बस दो ही रास्ते हैं : हिंदुत्व या गंगा जमनी तहज़ीब

हिंदुत्व के रास्ते की बात करें तो गलत को गलत और सही को सही कहने की ताकत की बात होती है, कोई भेदभाव नहीं है.

सेक्युलरों की गंगा जमनी तहज़ीब की बात करें तो आसिफा की मौत को ज़बरदस्ती गैंगरेप बताने और मंदिर का एंगल जोड़ने से शुरू होती है…

और गीता के दिनदहाड़े, जगज़ाहिर बलात्कार के बाद उसकी शादी उसी बलात्कारी से करवाने और बलात्कार का मज़ाक बना कर आपके मुँह पर थूकने तक जारी रहती है.

यानी आपके समर्थन का बदला आपकी 8-10 साल की बेटी के बलात्कार और उस बलात्कार का मज़ाक बना कर 80% बाहुल्य आबादी के मुँह पर थूक कर दिया जाता है…

और आप गंगा जमनी तहज़ीब की दुहाई देते रहते हैं क्योकि आपको फैशन के हिसाब से चलना है…

अब अगर उस फैशन में आपकी 8-10 साल के बेटी से बलात्कार हो भी जाये तो क्या फर्क पड़ता है, शहज़ाद से निकाह करवा दीजियेगा… गंगा जमनी तहज़ीब और मजबूत हो जाएगी.

वैसे बलात्कार का मज़ाक बनाने वालों की इसमें मैं कोई गलती नहीं मानता, क्योंकि सदियों से उन्होंने जो देखा और सीखा है वे उसी की बात कर रहे हैं…

उनके दादा परदादाओं ने अपनी जान बचाने के लिए अपनी 8-10 साल की बच्चियों को थाली में परोस कर दिया होगा कि “लो भैया कर लो बलात्कार” और बाद में निकाह करवा दिया होगा…

शायद उसी बलात्कार से पैदा हुई ये वही औलादें हैं, इसलिए जो इनके अब्बू ने इनकी अम्मी के साथ किया उसे ये गलत कैसे मान सकते हैं? अमां ये बलात्कार नहीं, ये तो पियार है पियार… आयशा वाला पियार.

तो गंगा जमनी तहज़ीब वाले सेक्युलरों, अब आपके पास दो रास्ते हैं, एक हिंदुत्व का और दूसरा गंगा जमनी तहज़ीब का… फैशन के चलते जिन लोगों ने भी फेसबुक पर अपनी DP काली की थी या समर्थन किया था, वे आज सोचें कि उन्हें किस रास्ते पर चलना है.

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