आत्ममिलन

There is a part of me
That’s still broken
A tear still lies hanging
On the edge of my eye

But that’s how
I give water to the roses
Blossoming inside me

A pain still pierces through
My heart
A spear crossing through
My body
But I myself have to bear
My cross
Depending would cause me
To rupture more

At least now I know
Everything lies hidden in me
The roses
The water
The earth
The air
The space

When I am all prepared
I will meet you
With my roses
With my thorns
And you with yours

Only then it will be a beautiful
Complete meeting …..

मेरा एक हिस्सा अभी भी टूटा हुआ है
मेरी आँख की कोर से अभी भी एक आँसू लटकता है
पर ऐसे ही सींचती हूँ मैं उन गुलाबों को
जो मेरे अंतस में खिलते हैं

एक दर्द मेरे दिल के आर पार अभी भी निकलता है
एक भाला मेरी देह को बींध बींध जाता है
पर अपना क्रॉस मुझे ख़ुद ही ढोना होगा
किसी पर निर्भर होना मतलब ख़ुद को और तोड़ना

इतना काफ़ी है कि मैं जान गई हूँ
मेरे अंदर ही हैं
सारे
गुलाब
पानी
धरती
हवा
आकाश

जब मैं पूर्णतया तैयार हो जाऊँगी
तो मिलूँगी तुम्हें
अपने गुलाबों , अपने काँटों के साथ
और तुम भी आना
अपने गुलाबों और काँटों के साथ

तभी यह मिलन ख़ूबसूरत होगा और सम्पूर्ण भी….

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