देश में अविश्वास के मारों, अपने चेहरे काले करो

कांग्रेस अब राजनैतिक वेश्यावृत्ति पर उतारू है.

मक्का मस्ज़िद, माया कोडनानी, जस्टिस लोया केस जैसे दो-चार फैसलों के ख़िलाफ़ होने भर से सर्वस्वीकार्य, सर्वमान्य बाबा साहेब भीमराव रामजी आंबेडकर के संवैधानिक न्याय व्यवस्था के सर्वोच्च मंदिर पर महाभियोग की यह कालिख, एक ख़िलाफ़ फैसले पर स्व. इंदिरा की इमरजेंसी से बड़ी कालिख है.

देश की चुनाव आयोग से लेकर संसद और अब न्यायपालिका जैसीं संवैधानिक व्यवस्थाओं को फर्जी अविश्वास के दायरे में खड़ा करने की ये कोशिशें देश में विपक्ष द्वारा थोपे जाने वाले आपातकाल के तौर पर याद रखी जायेंगी…

जिसकी अगुआई करती काँग्रेस… खुद के खिलाफ महज़ एक सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के प्रतिशोध में देश में आपातकाल की कालिख लगाने की कुंडली रखती है.

इस कालिख़ पर दस्तख़त करने वाले देश के राजनीतिक अस्तित्व के मारों के नाम नोट कर इनकी राजनैतिक-सामाजिक-वैचारिक नसबंदी करना देश के मतदाता का पहला धर्म होना चाहिए… होगा.

राहुल गांधी, सोनिया गांधी की कांग्रेस, मुलायम, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी, मायावती की बहुजन समाज पार्टी (सपा, बसपा यूपी).

सीपीआई, सीपीएम (भारत की कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी), शरद पवार की एनसीपी (नेशनलिस्ट काँग्रेस पार्टी) और मुहम्मद अली जिन्ना की अवैध भारतीय औलाद इंडियन मुस्लिम लीग.

ये वो देश के अपराधी हैं जो भारतीय न्यायव्यस्था के मुंह पर, संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव रामजी आंबेडकर के मुंह पर कालिख पोतने के अपराध में बरामद होते हैं.

देश के मतदाताओं के अविश्वास के मारे राजनीतिक टूअरों….! देश के संविधान और संवैधानिक व्यवस्थाओं पर कालिख पोतने से बाज़ आओ, वरना यह देश तुम्हारे अस्तित्व के लिए तरसते वर्तमान को आने वाले भविष्य तक… काला कर देगा.

देश में अविश्वास के मारों… अपने चेहरे काले करो.

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