कम्युनिस्ट क्रांति का स्टार्टअप इंडिया : सेक्स रैकेट!

जेनयू के शिक्षकों द्वारा तैयार डोज़ियर के मुताबिक कैंपस सेक्स रैकेट चलाने वालों का अड्डा है. हर तरह का नशा और उस पर लगते आये जुर्माने, रात को हॉस्टलों में महंगी गाड़ियां, मेसों तक सेक्स वर्कर्स का आना-जाना भी इस कैंपस का हिस्सा है.

साल 2015 में जेनयू के ही 11 शिक्षकों ने एक डोज़ियर तैयार किया था जिसमें ये बातें कही गयीं. इस डोज़ियर को एक साल तक छुपाने के बाद आखिरकार 2016 में सार्वजनिक किया गया.

कई लोग इस खबर से भौचक्के और कुछ फोचनीय (सोचनीय) मुद्रा में भी हो सकते हैं… कि जिस देश में राष्ट्रीय विमर्शों, चिंताओं के बाज़ार रोज़ाना के भाव से शेयर मार्केट की तरह खुलते और दिन ढलते-ढलते फायदे-नुकसान की गणित लगा बन्द हो जाते हों… वहां मैं बीते वक्त यानी 2014-2015 की यादें क्यों दिला रहा हूँ.

हर छोटी बड़ी घटनाओं के पन्नों को समय के साथ पलट देने से बहुत से संस्कार, आचार, व्यवहार की सनदें भी सामाजिक सरोकारी चिंताओं से मिट जाया करती हैं. 2014 इस देश में राजनैतिक, सांस्कृतिक परिवर्तन का साल था… जिसकी आहट 2012-13 से मिलनी शुरू हो चुकी थी.

ऐसे में जब 2014 का वह परिवर्तन सफलता से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते हुए अपने आखिरी चरण में प्रवेश कर रहा है… एक बार फिर लोकतांत्रिक व्यवस्था के आशीर्वाद से लौटने से पहले, तो कुछ पुरानी बातों, घटनाओं को देखना बनता है.

देश के जिस राजनैतिक विपक्ष को अपने एक कार्यकाल के आखिरी साल में पहुंचती सरकार के ऊपर लगाने को आर्थिक कदाचार, घोटालों, सरकारी लूट के कोई सार्थक आरोप तक हासिल न हों… तो मुझे 2019 से पहले भारतीय विपक्ष से ठीक उसी तरह की उम्मीद है… जो वे 2014 से पहले कर रहे थे.

आज केवल गैरजरूरी बहसें, तथाकथित प्रायोजित आंदोलन आदि ही शेष है विपक्ष के पास… जिसे बेचने-कमाने-खाने के काम में लाल-नीले-पीले गिरोह लगे हुए नज़र आते हैं.

हमने केरल से लेकर दिल्ली तक… क्रांति के इन कौशल विकास के साथ-साथ संगठित रूप में स्वरोजगार में लगने के गुण का गान साल 2016 की 5 फरवरी में कर लिया था. लीजिये सनद…

तिरुअनंतपुरम, केरल के युवा और ऊर्जावान पति-पत्नी राहुल पशुपालक और रश्मि के. नायर अक्टूबर 2014 में मॉरल पुलिसिंग की एक घटना को व्यवसाय के अवसर में बदलते हैं और इस तरह केरल के कोच्चि से चौराहों पर एक-दूसरे को चूमने के क्रांतिकारी… सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) के नव रोज़गार ‘किस ऑफ़ लव’ की शुरुआत होती है.

क्रांति के रैपर में यह रोज़गार… अभिव्यक्ति की आज़ादी वाली धूल उड़ाता, होंठ दर होंठ धंधे की सफलता के साथ कलकत्ता, दिल्ली पहुंचता है. आगे क्रांति के सेल्समैनों ने इस प्रगतिशील आविष्कार के स्वागत में अपनी तमाम शीलता को चुम्माई प्रगति कर जाने दिया और क्रांति का यह चुम्मा स्टार्टअप… साल 2014 का नवंबर आते-आते अपना बाज़ार पा लेता है.

क्रांति के किस ऑफ़ लव स्टार्टअप के 1 साल की प्रगति रिपोर्ट : 2015 तक.

अक्टूबर 2014 में ‘किस ऑफ़ लव’ के छोटे प्रोजेक्ट से शरुआत करने वाले जुनूनी, ऊर्जावान और क्रांतिकारी पति-पत्नी… राहुल और रश्मि के सफल कदम यहीं नहीं रुके.

इन्होंने प्यार से चूमने की आज़ाद तबियत स्टार्टअप के धंधे को कामयाबी की नयी बुलंदियों पर पहुँचाते हुए… महिला उद्यमी पत्नी रश्मि की अगुआई में एक ऑनलाइन सेक्स रैकेट की स्थापना की और ठीक एक साल बाद… नवंबर 2015 में केरल पुलिस द्वारा आठ और लोगों के साथ सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार हुए.

क्रांति के बाज़ार में इस एक साला… सफल गिरोहबाज़ी संग धंधेबाज़ी के बीच… विशुद्ध भौतिकवाद पर टिका बुनियादी दर्शन… ‘भौतिक’ के साथ ‘दैविक’ का ‘दैहिक’… ‘ताप’ लेते हुए प्रेम से तुलसी की शायरी गुनगुनाता है और स्त्री विमर्श ताड़ता है.

दैहिक दैविक भौतिक तापा. कम्युनिस्ट नहिं काहुहि ब्यापा..

इन बीते चार सालों में आप अगर इन गिरोहों की प्रगति जांचने निकलेंगे तो कभी संभोग की आज़ादी बेचने, कभी मासूमों से बलात्कार को सहमति का संबंध घोषित करने से आगे या अलग, कुछ भी सार्थक करते नहीं पाएंगे.

जबकि ये चाहें तो आज भारत और चीन के बदलते व्यवहारिक संबंधों के प्रयासों पर देश में सार्थक विमर्श कर सकते हैं… लेकिन राष्ट्र, देश के एकीकरण की अवधारणा के खिलाफ इस वैचारिक मानसिकताओं से ऐसी कोई उम्मीद बेमानी है. इनका वैचारिक-सांस्कृतिक स्वाद इन्हें हमेशा नकारात्मक ही रहने पर मजबूर किये रहा है, रहेगा.

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