ऐसे बनाएं आम के अचार का सूखा मसाला

पहले मैं कुछ भी बनाने को अपनी डायरी या पाकशास्त्र की पुस्तक पर निर्भर थी. पर अब इतने वर्षों की रसोई के अनुभव से इतना तो हुआ है कि अंदाज़ से, उपलब्ध सामग्री से मन को लगे वैसे वैसे सामग्री ले कर वस्तु ठीक ठाक बन जाती है.

आम का अचार भी पहले बहुत सावधानी से वर्ष भर के लिए बनाती थी. पर यह केवल गर्मियों में ही भाता है. ज़्यादा पुराना अचार बाद में कोई खाता नही. फिर अंत में उसे यहां वहां दे दो या फेंक दो.

तो आजकल मैं दो तीन कच्चे आम लाती हूँ और उसका ताज़ा अचार बनाती हूँ. सूखा मसाला तैयार करके रखती हूं जिसे कच्चे आम में मिला देती हूं.

अचार एक आयुर्वेदिक औषधि है. पाचन के अलावा यह त्रिदोष संतुलन में भी सहायक है. इसीलिए इसमें सब कुछ जैविक उयोग में लाएं.

नमक सेंधा या पीसा खड़ा नमक हो. तेल भी शुद्ध हो रिफाइंड नहीं. अन्यथा यह औषधि का कार्य नहीं करेगा. केवल रक्तचाप व मोटापा बढ़ाएगा.

मराठी आम के अचार की विधि में राई की पीली दाल उपयोग में लाई जाती है. पर उत्तर भारत में इसका नाम भी किसी ने नही सुना होता. तो मिलना तो दूर की बात है. सरसों की दाल मिले तो वह भाती नहीं.

तो मैंने जगह के अनुसार मसाले में बदलाव किया और बन गया खमंग ताज़ा आम का अचार.

कच्चे आम को रात भर पानी में भिगोने से उसकी गर्म तासीर समाप्त हो जाती है. फिर उसे सुखा कर डंठल काट कर थोड़ी देर रखें. इससे निकलने वाला चीक भी गर्म होता है. इसे निकाल दें.

अब चाहे तो बीज के साथ काटे या बिना बीज के. वैसे अचार में पड़े बीज भी पेट दर्द में लाभदायक होते हैं. इसे भून कर पाउडर बना कर मुखवास में भी प्रयोग में लाया जाता है.

अब मसाले के लिए –

मेथी दाना भून कर पाउडर बना ले. धनिया, ज़ीरा आदि भी भून कर पाउडर बना लें.

4 टेबल स्पून फिल्टर्ड मूंगफली तेल गरम कर लें.

इसमें दो चम्मच बारीक सौंफ का तड़का लगाएं. अब गैस बंद कर दें.

इसमे हींग 2 छोटे चम्मच डालें.

4 छोटी चम्मच मेथी दाना चूर्ण डाले.

4 टी स्पून धनिया पाउडर, और 6 टी स्पून ज़ीरा पाउडर डालें.

4 टी स्पून जैविक हल्दी.

4 टी स्पून जैविक लाल मिर्च पाउडर डालें.

4-6 टी स्पून सेंधा नमक डालें.

अब गर्म कड़ाही में ही इस मसाले को चलाते रहे ताकि कच्चापन निकल जाए. घर भर में मसाले की सौंधी सुगंध फैल जाएगी. और पड़ोसियों को भी अचार की याद दिलाएगी.

अब ठंडा होने पर मसाले को कांच की बोतल में भर कर रखें. प्लास्टिक में कभी ना रखें.

आवश्यकता अनुसार कच्चे आम में मिलाये.

पसन्द हो तो थोड़ा गुड़ मिलाएं. थोड़ा गन्ने का सिरका भी इसमें अच्छा लगता है और औषधीय भी होता है. गन्ने का सिरका हरी चटनियों में भी डाल कर अच्छा लगता है.

माँ की रसोई से : केरी का अचार

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY