चालाक बुज़ुर्ग

वैसे तो बुज़ुर्ग अक्सर घर परिवार का ध्यान रखने वाले होते हैं पर कुछ बिकाऊ टाइप भी होते हैं, घर दुकान की हर चीज़ बेच डालते हैं.

मैंने खुद ऐसे बुज़ुर्ग देखे हैं, बल्कि सही कहूँ तो ऐसे बुज़ुर्ग से डील भी की है. कई तो बहुत लालची भी होते हैं.

बात 2009 के आसपास की है. मैंने एक नया काम शुरू किया, उस काम की एडवरटाइजिंग के लिए वाल पेंटिंग करवानी थी.

पेंटर तैयार था पर उसने कहा कि जहाँ भी लिखना हो उस दीवार के मालिक से मुझे ही बात करनी होगी, हमने उसे अपने साथ लिया और निकल पड़े हाईवे पर.

मुझे तलाश थी एक बड़े मकान की जिसकी दीवार पर मैं अपना ऐड पेंट करवा सकूँ, आती जाती बस और कार से वह ऐड एकदम स्पष्ट दिखाई भी देना चाहिए.

काफी जद्दोजहद के बाद हमनें कुछ साइट फाइनल कर लीं, कोई पैसे ना मांगे इसलिए बड़ी चतुराई से मैंने ऐसी बिल्डिंग्स को चिह्नित किया था जिनकी बाहरी हालात खराब थी और दिखने में बदसूरत लग रही थी.

मैं एक एक कर मकान मालिक के पास जाता और समझाता कि देखिये आपका मकान कितना खराब लग रहा है, इसकी पुताई नहीं हुई है इसलिए इसका प्लास्टर भी खराब हो जाएगा आपका बहुत खर्चा बढ़ जाएगा, आप कहें तो मैं आपके मकान पर ऑइल पेंट करवा दूँ?

पर जिसे मैं गाँव का दादू समझ रहा था वो बुड्ढा तो ऊँची चीज़ निकला, बोला आप सिर्फ एक दीवार पेंट करवाओगे तो अपेक्षाकृत बाकी का मकान और भी खराब दिखेगा, इसलिए करवाना है तो पूरे की पुताई करवा दो और जितने पर अपना ऐड लगाना है उसे ऑइल पेंट करवा दो.

गांव के बुज़ुर्ग की चतुराई देख कर मैं हैरान रह गया, खैर साइट की लोकेशन बेहतरीन थी मैं उसे जाने नही देना चाहता था सो मैने पूरे मकान की पुताई और अपने ऐड की छपाई के लिए हामी भर दी.

बुज़ुर्ग आगे बोले ये सब के बदले आपके ऐड की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है. अब मेरा माथा ठनका, मैंने कहा मतलब??

वे बोले, देखो भैया कोई आ कर दूसरा ऐड लगा जाए या कंडे थाप जाए तो? हम दिनभर इसकी रखवाली थोड़े ही करेंगे?

मैंने कहा ये तो कोई बात नहीं हुई? तो बुज़ुर्ग बोले क्या आपने हमें अपने ऐड की रखवाली के लिए पैसे दिए हैं?

मैं समझ गया रखवाली के अलग से पैसे देने होंगे वर्ना कल ही ऐड के ऊपर कंडे छपे मिलेंगे. मैंने पूछा रखवाली का क्या लगेगा, बुज़ुर्ग का चेहरा खिल उठा, ले दे कर 1000 रुपये 6 महीनों के लिए तय हुए, कि 6 महीनों तक ना तो कोई दूसरा ऐड मेरे ऐड के ऊपर चिपकाया जाएगा ना ही कंडे थापे जाएंगे.

सो कुल मिलाकर बुज़ुर्ग ने पूरा घर भी पेंट करवा लिया, और ऐड के पैसे भी ले लिए, अब उसके लड़के कह रहे हैं कि हमारे बाप ने हज़ार रुपये में घर बेच दिया एक शहरी बाबू को.

आज मोदी में मुझे वही बुज़ुर्ग नज़र आ रहे हैं और उन्ही लड़कों की तरह कुछ नासमझ मोदी को गाली दे रहे हैं कि ‘मोदी ने लाल-किला बेच दिया’, कुछ दिन पहले ये ‘रेलवे स्टेशन बेच दिया’ चिल्ला रहे थे.

जबकि असलियत ये है कि बड़ी चालाकी से मोदी ने खस्ताहाल लाल-किले की मरम्मत भी करवा ली और पैसे भी ले लिए, जब इतनी अक्ल एक अनपढ़ गाँववाले में है तो वो तो मोदी है मोदी, गुजराती भाई है… Stay Calm Trust Modi.

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