हमारा लिखा-कहा पता नहीं कब किसकी ज़िंदगी बदल दे, So be positive

ये फोटो मात्र एक एलईडी की बिजली वाली लड़ी ही नहीं है.

कल 22 अप्रैल 2018 को दिल्ली स्थित प्रवासी भवन में जम्मू कश्मीर – धारा 370 और 35A पर चर्चा थी.

इससे अलग दो शानदार बातें और हुईं जिनसे अपार आनंद हुआ.

मैंने पिछले 3 वर्षों में स्वरोजगार पर खूब फेसबुक पोस्ट्स लिखीं. काफी लोगों ने संपर्क करके मुझसे राय भी ली. फिर उनका क्या हुआ, पता नहीं…

लेकिन कल एक शानदार व्यक्ति से मुलाकात हुआ उनका नाम है जय प्रकाश जुनेजा पाशी… उन्होंने मुझे कल एक LED की लड़ी भेंट की जिसको उन्होंने अपने यहाँ बनाया है.

उन्होंने बताया कि उन्हें मेरी चीन से आयातित लड़ियों के मुकाबले स्वदेशी लड़ियों पर लिखा लेख जंच गया और इन लड़ियों को बनाने की उनको धुन लग गई.

उन्होंने लड़ियाँ बनाई… आसान नहीं था क्योंकि लड़ियाँ बनाने वाली मशीन यहाँ उपलब्ध नहीं, उसको चीन से लाना था.

उन्होंने पहले उस मशीन को ही बना डाला पूर्ण स्वदेशी… उसके बाद लड़ियाँ बनाई…

कुछ लोगों ने इसकी खबर चीनी उत्पादकों को दे दी… चीन के लोगों ने उनके खिलाफ Patent Violation (पेटेंट उल्लंघन) का केस कर दिया.

उन्होंने पूरे एक वर्ष तक न्यायालयों में केस लड़ा और जीत भी हासिल की… इस जीत के बाद अब उनका लड़ियाँ बनाने का उद्योग चालू है.

जुनेजा जी अब न सिर्फ लड़ियाँ बनाने वाली मशीन का उत्पादन कर रहे हैं बल्कि लड़ियाँ भी बना रहे हैं… अभी तक 8000 से ऊपर लड़ियाँ कुछ दिनों में ही बिक चुकी हैं.

जयप्रकाश जुनेजा पाशी

स्वरोजगार को लालायित उप्र/ बिहार/ झारखण्ड/ छग या कहीं के भी लोग, जुनेजा जी से लड़ियाँ बनाने की मशीन लेकर अपना लड़ियाँ बनाने का काम शुरू कर सकते है…

या फिर बल्क ऑर्डर देकर उनके यहाँ से तैयार कई तरह की लड़ियों को अपने यहाँ बेचे जाने का अपना retail trading का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं…

कुछ दिन पहले लाइव वीडियो में मैंने कहा था कि इधर सोशल मीडिया से ही निकले लोग एक स्वदेशी राष्ट्रवादी सत्य को समर्पित चैनल की स्थापना करेंगे.

तो दूसरी शानदार बात यह कि कल चर्चा करते समय ही प्रख्यात राष्ट्रवादी लेखक और मुसहर बच्चों के उत्थान को समर्पित उदयन के संस्थापक अजित सिंह ने अचानक मुझे बताया कि आपका कहा सच होने जा रहा है.

उन्होंने जानकारी दी कि जल्द ही स्वदेशी राष्ट्रवादी मीडिया स्थापित होने जा रहा है. हमारी सोच और चाह उनके एक मित्र के अन्तःकरण में घर कर गई है.

राजस्थान के उनके एक व्यवसायी मित्र इस पर विचार कर रहे हैं और अगले 6 माह में ये चैनल ज़मीन पर उतर जाए तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं होगी…

अतः जो बच्चे अभी मीडिया की पढाई कर रहे हैं और सत्य को समर्पित, राष्ट्र निर्माण को समर्पित मीडिया हाउस में जाना चाहते हैं उनको फेसबुक पोस्ट के जरिए जरूर खबर मिलेगी.

इसलिए फेसबुक पर जब स्वरोजगार से उद्योगपति, लेखन से अनेकों पत्रकार, कथांकन से अनेको प्रेमचंद के रूप पैदा होने की बात की जाए तो आपके लिए वो मज़ाक का विषय हो सकती है लेकिन इसको फलीभूत होते देखना हमारे लिए गर्व की बात है…

न जाने भारत के किस कोने में बैठे एक व्यक्ति के लिए हमारी-आपकी एक छोटी सी उत्साहवर्धक पोस्ट उसके लिए सफलता का लक्ष्य बन जाए… Be Positive…

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