PGurus की पत्रकारिता पर प्रश्न-चिह्न! वरिष्ठ पत्रकार ने ठोका मानहानि का मुकदमा

वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र राय ने न्यूज़ वेबसाइट ‘पीगुरूज़ डॉट कॉम’ पर दिल्ली हाई कोर्ट में अपने बारे में तथ्यहीन और भ्रामक खबर प्रकाशित करने के आरोप में 100 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा किया है.

इतना ही नहीं, श्री राय जो कि इस समय ‘द प्रिंटलाइंस‘ न्यूज़ पोर्टल के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ हैं, ने इस संबन्ध में वेबसाइट ‘पीगुरूज़ डॉट कॉम’ के खिलाफ नोएडा पुलिस में मामला भी दर्ज करवाया है. यह एफआईआर उनके द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर दर्ज की गई है.

उपेन्द्र राय का कहना है कि उनके खिलाफ सोची समझी साज़िश रची गई है जिसमें कुछ वरिष्ठ अधिकारी, राजनीति से जुड़े लोग और पत्रकारिता जगत के लोग शामिल हैं.

उपेन्द्र राय ने इन सभी पर भ्रष्टाचार, लाइज़निंग और पीत पत्रकारिता करने के आरोप लगाए हैं.

राय का कहना है कि 28 मार्च, 2018 को उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने एक चर्चित अधिकारी राजेश्वर सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला संज्ञान में लेने के लिए विस्तार से रखा.

उनका कहना है कि संदर्भित अधिकारी के खिलाफ पिछले 8 वर्षों से पत्रकारिता के मानकों पर भ्रष्टाचार की लड़ाई चल रही है. इसी कारण से राजेश्वर सिंह और भ्रष्टाचार में उनके सहयोगी अधिकारी उनके खिलाफ षड्यंत्रों में जुटे हैं.

राय ने आगे कहा कि इस षड्यंत्र में कुछ वरिष्ठ कमीशनखोर नेता भी शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट में उक्त मामले की इसी हफ्ते सुनवाई होनी है. इसी वजह से राजेश्वर सिंह और उनकी पूरी लॉबी में बौखलाहट है.

राय ने कहा कि पूरे घटनाक्रम से निराश इस लॉबी ने उन्हें बदनाम करने के लिए वेबसाइट ‘पीगुरूज़’ पर अनर्गल खबरें प्रकाशित करवा दीं.

राय ने ‘पीगुरूज़’ वेबसाइट को रहस्यमयी बताया और इस पर सवाल करते हुए कहा कि यह साइट पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों और प्राकृतिक न्याय का खुला उल्लंघन करती रही है.

उन्होंने कहा कि यह बात सर्वज्ञात है कि पत्रकारिता में आरोप लगाने से पहले संबंधित व्यक्ति का पक्ष जानना अनिवार्य होता है, लेकिन झूठी खबरें प्रकाशित करने वाली यह साइट हमेशा किसी का स्पष्टीकरण लेने से कतराती रही है.

नोएडा पुलिस ने ‘पीगुरुज़’ के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 420, एवं सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया है.

राय के मुताबिक़, पुलिस ने प्रथम दृष्टया यह पाया है कि जो सूचनाएं वेबसाइट पर प्रकाशित हुई हैं उनको हासिल करने में आईटी अधिनियम 2008 का सरासर उल्लंघन किया गया है. इस धारा के तहत दोष साबित होने पर कम से कम 8 साल की सजा का प्रावधान है.साथ ही इस धारा में जमानत कराने के लिए हाईकोर्ट से नीचे सुनवाई का प्रावधान भी नहीं है.

खुद को अमेरिका का निवासी बताने वाले ‘पी गुरूज़ डॉट कॉम’ के संचालक श्री अय्यर से नोएडा पुलिस इनसे लगातार संपर्क करने का प्रयास कर रही है. लेकिन मिली जानकारी के मुताबिक इनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.

कानूनी जानकार बताते हैं कि अगर उनसे नोएडा पुलिस का संपर्क जल्द नहीं हो पाया तो पुलिस के पास लुकआउट नोटिस जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा. संभवतः पुलिस एक सप्ताह तक उनसे संपर्क साधने की कोशिश करेगी. अगर इसके बाद भी अय्यर से संपर्क नहीं हुआ तो नोएडा पुलिस देश-विदेश के सभी हवाई अड्डों पर लुकआउट नोटिस जारी करने की कार्रवाई कर सकती है.

