राजनीति मेड सिम्पल : मोदी मिले हैं तो कसकर पकड़ रखिये

प्रधानमंत्री हैं, राष्ट्रपति हैं, लोकसभा है, राज्यसभा है, न्यायपालिका है, पुलिस है, मिलिट्री है. राज्य हैं, मुख्यमंत्री हैं, राज्यपाल हैं… लोग आते जाते रहते हैं.

जनता में उद्योगपति हैं, अस्पताल हैं, कारखाने हैं, दुकनें हैं, मॉल्स आदि भी हैं, स्कूल्स कॉलेजेस हैं. पार्क हैं, बिल्डिंगे और मकान हैं. बिजली पानी है. और भी जोड़ सकते हैं, होटल बार डिस्को वगैरह.

फिर वो इंजीनियर, डॉक्टर, प्रोफेसर, किसान, सैनिक, स्टूडेंट्स वगैरह.

ये हुआ सिस्टम के अंग

पिछले सत्तर साल से एक ही पार्टी का राज रहा. आज़ादी के पहले कुछ रहा होगा तो उसके बाद निकल पड़ी. बेस वही रहा.

ब्रिटेन से आज़ादी पाई थी तो ब्रिटेन के दोस्तों से जुड़ना नहीं था. जुड़े रशियन ग्रुप से. विदेश नीति इतनी सी रही. राजनीति की कहानी 2014 तक इतनी सी रही.

बीच में बीजेपी अलग रुख लिए आई तो पर कांग्रेस ने टिकने नहीं दिया. 2014 में आई बहुमत के साथ, तो उनको भी पता था कि जो आधार मिला है, काम उसी पर तेज़ी से करना है.

विदेश नीति में तेज़ी से बदलाव लाये गए. पहले तो लोग मज़ाक उड़ाते थे, बाद में समझने लगे जब अंतरराष्ट्रीय फायदे मिलने लगे.

नेहरुकालीन विदेश नीति तो पोलराइज़ेशन की थी. रशियन ग्रुप के साथ खड़े होने की…

मोदी जी ने बदल दिया. अपुन इज़राइल भी जाऊंगा, अपुन फलीस्तीन भी जाऊंगा, ऐसा करके. भारत के लिए. पाकिस्तान में तक उनकी प्रशंसा देखने को मिल जाती है.

बाकी बात थी इंटरनल इंडिया को सेट करने की. नया, हवा में पैदा होता नहीं है, और मैनेजमेंट स्किल्स चाहिए. योजनाबद्ध तरीके से चले, पहले तो करना क्या है, वो प्रोजेक्ट का नाम, फिर जुट गए. नतीजे सामने हैं.

सत्तर साल की राजनीति में कांग्रेस को चीरकर आना किसी के लिए सम्भव नहीं. यही राजनीति है. जो आएगा भी वो भी कांग्रेस की कृपा से आयेगा अगर युवराज ऑफ कांग्रेस की इच्छा पीएम पद पर बैठने की नहीं होगी तो.

मोदी जी के लिए कहता हूं कि राजनीति का सीना चीर कर आये हैं तो उसका मतलब भी यही है कि कांग्रेसी सीना चीर कर आये हैं. कांग्रेस मुक्त भारत का मतलब भी यही है.

मोदी जी को आप क्षेत्रीय नेताओं पर कभी अटैक करते नहीं देखेंगे. केवल कांग्रेस को छेड़ते रहेंगे. जबकि युवराज के बारे में सभी जानते भी हैं.

कारण वही है कि अवसर खोया तो वापिस से देश को सालों तक कांग्रेस को झेलना होगा. कांग्रेस पार्टी नहीं, अपने आप में राष्ट्रीय सिस्टम सा बन चुकी थी. आंखें बंद कर इसकी भयावहता का अंदाज़ लगता है.

क्षेत्रीय नेताओं की क्षेत्रों में चलती है, पर केंद्र से बटन दबा तो वो भी नहीं चलती. केंद्रीय सत्ता में या तो कांग्रेस के युवराज या उनके द्वारा कोई रोबोट बिठा दिया जाएगा. यही सिस्टम ऑफ राजनीति है.

मोदी जी ने इसे तोड़ा है, जनता की सहायता से. वो भी क्षेत्रीय नेता के तौर पर उभरे, पर जिस संगठन से जुड़े थे वो राष्ट्रीय था. इस कारण उनको सहायता मिल भी गयी.

ये जान लीजिए, वो तो मोदी जी आ गए, वरना इस देश में कांग्रेस वंशवाद को आप जनता ताकते रह जाते. इतना सरल नहीं जितना आप समझ रहे हैं.

मोदी जी को कसकर पकड़ कर रखिये, इसलिए निवेदन किया था. कांग्रेस किसी भी क्षेत्रीय नेता को आगे आने नहीं देगी.

और राजनीति में प्रधानमंत्री लायक कैरियर बनाना हो तो इस सिस्टम को तोड़कर आगे आना कितना कठिन है, जनता हैं आप, समझ लीजिए. बाकी स्व निर्णय का अवसर सबके पास होता है.

सिस्टम समझ लीजिए, राजनीति समझ आ जायेगी.

कठिन है रास्ता, निकाल ही लेंगे समय
फूलों के कालीन, कब किसके रास्ते में थे.

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