अहमदियों के बारे में तुम जानते ही क्या हो!

हर साल दिसंबर के महीने में कादियान, पंजाब में ‘ज़मात-अहमदिया’ का सालाना जलसा होता है.

वहाँ जायेंगे तो आपको इस तरह के स्टीकर, होर्डिंग और बैनर जगह-जगह टंगे मिलेंगे जिसमें लिखा रहता है- “Love for All, hatred for None” यानि “सबसे लिये मुहब्बत नफरत नहीं किसी से”.

इस जलसे में आपको “श्रीकृष्ण जी महाराज की जय” के नारे लगते हुये भी सुनाई देंगे.

‘जमात-अहमदिया’ के लुभावने स्लोगन और उलझा देने वाले अक़ीदे ने कई लोगों को गफ़लत में डाला हुआ है कि ‘अहमदिया संप्रदाय’ इस्लाम के अंदर का एक बड़ा ही उदारवादी, प्रगतिशील, रोशन-ख्याल, विशाल हृदय वाला और सहिष्णु चेहरा है जिसे उसके इस स्वभाव के चलते बाकी के मुसलमान पसंद नहीं करते.

लोगों को इस जमात के बारे में ये भी लगता है कि ये दूसरे मत-मज़हबों के बुजुर्गों का भी एहतराम करते हैं और ये मानते हैं कि खुदाई रौशनी की प्रकाशना सभी मत-मज़हबों के लोगों को हुई.

हम लोग फिर से किसी मूढ़ता के शिकार न हों इसलिये इस जमात के मुतल्लिक कुछ जानकारियाँ होनी आवश्यक है जो आपके सामने ये स्पष्ट कर देगी कि ये फिरका भी बाकियों की तरह ही उतना ही जड़वादी, उतना ही कट्टरपंथी और उतना ही दकियानूस है जितना बाकी के फिरके हैं.

इनको रोशन-ख्याल समझना कम-इल्मी का सबूत और जहालत है. ऊपरी तौर पर इस जमात की गतिविधियों को देखकर ये तो जरूर लगेगा कि ये तो बड़ा उदारमना समुदाय है पर वास्तव में ऐसा नहीं है.

दरअसल ये इनकी हड़प-नीति का ही मंचन है जिसे आप इनके द्वारा श्रीकृष्ण, बुद्ध या नानक के सम्मान में देख पाते हैं. ये लोग अपने दीन के सबसे सशक्त सिपाही हैं जो “Love for All, hatred for None” का नारा तो देते हैं पर अपने अलावा बाकी तमाम लोगों को कमतर, ज़लील और गुमराह मानते हैं.

इनकी लुभावनी बातों से आपको ये भले लगता होगा कि ‘जिहाद’ और ‘रक्त-चरित’ कम से कम इस फ़िरके की फितरत में नहीं है, पर यथार्थ ये है कि इनके वस्त्र भी खून से रंगे हैं जिसमें आर्य-समाज के मनीषियों से लेकर पाकिस्तान के अनगिनत हिन्दुओं का रक्त सना है.

ये लोग फिलीस्तीन के भी हमदर्द हैं और इज़रायल के तेल-अबीब और हैफा में बैठकर उन्हें भी धोखा दे रहें हैं. ये वही लोग हैं जिनके मत्थे ‘भारत-विभाजन’ का पाप है. ये वही लोग हैं जिन्होंने इकबाल से कौमी-तराने लिखवाए और जिन्ना को भारत-विभाजन के लिये फंडिग की.

ये लोग बाबरी-विध्वंस पर सबसे अधिक बिलखने वालों में थे. यही लोग हैं जिन्होंने गुरु नानक देव को मुस्लिम संत घोषित कर हिन्दू और सिखों में दूरी पैदा करने का पाप किया था. ये हमारे वेदों की मनमानी व्याख्या करते हैं और इसके संस्थापक ने स्वयं को विष्णु का दसवां अवतार घोषित कर दिया था.

कुल मिलाकार इस जमात को, इसके दोगले किरदार को, और इसके रक्त चरित्र को एक आलेख में समेटना नामुमकिन हैं. इनके सारे पाप और कर्मों की सज़ा विधाता इन्हें पाकिस्तान में दे रहा है. फिर भी एक इंसान के नाते मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वो इस समुदाय के लोगों की रक्षा करें क्योंकि हम इंसानियत को सबसे ऊपर मानने वाले लोग हैं.

एक महिला ने कल अपनी पोस्ट पर मुझे ये कहकर चुप कराना चाहा कि मुझे अहमदियों के बारे में कुछ पता नहीं है तो मैं न बोलूँ. ये लेख उनको केवल ये बताने के लिये लिखा है कि कम से कम अहमदियत और उसके किरदार पर, या इस्लाम पर लिखने के लिये मेरा मुस्लिम होना आवश्यक नहीं है.

अगर वे महिला चाहें तो अपने इस लेख को अपनी कही हरेक बात के समर्थन के लिये अगली कई किस्तों में विस्तार दे सकता हूँ, पर मेरा ये काम नहीं है और मैं नहीं चाहता कि ये मजबूरन मुझे करना पड़े.

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