कास्टिंग काउच, यौन शोषण और बलात्कार

कास्टिंग काउच, यौन शोषण और बलात्कार ये तीनों ही शब्द ना समानार्थी हैं और ना ही ये आपस में जोड़े ही जा सकते हैं.

कास्टिंग काउच तो कतई एक सहमति है जिसमें कि फिमेल को जो पाना है उसके लिए उसकी कीमत की अदायगी की जाती है.

जिस लड़की को कुछ पाना है वो ही तो निर्माता निर्देशक हीरो कैमरामैन आदि के साथ सम्बन्ध बनाती है.

इसमें ना तो किसी फिमेल के साथ सिम्पथी होनी चाहिए और ना ही मेल के प्रति घृणा.

इस प्रक्रिया में फीमेल को विक्टिम की श्रेणी में एक पल को भी नहीं मानना चाहिए.

यौन शोषण, बलात्कार और कास्टिंग काउच के बीच की स्टेज है. इसमें कोई भी फीमेल अपनी मजबूरी वश मेल के शोषण का शिकार होती है. किसी विधवा के सामने अपने बच्चों के पालने की या किसी लड़की को अपने परिजनों के खर्चों की चिंता, किसी को असुरक्षा की चिंता आदि आदि अनेक कारण होते हैं.

ये स्टेज फीमेल के प्रति सिम्पथी तो पैदा करती है लेकिन इसमें भी मेल को बलात्कारी जैसी घृणा नहीं की जा सकती.

लेकिन हालात ये है कि आज कल ट्रेंड बन गया है कि जब तक फीमेल का स्वार्थ है तब तक तो वो कास्टिंग काउच खूब खिलखिला कर हँसते हुए एन्जॉय करती रही और कुछ समय बाद, बल्कि वर्षों बाद उसको कोमा से उठने जैसा ज्ञान होता है कि उसके साथ बलात्कार हो गया.

ये ही हाल यौन शोषण के मामलों में होता है.

सरोज खान और रेणुका चौधरी ने यद्यपि अपने अपने क्षेत्रों की सच्चाई बयान की है और तमाम फीमेल्स को इन दोनों का अहसान मानना चाहिए कि इन्होंने उनको इन क्षेत्रों की कड़वी सचाई से अवगत करा दिया.

सरोज खान ने तो केवल किसी प्रचलित धारणा की ही पुष्टि अपने तरीके से की है. अंतर केवल इतना ही है कि ये पुष्टि स्वयं फीमेल ने की है अतः ज्यादा ऑथेंटिक है.

लेकिन रेणुका चौधरी ने भले ही किसी सच को उजागर किया हो लेकिन जो भी किया वो अच्छा नहीं किया. अंततः राजनीति फ़िल्मी दुनिया जैसी गन्दी जगह नहीं है. रेणुका ने एक झटके से इस पूरे क्षेत्र को संदेहास्पद बना कर रख दिया है.

इस क्षेत्र में तमाम फीमेल हैं. उन्होंने संघर्ष किया है. उनकी अपनी योग्यता है. अपना कौशल है. अपना अपना सम्मान है. अपना अपना चरित्र है.

लेकिन रेणुका चौधरी ने तो राजनीति जैसे महत्वपूर्ण और सम्मानजनक क्षेत्र की हर नारी का सम्मान, चरित्र और छवि को गंदे कूड़ेदान में डाल दिया.

सरोज खान ने तो अपने तरीके से अपनी फिल्मी दुनिया का बचाव ही किया था. उसको माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं थी. लेकिन रेणुका चौधरी तुमने भारत भर का बहुत बड़ा नुकसान किया है.

परदे के पीछे की सच्चाई कुछ भी हो किन्तु अंततः कुछ भ्रम बने रहने चाहिये.

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