ब्राह्मण अत्याचार करते रहेंगे, कोई जात धर्म बचा हो तो बताओ, उसे भी नहीं छोड़ेंगे!

एक मित्र कल से दुखी थीं कि काफी लोग ब्राह्मणों से दुःखी हैं और अपने कष्टों का सारा दोष ब्राह्मण को देते हैं.

इस पर जब मैंने ऐतिहासिक तथ्य जुटाने चालू किए तो पता चला कि ब्राह्मण जितना तो कोई आततायी हुआ ही नहीं है!

मैंने जब आदि काल में जाकर पता किया तो वाल्मीकि, भारद्वाज, गार्गेय, व्यास, शांडिल्य आदि जैसे ब्राह्मण मिले जो कि किताबें और मन्त्र लिखकर लोगों को पढ़ाने की कोशिश करते थे.

भाई पढ़ाई भी कोई चीज़ होती है! बस हर तरफ के लोगों को पढ़ा के लड़ाई कराते थे और दक्षिणा पाकर सारा धन स्विस बैंक में जमा करा देते थे. आज उसी धन के बल पर उनके हज़ारों साल बाद पैदा हुए बाभन आज दूध की नदियों में नहाते हैं.

चरक ने खामखा संहिता लिखकर उत्पात मचाया!

एक भास्कर थे जिन्होंने खामखा अंतरिक्ष तक का ज्ञान बांटने की कोशिश की!

खैर, ज्यादा तथ्य मिलते हैं तबसे जब पहली बार ब्राह्मण यूरेशिया से आये थे.

यूरेशिया से आए ब्राह्मण सिकंदर मिश्रा ने मूलनिवासी राजा पोरस यादव को हराया और पीट के पोरस राज्य लेने की कोशिश की, लेकिन संधि हो गयी और तब से यादव तथा ब्राह्मण में 36 का आंकड़ा हुआ है.

मगध के राजा धनानन्द झा ने मूलवासियों पर ऐसा अत्याचार किया जिससे कुपित होकर दलित चाणक्य ने, चन्द्रगुप्त मौर्य (OBC) से मिलकर धनानन्द झा को हराया.

इसी धनानन्द झा ने पहले मौर्या को बहुत सताया था. इसी समय से मौर्य समाज और ब्राह्मण समाज के बीच दुश्मनी हुई।

अफगानिस्तानी ब्राह्मण गौरी, जो कि गौतम तिवारी का अपभ्रंश है, उसने राजपूत राजा पृथ्वीराज चौहान को हराया, तबसे राजपूतों और ब्राह्मण की दुश्मनी चालू हुई.

ऐबक (अय्यंगर ब्राह्मण) से लेकर समरकंद से आए ब्राह्मण बाबर उर्फ़ बाढ़ू बदल जो कि किंकर दुबे का अपभ्रंश है, उसने राणा सांगा से जनम भर लड़ाई की.

बाबर के सेनापति मीर बांकी उर्फ़ मिस्टर बालकृष्णन जो कि एक अय्यंगर ब्राह्मण थे, उन्होंने अयोध्या में मंदिर तोड़ डाला.

कालांतर में जोधामणि त्रिपाठी को अकबर के दरबार में जासूस के रूप में घुसाया गया. यहाँ से ही मुसलमानों और ब्राह्मणों की दुश्मनी चालू हुई.

ब्राह्मण बाजीराव ने अक्सर मुसलमानों से लड़ाइयां लड़ीं जो कि मुसलमानों के सीने में शूल की तरह चुभती हैं.

बंगाली ब्राह्मण बंकिमचंद्र चटर्जी ने लड़ाकू टाइप ‘वन्दे मातरम’ और घोर सांप्रदायिक ‘आनंद मठ’ लिखकर, इस दुश्मनी को आगे बढ़ाया है.

आगे जब भारत में शांतिप्रिय अंग्रेज़ आये तो मंगल पांडेय ने शांति भंग की. कालांतर में तिलक, सावरकर, चंद्रशेखर तिवारी आदि ने ईसाइयों के खिलाफ जंग छेड़ी जिससे शांतिप्रिय अंग्रेज़ शासन को चुनौती मिली और भारत की शांति भंग हुई.

आज़ादी के बाद पंडित नेहरू नामक ब्राह्मण ने अपनी पुत्री एक जोलहा के यहाँ प्लांट करा दी, जिससे ब्राह्मण और मुसलमान दुश्मनी आगे और बढ़ती चली गई.

आगे न जाने कितने ऐसे ब्राह्मण आये जैसे पद्मपाणि आचार्य, मनोज पांडेय और अभी तत्काल में मेजर शुक्ल जिन्होंने अभी अभी, दो दिन पहले एक शांतिदूत को गोली मारी.

कल ही ब्राह्मण सुमित अवस्थी ने जाट राजीव त्यागी को कन्टाप धर दिया और उसके साथ, जाट – बाभन दुश्मनी का शुभारम्भ किया.

क्या सरयूपारीय, क्या कान्यकुब्ज, अय्यंगर, मैथिल, बंगाली या यूरेशिया के ब्राह्मण, सब आततायी हैं और रहेंगे. कथायें अनंत हैं, ब्राह्मण अनंत, ब्राह्मण कथा अनंता! भाई कितना बतायें!

ब्राह्मण अत्याचार करते रहेंगे, अगर कोई जात धर्म बचा हो तो बताओ? उसको भी नहीं छोड़ेंगे!

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