गौरतलब है कि इस मामले में 23 अप्रैल को उपेन्द्र राय के लीगल नोटिस भेजने के बाद भी इस वेबसाइट के संचालकों ने उनसे पूरे मामले में उनका पक्ष जानना भी जरूरी नहीं समझा. जबकि नैसर्गिक न्याय और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के मुताबिक किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले संबंधित व्यक्ति का पक्ष जानना जरूरी होता है. लेकिन उक्त वेबसाइट ने पत्रकारिता के स्थापित मानकों का बिल्कुल खयाल नहीं रखा.

बताया जा रहा है कि यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि उपेन्द्र राय ने ईडी के अधिकारी राजेश्वर सिंह के भ्रष्ट कारनामों के खिलाफ एक शिकायत सुप्रीम कोर्ट में कर रखी है. इस शिकायत पर जल्द ही शीर्ष अदालत में सुनवाई होनी है.

मूल रूप से गाज़ीपुर के रहने वाले उपेन्द्र राय लम्बे समय तक सहारा मीडिया समूह के हेड रहे हैं. इसके अलावा कई मीडिया घरानों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. वे तहलका ग्रुप के सीईओ और एडिटर इन चीफ भी रहे हैं. इसके अलावा उपेन्द्र राय एयरवन एविएशन व एयरवन चार्टर सर्विसेज़ में निदेशक के पद पर कार्यरत रहे हैं. वे 11 सालों से प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के कार्ड होल्डर हैं.

‘पीगुरूज़’ वेबसाइट जिस तरीके उपेन्द्र राय के पीआईबी कार्ड और एयरपोर्ट एंट्री पास को लेकर हल्ला मचा रही है, उस बारे में पूछे जाने पर उपेन्द्र राय ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीआईबी कार्ड रखना मेरा अधिकार है क्योंकि मैं पिछले तकरीबन 21 साल से पत्रकारिता को अपना जीवन समर्पित कर चुका हूं. जहां तक सवाल एयरपोर्ट एंट्री पास का है, एयरवन एविएशन में निदेशक (क्वालिटी कंट्रोल) होने के नाते यह पास मुझे हासिल हुआ है. मैंने कभी इस तथ्य को छिपाने की कोशिश नहीं की है.

इस बारे में ‘पीगुरूज़’ द्वारा लगाए गए आरोप पर उन्होंने बताया कि मेरे वकीलों के मुताबिक एयरपोर्ट एंट्री पास और पीआईबी कार्ड रखना देश के किसी कानून का उल्लंघन नहीं है. मेरे पास इन्हें रखने की पूरी अर्हता भी है. साथ ही ये कार्ड मुझे कोई हाल-फिलहाल नहीं मिले हैं. बावजूद अगर इन्हें मुद्दा बनाया जा रहा है तो इससे साफ है कि आरोप लगाने वालों की नीयत ठीक नहीं है. फिर भी यदि किसी संबंधित अथॉरिटी को इस बारे में जवाब देने की जरूरत पड़ी तो मैं इसके लिए सदैव तत्पर हूं.

पीगुरूज़ के सवाल पर दिया स्पष्टीकरण

हालांकि इस बारे में ‘पीगुरुज़’ ने एफआईआर में लगाई गई धारा 420, 509 और आईटी एक्ट की धारा 66 पर सवाल उठाए हैं. ‘पीगुरुज़’ के मुताबिक़ धारा 420 धोखाधड़ी के मामलों में प्रयुक्त होती है. वेबसाइट ने सवाल किया कि एक लेख लिखना कैसे धोखाधड़ी के तहत आ सकता है? (Sec 420 is for cheating and how can writing an article come under the charges of cheating?)

इसी प्रकार ‘पीगुरुज़’ ने सवाल उठाया है कि धारा 509 तो महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में प्रयुक्त होती है. वेबसाइट ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा है कि हमें पता नहीं था कि उपेन्द्र राय, जिन्होंने खुद को पुरुष घोषित किया हुआ है, दरअसल एक महिला दीखते हैं. (The worst was the invoking of Sec 509. This Section is meant for offences against women. We don’t know Upendra Rai who declared himself as a male looked like a woman.)

