसाना के बारे में प्रोफेसर कासेम का पूछना.

अब मेरी जिज्ञासा वाला सवाल और उसका जवाब कि पाकिस्तानियों को ये फ़िल्म से क्या दिक्कत?
फ़िल्म में बांग्लादेश के विशेष सम्प्रदाय द्वारा इफ़रित को जिंदा रखने की एक विशेष पूजा दिखाई है, अंधविश्वास दिखाया है जहां वो नाबालिग कन्याओं को दें, समूह विशेष के सामने इफ़रित को संभोग करते दिखाया है और पाकिस्तान का बांग्लादेश के हर पूरे कांड पर विशेष प्रेम है तो शायद यही वजह होगी.

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