समाज के अंतिम आदमी के आंगन में सरकार

किसी दलित के घर खाना खाने वाले योगी आदित्यनाथ बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री हैं.

मुख्यमंत्री रहते हुए ना तो दलितों की तथाकथित देवी मायावती और ना ही समाजवाद का झंडा ढोने वाले अखिलेश यादव ने कभी ऐसा किया था.

योगी आदित्यनाथ साल भर पुरानी अपनी सरकार का काम काज देखने खुद ग्राउंड पर पहुंच रहे हैं.

कल मुख्यमंत्री ने प्रतापगढ़ जिले के कंघई मधुपुर गांव में दयाराम सरोज के घर पर खाना खाया, गांव में ही चौपाल लगाई और गांव के प्राथमिक स्कूल के पास के पंचायत भवन में रात्रि विश्राम किया.

योगी आदित्यनाथ ने इसके पहले शाहजहांपुर और लखीमपुर का अचानक दौरा किया था. वहां उन्होंने गन्ना किसानों का हालचाल पुछा था.

गेंहू क्रय केंद्र पर जा कर योगी ने किसानों और अफसरों से बात की. उनकी तैयारी राज्य के कई ज़िलों का दौरा कर ज़मीनी हकीकत समझने की है.

मुख्यमंत्री ने बीजेपी की ‘ग्राम स्वराज अभियान’ के तहत जनपद प्रतापगढ़ के ग्राम कंधई मधुपुर में आयोजित ‘रात्रि चौपाल’ कार्यक्रम में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति को मिलने की बात बताते हुए रात को आयोजित चौपाल में जनता की समस्यायें सुनीं.

उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, पाइप पेयजल योजना आदि के सम्बन्ध में जनता से जानकारी प्राप्त की. इनके संबंध में किसी भी प्रकार की समस्या या शिकायत पाए जाने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं का निस्तारण शीघ्र किए जाने के निर्देश दिए.

प्रदेश के किसी गांव में पहली बार लगाई गई मुख्यमंत्री की रात्रि चौपाल में बड़ी संख्या में लोग सम्मिलित हुए. गांव वालों ने अपनी-अपनी समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया.

मुख्यमंत्री ने ग्रामवासियों को अपने करीब बैठाया और अधिकारियों के समक्ष एक-एक ग्रामवासी से उसकी समस्याओं के बारे में पूछा. उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में बात की और उनकी जमीनी हकीकत से रूबरू हुए.

मुख्यमंत्री ने जनता की समस्याओं को ध्यान से सुना और अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अधिकारीगण अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन जनहित में करें. सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक शीघ्रता से पहुंचाएं. इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इस वर्ष के चयनित 136 लाभार्थियों के नाम डीपीआरओ को जनता के सामने पढ़कर सुनाने के निर्देश दिए.

सरकारों के सामंती कामकाज की शैली के आदती सामंती कलमों को उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया का समाज उसकी सेवा के प्रति यह समर्पण अपने चश्मों को उतार कर देखने की न सिर्फ जरूरत है, बल्कि देश-प्रदेश के हित में समाज में बुनियादी विकास के साथ-साथ सामाजिक समरसता के ऐसे उदाहरणों को जनता के सामने रखने की नैतिक जिम्मेदारी भी निभानी है.

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