आईटी एक्ट की धारा 66 पर वेबसाइट में प्रकाशित इस लेख में कहा गया है कि यह धारा ‘कम्प्युटर हैकिंग’ है. किसी लेख के प्रकाशन के खिलाफ यह धारा कैसे इस्तेमाल की जा सकती है. (The third offence was under Sec 66 of Information Technology Act which deals with hacking a computer. How can publishing an article come under this?)

इस बारे में स्पष्टीकरण देते हुए उपेन्द्र राय की तरफ से बताया गया कि ‘पीगुरुज़’ वेबसाइट चलाने वाली कंपनी पीगुरुज़ इंक (Pgurus Inc) hai, जो कि अमेरिका में कैलिफोर्निया के सेन जोस में रजिस्टर्ड है. बताया गया कि वहाँ राज्य की पंजीकरण संस्था के समक्ष जो disclosure और तथ्य Pgurus Inc की ओर से दिए गए हैं, उसके ऐन उलट ‘पीगुरुज़’ यहाँ काम कर रही है. इसके आधार पर धारा 420 का मामला बनाता है.

राय की तरफ से बताया गया कि धारा 509 एफआई आर से ड्रॉप करा दी गई है. हालांकि आईटी एक्ट की धारा ज़रूर इसमें है क्योंकि उपेन्द्र राय की आय और संपत्तियों के बारे में जो जानकारी वेबसाईट ने दी है, वह या तो उनके कम्प्युटर में, या आयकर विभाग के कम्प्युटर में अथवा जांच एजेंसियों के कम्प्युटर में फीड हो सकती है. बिना इनमें सेंध लगाए ‘पीगुरूज़’ को ये जानकारियां नहीं मिल सकतीं. यदि वेबसाइट ने ऐसा कुछ नहीं किया है तो राय की आय से सम्बंधित आंकड़े मनगढ़ंत हैं.

राय के हवाले से कहा गया कि नियम-कायदे तोड़े बिना भारत में पैसे कमाना कोई अपराध नहीं है, जबकि उस आय पर सभी प्रकार के देय कर चुकाए जा रहे हों, तन ऐसे में आय के आंकड़े उछालने का उद्देश्य सिर्फ खबर को सनसनीखेज़ बनाने, छवि धूमिल करने और चरित्र हनन का प्रयास ही माना जाएगा.

इसी तरह ‘पीगुरूज़’ के 29 अप्रैल को प्रकाशित लेख, जिसमें दावा किया गया है कि नोएडा पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद इस मामले में दायर एफ़आईआर को खारिज कर दिया है (Noida Police expunges FIR filed by Chidambaram’s benami petitioner Upendra Rai against PGurus) के बारे में उपेन्द्र राय की तरफ से कहा गया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है और ऐसा करने का अधिकार कोर्ट को होता है, ना कि पुलिस थाणे को. बताया गया कि 28 अप्रैल 2018 को एफआईआर खारिज करने संबंधी नोएडा पुलिस का ट्वीट भी संभवत: राजनीतिक दबाववश किया गया था और बाद में इस ट्वीट को नोएडा पुलिस के ट्वीटर हैंडल से हटा भी लिया गया.

इसी प्रकार उपेन्द्र राय द्वारा अपने पाते के संबंध में भ्रामक जानकारी देने के वेबसाईट के दावे पर जानकारी दी गई कि दोनों ही एड्रेस, जिससे ‘पीगुरूज’ को कानूनी नोटिस भेजा गया और दूसरा जो एफआईआर में दर्ज है, उपेन्द्र राय के ही हैं. एक पते पर राय के भाई रहते हैं और उसमें उन्होंने अपना ऑफिस बनाया हुआ है, और देर रात्रि विलंब हो जाने की स्थिति में उपेन्द्र राय यहाँ रात्रि विश्राम भी कर लेते हैं, जबकि दूसरे पते पर खुद उनका और उनके परिवार का निवास है.

बताया गया कि ‘पीगुरूज’ द्वारा हर लेख में उपेन्द्र राय को काँग्रेसी नेता पी चिदंबरम से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जबकि वे आजतक कभी चिदंबरम से मिले भी नहीं है. कहा गया कि ये उन्हें काँग्रेसी चित्रित करने की एक तिकड़म है.

कुल मिलाकर यदि उपेन्द्र राय की बातों को माना जाए तो ‘पीगुरूज़’ की कहानी में कई छेद और झोल नज़र आते हैं. हकीकत तो खैर, पुलिस की निष्पक्ष और दबावरहित जांच से ही सामने आ सकेगी.

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