व्यंग्य : मोदी चाहे सब जगह बिजली पहुँचा दे, पर कुछ लोगों की बत्ती बन्द ही रहेगी

AMU में जिन्ना के जिन्न का जुनून देख कर अफजलवा के कान में जैसे ही खुजली होने लगी तो उसने एक बार फिर गुल्लू को फोन मिला दिया और बोला –

अमाँ मियाँ यह हम का सुन रहे हैं जिन्ना के जिन्न का जादू कर्नाटक के चुनावों में भी एकतरफा वोट करवा रहा है. तुम काहे हर जगह योगी को भेज देते हो. कुछ हाथ ना लगेगा बताऐ देओ छोटा मोटा भाई को.

गुल्लू थोड़ा सा तिलमिलाया और फिर बोल बैठा –

अमाँ अफजलवा मियाँ तुम जिन्ना के जिन्न की छोड़ो. वो तो कांग्रेस एनालीटिका का तमाशा भर है. अब पैसा जिसका खाया है तो उसके लिए कुछ काम तो करना पड़ता है ना. पर देख लियो यह दाव भी पप्पू पर उलटा ही पड़ेगा. आधी रोटी छोड़ कर पूरी के पीछे भागने वालों को कभी कुछ नसीब ना हुआ.

कहने को तो तेरे शहजादे ने बड़े ढोल पीट कर बोला था कि पंद्रह मिनट दे दो. मुझे तो यह समझ नहीं आता है कि जब संसद लगी होती है तो धरना दे देते हो, कोई काम नहीं करने देते. तब का टैम सही वाला नहीं होता या भोंपू खराब होता है जो बोल नहीं पाते. चुनाव में याद आता है तो शेर के बच्चे बन जाते हो. पहले राफेल में बोफोर्स वाले एंगल का दलाल तो ढूंढ लो.

इस चिल्ला चिल्ली से का मिलेगा बे?

पहले कठुआ पर तवा सेक लिए अब बेटी भाजपा वालों से बचाओ का नारा दे दिऐ. अमाँ मियाँ पंद्रह मिनट तो अईसे माँगे जैसे छप्पन को काट पीट कर छब्बीस कुमार बना दोगे.

जाओ बे तुम से ना होगा. जिसके दम पर उछले ऊ भी छब्बीस अपनी फोटुआ वायरल कराता फिर रहा है. झूठी न्यूज स्टोरी पर केस की सुनते ही बरखा बरस पड़ी ना कहती है पुलिस ने जो सबूत दिखाऐ ऊही का न्यूज बनाएँ हैं.

और ऊ तोहरे बाबा अरे तुम जल्दी से उसको अपना जीजा बनाओ तभी तो ऊ बुढ़ापे वाले हनीमून पर तीर्थ को जाऐगा ना. तुम तो समझते ही नहीं मियाँ. अब देखो ऊ बोला छप्पन का नाप लेने की ट्रेनिंग लिए हैं एनालीटिका से और दीखे उनकी तनख्वाह टैम पर नहीं दिए तो ऊ इंडिया गेट मा मोम्बत्ती काण्ड़ होई गवा.

अब सीने का नाप तो किसी और का लेना था पर अपनी ही बहनवा को नपवाए दिऐ ऊ भी अपने ही चेले चपाटों से. सुना अब तक कोई केस तो ना बनवाया किसी पर.

चुनाव में तो बोल दिऐ भाजपा वालों से बेटी बचाओ पर अपने ही लोगों से अपनी बहन ना बचाई गई. फिर किस मुँह से आधी आबादी को बचाओगे.

गीता को तो तुम लोगाँने भाभी बना डाला पर ऊ जो कश्मीर वाले से तलाकशुदा है ऊ भी तो तुम्हारे नेताओं के खानदान की है ना. उसको तो गुजारा भत्ता तक ना दिलवा सके. अब सोच जरा कर्नाटक वाले भी अगर दिल्ली की तरह सब गजनी होते तो दिल्ली वाला चुनाव ना लड़ लेता.

समझा कर चुनाव में एनालीटिका जितनी हवा बना रही है उससे ज्यादा हवा तुम खुद ही निकाल रहे हो. पंचर ट्यूब में हवा नहीं ठहरती पहले पंचर लगाना पड़ता है.

पप्पू तो पप्पू ही रहेगा. मोदी चाहे सौ फीसदी घरों में बिजली पहुँचा दे पर इसकी बत्ती बन्द ही रहेगी. फ्यूज़ बलब कभी नहीं जलते मियाँ. बदलना पड़ता है. औऊर हाँ पंचर भी जब बड़े वाला होता है तो ट्यूब बदलती है.

अफजलवा फिर अपना मन मसोस कर लग गया पंचर साटने में.

– गुल्लू कहिन

(साभार श्री जय प्रकाश जुनेजा पाशी)
(नोट : कृपया व्यंग्य को व्यंग्य की तरह ही पढ़ें, भावना आहत न करें)

 

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