हम तो मोदी के साथ, पर वे भी तो हमारे साथ खड़े दिखाई दें

यह प्रश्न है कि 2019 में किसे समर्थन दिया जाए.

सच तो ये है कि यह प्रश्न ही नहीं है. मोदी हमारी overwhelming चॉइस हैं.

प्रश्न यह है कि मोदी को वोट क्यों दिया जाए.

यह भी बड़ा प्रश्न नहीं है. दूसरे किसी से भी मोदी बहुत बेहतर हैं, यह कारण बहुतों के लिए काफी है.

पर यह मूल प्रश्न है कि मोदी को क्या कह कर वोट दिया जाए. क्योंकि आपको सिर्फ अपना वोट देना ही नहीं है, दूसरे से वोट दिलवाना भी है.

यूँ सोचिये कि आप मोदी के सेल्समैन हैं. तो अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए यह एक खराब एडवरटाइज़िंग लाइन है कि यह आपकी मजबूरी है, दूसरा प्रोडक्ट इससे भी खराब है.

आप एक प्रोडक्ट बेचते हैं तो उसकी ब्रांड इमेज बेचते हैं. और मोदी एक बड़ा ब्रांड हैं. पर जरा सोचिए, 2014 में क्या इमेज लेकर गए थे…

जब “देश नहीं झुकने दूँगा” की धमक भरी धुन बजती थी तो कैसे रोएं खड़े हो जाते थे. आज उस इमेज को कई कारणों से क्षति हुई है.

माना कि आपको मोदी पर पूरा भरोसा है कि मोदी कुछ गलत नहीं कर सकते. पर आप मोदी का प्रचार करेंगे तो अपने जैसी सोच वाले व्यक्ति के बीच में तो नहीं करेंगे. ज़रूरत ही नहीं है. यह ज़रूरत तो वहाँ है जो बीच में खड़ा है. उसे एक मज़बूत इमेज बेचने की ज़रूरत है.

शायद 2019 भी मोदी अपने फेवरेट विकास के मुद्दे पर ही लड़ेंगे. पर सच कहूं तो विकास उतना नहीं हुआ है कि अकेले इसके बूते पर चुनाव जीत सकें. इतने बड़े देश का विकास पाँच साल में होने की चीज़ भी नहीं है.

चुनाव लड़ने के लिए जनता से एक भावनात्मक जुड़ाव चाहिए. एक मज़बूत इमेज चाहिए, सुरक्षा का आश्वासन चाहिए. काँग्रेस आ गयी तो हम और असुरक्षित हो जाएंगे, पर मोदी ने हमें कोई सुरक्षा दे रखी है ऐसा आश्वासन भी नहीं मिलता.

यह भी कह सकते हैं कि यह प्रश्न भी पाँच वर्षों में पूरी तरह नहीं सुलझाया जा सकता, पर मोदी साथ खड़े तो दिखने चाहिए.

अगर मैं अपने पिछले स्टैंड से दो कदम पीछे भी जाता हूँ जब मैंने कहा था कि मोदी को सशर्त समर्थन करें… क्योंकि जब आपने मोदी को मजबूरी में लिया तो शर्त रखने की स्थिति में नहीं रह जाते. इसे मोदी के समर्थन की शर्त न समझा जाये, तो भी यह प्रचार की ज़रूरत तो है कि मोदी हमारे साथ खड़े दिखाई दें.

सोशल मीडिया के धुरंधर आज दिल्ली में जुट रहे हैं. उम्मीद है एक सर्वमान्य सहमति लेकर निकलेंगे जहाँ से हम सभी एकमत से और पूरे जोश से 2019 की तैयारी की रणनीति लेकर मिल कर काम कर सकेंगे. एक आग्रह है…

अगर किसी की, किसी तरह मोदी के आसपास तक कोई पहुँच निकल सके तो एक संपर्क सूत्र स्थापित करने का प्रयास किया जाए. और मोदी कुछ ऐसे निर्णय लें, कुछ ऐसे संकेत दें जिससे कि उनकी प्री-2014 वाली इमेज को स्थापित करने में मदद मिले.

कुछ तो मटेरियल दें जिसे लेकर हम जनता तक जा सकें और कह सकें कि यह व्यक्ति आपके साथ खड़ा है और आपकी रक्षा करेगा. यह कन्हैया और मेवानी जैसों को नहीं पनपने देगा, रविशों और राजदीपों पर लगाम लगाएगा. यह देश को मालदा और बशीरहाट बनने से रोकेगा.

एक साल का समय है, इसमें भी बहुत कुछ किया जा सकता है और पब्लिक को यही एक साल सबसे ज्यादा याद रहने वाला है. वरना पब्लिक के बीच जाकर, लोगों का दरवाज़ा खटखटा कर आप उन्हें क्या कहेंगे? यह, कि मोदी को वोट दीजिये, वे आपकी मजबूरी हैं?

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