अब संशोधनों से काम नहीं चलेगा, बदलना ही होगी भारत की राजनैतिक-आर्थिक संरचना

लंदन में आयोजित कार्यक्रम भारत की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्गारों का सोशल मीडिया में काफी चर्चा हुई है. लेकिन प्रधानमंत्री जी ने स्वीडन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए एक बात कही जो काफी महत्वपूर्ण है.

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि गरीबी हटाने की जो पहले सिर्फ बातें और नारे होते थे. उन्होंने उस कल्चर या संस्कृति को पीछे छोड़ दिया हैं.

देश के गरीब का जीवन ऊपर उठाने के लिए सशक्तिकरण को टूल या औज़ार बनाया गया है. सशक्तिकरण चाहे समाज के कमजोर वर्गो का हो या फिर महिलाओं का, ‘सबका साथ-सबका विकास’ का मूल मंत्र सच्चाई में बदल रहा है.

फिर उन्होंने कहा कि यह सब महज़ रिफॉर्म नहीं है. यह ट्रांसफॉर्मेशन (समग्र परिवर्तन) है. और हमारा संकल्प है कि हम भारत को ट्रांसफॉर्म करके रहेंगे.

अब मैं प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा किये जा रहे क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन या रचनात्मक विनाश के बारे में काफी समय से लिख रहा हूँ.

उनके सत्ता में आने के बाद से ही उनकी नीतियों के देख कर यह समझ गया था कि वे लीपा-पोती करने के लिए सत्ता में नहीं आये हैं.

चूंकि प्रधानमंत्री के रूप में वे रचनात्मक विनाश शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते थे क्योकि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह अभिजात्य वर्ग से ही क्यों ना हो, अपना विनाश नहीं पसंद करेगा. तभी प्रधानमंत्री जी ने ट्रांसफॉर्मेशन (समग्र परिवर्तन) शब्द का प्रयोग किया.

जैसा कि मैंने पहले भी लिखा है कि स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के शासकों ने एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण किया जिसमें जनता की भलाई और सेकुलरिज्म के नाम पर अपने आप को, अपने नाते रिश्तेदारों और मित्रों को समृद्ध बना सकें. अपनी समृद्धि को इन्होंने विकास और सम्पन्नता फैलाकर नहीं किया, बल्कि जनता के पैसे को धोखे से और भ्रष्टाचार से अपनी ओर लूट कर किया.

स्वपन दासगुप्ता ने हाल ही के एक लेख में इस बात पर ध्यान दिलाया कि राजीव गाँधी, सोनिया गाँधी, राहुल और प्रियंका भारत में कभी भी निजी आवास में नहीं रहे. वे हमेशा सरकारी कोठियो में रहे है. यह है अभिजात्य वर्ग के द्वारा व्यवस्था का शोषण और गरीबों के पैसे पर ऐश.

आपने पिछले दिनों यह समाचार भी पढ़ा होगा कि सरकार ने 9 लाख करोड़ के बैंक एनपीए (ना चुकने वाले ‘खराब’ लोन) में से 4 लाख करोड़ की वसूली कर ली है. यह सारे लोन यूपीए की भ्रष्ट सरकार ने ‘मित्रों’ को दिलवाए थे और इसकी ‘खराब’ हालत को छुपा के रखा था.

इसी प्रकार दिसंबर ICICI बैंक की प्रमुख चंदा कोचर ने 2008 में वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत को 3,250 करोड़ रुपए का लोन दिया जिसके बदले में चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को वीडियोकॉन समूह ने तथाकथित रूप से कई सौ करोड़ का अनुचित लाभ पहुचाया. 2017 में वीडियोकॉन समूह के लोन को बैंक ने एनपीए (‘खराब’ लोन) घोषित कर दिया.

नेशनल हेराल्ड समाचारपत्र के नाम पर कैसे अरबों की भूमि कुछ करोड़ो में हथिया ली गयी, कैसे दिल्ली में दलालों की मिली-भगत से एक-एक कॉन्ट्रैक्ट हथिया लिया जाता था, कैसे आप के घर में बिजली, पानी, गैस ना आये, जबकि अभिजात्य वर्ग स्विमिंग पूल में नहाये, सेंट्रल AC में रहे.

जब आपके घर में बिजली नहीं आती, आपका कंप्यूटर एकाएक बंद हो जाए, और आपके बच्चे या आप उस पर काम ना कर पाए, उसका लाभ-हानि का हिसाब कौन निकालकर रखेगा? कैसे आप विदेशों में रहने वाले बच्चों या वहां के व्यवसाय से मुकाबला करेंगे जब उनके यहां चौबीसों घंटे बिजली बिना फ्लक्चुएशन के आती है.

इसी प्रकार की बाधाएं उद्यम लगाने में, सफर करने में, कोई इनोवेशन करने में, इलाज करवाने में, हर जगह पर रोड़े लगा दिए गए जिससे आप किसी न किसी समस्या में उलझे रहें. आपका सीमित बजट शिक्षा, स्वास्थ्य, घूस और समय बर्बादी में लगता रहे. आप 500 किलोमीटर की यात्रा ट्रेन या कार या बस से 12-14 घंटे में करेंगे, जबकि वही अभिजात वर्ग हवाई यात्रा करके 1 घंटे में पहुंच जाएंगे.

क्या उन 11 घंटों की कोई कीमत नहीं है? क्या उन 11 घंटों को आप किसी सार्थक कार्य के लिए प्रयोग नहीं कर सकते थे? कहीं आप उन 11 घंटों का प्रयोग व्यवस्था को चुनौती देने में तो नहीं लगा देंगे? इसी प्रकार से आपके घंटे और पैसे किसी न किसी समस्या और क्यू (कतार) में उलझा दिया गया.

ग्रामीणों, मध्यम वर्ग और छोटे दुकानदारों को समृद्ध बनाने के लिए तेज विकास और इनोवेशन की आवश्यकता है, जिससे उत्पादकता बढ़े, जिसके लिए 24 घंटे बिजली चाहिए, ट्रांसपोर्ट चाहिए, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं चाहिए, नियमों में पारदर्शिता चाहिए. भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहिए.

इसके लिए भारत की राजनैतिक और आर्थिक संरचना को ही बदलना होगा. छोटे मोटे संशोधनों से काम नहीं चलने जा रहा.

प्रधानमंत्री मोदी यही कर रहे हैं. वह भारत की औपनिवेशिक संरचना को बदल रहे हैं. उस औपनिवेशिक संरचना को, जिसे अंग्रेजों ने उस समय के अभिजात्य वर्ग को सौंप दिया; जिसे अभिजात्य वर्ग ने अपना लिया और उसी से अपने परिवार और खानदान को राजनैतिक और आर्थिक सत्ता के शीर्ष पर बनाए रखा. इस कार्य में भ्रष्ट बुद्धिजीवी और मीडिया सहयोग देते हैं.

उस भ्रष्ट संरचना के क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन या रचनात्मक विनाश के बगैर भारत की प्रगति संभव नहीं है. पिछले 70 वर्षो में प्रगति केवल अभिजात्य वर्ग की हुई है.

भारत की मिट्टी में पले-बढ़े, शिक्षित, और उसी धरती पर संघर्ष करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न को समझिए और उसे समर्थन दीजिए. क्योंकि हमें भारत को ट्रांसफॉर्म करना है, अभिजात्य वर्ग का रचनात्मक विनाश करना है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY