हमारी आंखों में धूल झोंक रहे धर्म के स्वघोषित ठेकेदारों से सावधान

अपनी बात शुरू करने से पहले मैं अनुरोध करूंगा कि कृपया आप इन तीन खबरों से परिचित हो जाइए.

पहली

9 दिसम्बर 2016 को एर्नाकुलम एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट ने कैथलिक पादरी फादर एडविन पिगारेज को 14 साल की एक नाबालिग बच्ची से लगातार रेप करने के आरोप में 2 बार उम्रकैद की सजा सुनाई.

खबर पढने के लिए क्लिक करें.

दूसरी

सितम्बर 22, 2017 को बेगूसराय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष कमल दीक्षित ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले के आरोपित सहरसा जिले के सलखुआ थाने के हरेबा निवासी व ग्रामीण के मस्जिद के इमाम मो काशिफ जया को अंतर्गत धारा 365 भादवि में दोषी पाकर आठ सितम्बर को पांच साल का कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड एवं पॉक्सो की धारा चार के तहत दोषी पाकर आठ साल के कारावास एवं पांच हजार अर्थदंड की सजा सुनायी

खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें.

तीसरी

21 मार्च 2018 को देवरिया के एडीजे की कोर्ट ने एक छात्र के साथ कुकर्म के अपराध में एक मौलवी को दस साल की सजा की सुनाई. साथ ही 50 हज़ार रूपए का जुर्माना भी लगाया.

खबर पढने के लिए क्लिक करें.

आज इन तीन खबरों का जिक्र इसलिए क्योंकि आसाराम को सज़ा सुनाये जाने के विरोध में हिन्दू धर्म के कुछ न्यूज़ चैनली ठेकेदार और सोशल मीडिया के तथाकथित हिन्दूवादी लठैत सवेरे से चीख रहे हैं कि हिन्दू साधू संत के खिलाफ ही कार्रवाई क्यों? किसी मुल्ला मौलवी या पादरी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती?

भारत की महान संत परम्परा के सर्वाधिक घृणित कलंक आसाराम के समर्थन में उछाले जा रहे उपरोक्त प्रश्नों की धज्जियां उड़ाने के लिए तीन खबरों का उल्लेख किया है.

गूगल पर सर्च करिये तो ऐसी अन्य कई खबरों का ढेर मिलेगा आपको.

अतः आसाराम के बचाव में हमारी आपकी आंखों में झूठ की धूल धूल झोंक रहे हिन्दू धर्म के झूठे धूर्त बेईमान स्वघोषित ठेकेदारों से सावधान रहिये.

मेरा मानना है कि आज किसी भी और धर्म के कुकर्मियों के घृणित कुकर्मों को याद कर के मैं आसाराम का बचाव करने लगूं, यह कुतर्क ना तो मुझे स्वीकार्य है, ना ही ऐसे कुतर्कों का मैं हामी हूं. मेरी चिंता मेरा धर्म है.

कोई मुस्लिम या कोई ईसाई यदि किसी कुकर्मी मौलवी या पादरी को संत मानकर उसकी पूजा करने लगता है इसलिए मैं भी किसी कुकर्मी को धार्मिक सन्त मानकर उसकी पूजा करने लगूं, ऐसे मानसिक दिवालियेपन का शिकार मैं नहीं हूं.

आप मित्रों से भी अनुरोध करूंगा कि आप भी ऐसे किसी मानसिक/ वैचारिक दिवालियेपन का शिकार बनने से बचिए तथा आपको इसका शिकार बनाने की कोशिश कर रहे धूर्तों से कठोरता के साथ पेश आइए.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY