मोदी के नेतृत्व में नए रूप में उभरते-संवरते योगी व उत्तरप्रदेश

वैसे तो भारत मे एक से एक राजनीतिज्ञ हुये हैं, लेकिन सफल व भारत के कपाल पर छाप छोड़ने वाले कम ही हैं.

यदि पिछले 70 के इतिहास पर नज़र दौड़ाई जाए तो यह बात समझ में आती है कि इन ज्यादातर सफल राजनीतिज्ञों ने राजनीति में जो सफलता पायी थी, वो या तो उस काल की स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी, या उनकी प्रशासनिक क्षमता अपने समकालीन राजनीतिज्ञों से ज्यादा बेहतर थी.

इन सभी राजनीतिज्ञों में नेहरू (उनकी तमाम बेवकूफियों के बाद भी), पी वी नरसिम्हाराव (भ्रष्टाचार के मामलों के बाद भी), अटल बिहारी बाजपेयी (गठबंधन सरकार के चलते, कांग्रेसी चरित्र को मिटाने में असफलता के बाद भी) ही ऐसे नेता थे जिन्होंने अपने कार्यकाल में भारत के भविष्य को देखते हुये निर्णय लिये थे.

इनके अलावा सबने अपनी 5 साला सरकार चलाने व फिर दोबारा चुनाव जीतने को दृष्टिगत रखते हुए ही निर्णय लिये थे.

लेकिन इस सबके बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपरोक्त तीनों नेताओं से बिल्कुल ही अलग स्तर के राजनीतिज्ञ हैं. भारत की समस्याओं को लेकर उनकी, लीक से हट कर सोच और फिर उसे कार्यान्वित करने का संकल्प उन्हें अलग दिखाता है.

मोदी जी के सारे बड़े निर्णय अगला चुनाव जीतने पर केंद्रित न होकर भारत के सुदृढ़ भविष्य के लिए लक्षित होते हैं. वे जहां विषम परिस्थितियों में ‘आउट ऑफ बॉक्स’ उपायों को आजमाने से नहीं चूकते, वहीं उनमें पुराने कैनवास में ही नये रंगों से भरने की क्षमता भी है.

मैं आज इस बात को इसलिये कह रहा हूँ क्योंकि मुझे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी में, मोदी जी की तरह, कुछ अलग हट कर करने की लालसा दिख रही है.

योगी ने जहां उत्तरप्रदेश में बिना मानवाधिकार वालों की चिंता किये बगैर कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू कराने की दृढ़ता दिखाई है, वहीं साल भर के कार्यों की ज़मीनी समीक्षा करने के लिये हर दिन अलग-अलग शहर, अलग-अलग गांवों में पहुंच कर समस्याओं को जानने व उनका समाधान निकालने की पहल की है.

अब तक दिल्ली की मीडिया व उनके आलोचक, उनको योगी के भगवा आवरण में ही देखते रहे हैं और उनके पुरातनपंथी होने का पूर्वाग्रह पाले हुये थे लेकिन योगी जी की दृष्टि न सिर्फ भविष्य को देख रही है बल्कि वे बदलते समय में अपने को ढाल भी रहे हैं.

एक तरफ जहां वह शताब्दियों पूर्व के नाथ सम्प्रदाय को जी रहे हैं, वहीं भारत के सुदृढ़ भविष्य के लिए, सक्षम व आधुनिक उत्तरप्रदेश को बनाने में जुटे हैं.

एक तरफ वो नोएडा की यात्रा करके दशकों से उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्रियों के नोएडा प्रवास को लेकर अहित होने के अंधविश्वास को तोड़ते हैं, वही दूसरी तरफ फरवरी 2018 में लखनऊ में अंतराष्ट्रीय स्तर का इन्वेस्टर मीट करके, उत्तरप्रदेश में अरबों का वास्तविक पूंजी निवेश जोड़ते हैं.

आज एक ऐसी खबर दिखी जिससे मेरा योगी जी को लेकर किया गया आंकलन और मजबूत होता दिखाई दे रहा है.

नरेंद्र मोदी ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आक्रमक शैली में उसको अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने की जो नीति बनाई है, योगी सरकार ने, उसी का अनुसरण करते हुये फैसला किया है कि प्रयाग में होने वाले 2019 के अर्धकुंभ को अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करेंगे व कुंभ मेले को विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनायेंगे.

हिंदुत्व के इस सबसे बड़े विहंगम आयोजन को विदेशियों की उत्सुकता का केंद्र बनाने व उसका सीधे परिचय कराने के लिये योगी जी की सरकार, 200 देशों में कुंभ को लेकर रोड-शो करेगी. वहां की जनता को कुंभ के दर्शनीय व धार्मिक महत्व के साथ हिन्दू धर्म की आस्था से परिचित कराया जाएगा.

यही नहीं, इसके साथ योगी जी ने 175 राष्ट्राध्यक्षों को भी कुंभ मेले में निमंत्रित करने का निर्णय लिया है. यदि इस फैसले को सूक्षमता से समझा जाये तो यह एक निर्णय, उत्तरप्रदेश व भारत के लिये जहां भविष्य के कई अवसर खोल रहा है, वहीं विश्व में हिंदुत्व व भगवा को लेकर भारत के सेक्युलरों द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों को तोड़ कर, प्रतिस्थापित करने का अवसर प्रदान कर रहा है.

योगी जी, आपको साधुवाद.

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