मीडिया नामक फैक्ट्री में बनता है वह प्रोडक्ट, जिसका ब्रांड नेम है विषैला वामपंथ

शतरंज में जब एक चाल चली जाती है तो उसका मकसद कई चालों के बाद समझ में आता है.

पिछले कई हफ्तों से इंग्लैंड में एक खबर छाई रही.

यहाँ सेलिस्बरी में एक रूसी व्यक्ति और उसकी बेटी पर एक केमिकल नर्व एजेंट से हमला किया गया.

वह रूस में एक ब्रिटिश एजेंट था जिसे रूस में गिरफ्तारी के बाद ब्रिटेन में किसी तरह शरण मिली हुई थी. बाप-बेटी लंबे समय तक आईसीयू में रहे.

ब्रिटेन का दावा है कि यह हमला रूस ने किया है और प्रतिक्रियास्वरूप यहाँ के रूसी राजदूत को निष्कासित कर दिया गया.

कुल 28 देशों से रूसी राजदूत को निष्कासित किया गया, रूस की खूब लानत-मलामत हुई. यहाँ के टीवी-रेडियो पर यह बहस छायी रही.

लंबे समय तक यह बहस सुन कर मेरी समझ में यह नहीं आया कि यह हमला रूस ने किया था या नहीं?

रूस के पास उस व्यक्ति को मारने की वजह थी. पर उसके लिए नर्व एजेंट इस्तेमाल करने जैसा कॉम्प्लिकेटेड काम करने की क्या जरूरत थी?

क्या रूस के पास एक भी ऐसा एजेंट नहीं है जो इस काम को शांति से, चुपचाप चाकू या एक साइलेंसर वाली गन से कर सके?

पर अगर रूस ने नहीं किया तो कोई दूसरा क्यों करेगा? या ब्रिटेन खुद अपने देश में ऐसा कोई काम क्यों करेगा?

तो लीजिये, चार हफ्ते के ड्रामे के बाद अगली खबर आई… सीरिया में भी सिविलियन्स पर एक केमिकल हमला किया गया है…

उसमें मरने वाले बच्चों की खौफनाक तस्वीरें मीडिया में घूम रही हैं, और यहाँ के चैनल चीख-चिल्ला रहे हैं कि छोटे छोटे बच्चे रासायनिक हथियारों से मारे जा रहे हैं, हम क्या कर रहे हैं?

सीरिया में रूस के सहयोगी असद ने ही यह हमला किया होगा, इसलिए असद पर हमला किया जाए… तीन-चार दिन इस पर माहौल बना, फिर इंग्लैंड और अमेरिका ने असद के हथियारों के ठिकानों पर अपने बेकार पड़े, जंग खा रहे एक्सपायरी डेट के पास पहुंच रहे मिसाइल ठोक दिए.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने भी संसद में बयान दिया कि रासायनिक हथियारों का प्रयोग दुनिया में कहीं भी हो, हम बर्दाश्त नहीं कर सकते… चाहे सीरिया में हो, या इंग्लैंड की सड़कों पर… इसलिए हमने राष्ट्र-हित में यह निर्णय लिया…

राजनीति में कुछ भी इतना रिएक्टिव नहीं होता. आप अपना नैरेटिव अपने हाथ में रखते हैं… कम से कम पश्चिम में यह राजनीतिक समझ है…

तो मेरी दृष्टि में यह कहानी कुछ ऐसी है – इंग्लैंड और अमेरिका को सीरिया पर मिसाइल दागने थे, असद को रोकना था. पर उसे अपने देश में जनता के सामने जस्टिफाई भी करना था.

तो बच्चों पर केमिकल हथियारों से हमले की कहानी बेची गई. बच्चे बहुत अच्छा विज्ञापन होते हैं, जॉनसन बेबी सोप और सेरेलैक से लेकर वाशिंग पाउडर, टूथपेस्ट और यूरेका फोर्ब्स का वैक्यूम क्लीनर तक सबकुछ बच्चों के नाम से बिक जाता है.

तो दुनिया को एक और लड़ाई बेचनी हो तो उसके लिए भी बच्चे ही सही विज्ञापन हैं. पर उसके पहले अपने लोकल मार्किट में इस केमिकल हमले की कहानी का बाजार बनाना है.

तो उसके लिए यह लोकल नर्व-एजेंट की कहानी घुमाई गई. फिर जब इंग्लैंड ने सीरिया पर मिसाइलें दागीं तो यहाँ किसी ने चूँ नहीं की. जनमत साथ था… आखिर यह सब एक नेक काम के लिए किया गया… छोटे छोटे बच्चों का मामला है… और एक नेक काम के लिए तो एक सच्चा अंग्रेज़ हमेशा तैयार ही रहता है…

जब कोई एक काम करना होता है तो पहले हफ्तों एक नैरेटिव तैयार किया जाता है. उसकी कड़ियाँ जोड़ी जाती हैं. इंग्लैंड में रूस द्वारा केमिकल हमला, फिर रूस के सहयोगी असद द्वारा सीरिया में केमिकल हमला… इसलिए इंग्लैंड ने बड़ी ही मजबूरी में सीरिया पर राकेट दागे…

उन्हीं लोगों की तैयारी भारत में दिखाई दे रही है. हफ्तों नहीं, महीनों की तैयारी है… पहले एक मुस्लिम बच्चे की हत्या की… फिर एक दलित के बलात्कार की कहानी निकाली…

फिर दोनों को बीजेपी से किसी तरह जोड़ा… दलित-मुस्लिम गठजोड़ खड़ा करने और दलितों को बीजेपी के खिलाफ भड़काने के लिए…

पर बस इतना ही नहीं. अगर कोई बात बीजेपी से जोड़ी जा सकती है तो वह अपने आप मोदी और हिन्दू धर्म से जुड़ जाती है.

यह आज लंदन में हुए मोदी के खिलाफ प्रोटेस्ट की तैयारी थी, जिसकी तैयारी के लिए आसिफा की हत्या की गई थी. यहाँ इस प्रोटेस्ट की जानकारी थी, पता था कि मोदी के आने पर यह होगा.

तब तक आसिफा की यह कहानी भी मीडिया में नहीं उछाली गई थी. पर पूरी टाइमिंग के साथ भारत में यह स्टोरी चलाई गई जिससे आज लंदन में मोदी विरोध के पूर्व-प्रायोजित कार्यक्रम को एक मनपसंद नैरेटिव मिल गया…

बहुत मेहनत का काम है एक झूठ को खबर में, और फिर एक खबर को इतिहास में बदलने का काम.

समझिये, एक बड़ी सी फैक्ट्री में होता है यह काम. पूरी एक असेंबली लाइन होती है, जहाँ एक झूठ से दूसरे झूठ की कड़ियाँ जोड़ी जाती हैं, फिर उन पर मानव करुणा की परत चढ़ाई जाती है…

उस फैक्ट्री का नाम है मीडिया. और प्रोडक्ट का ब्रांड नेम तो जानते ही हैं आप… वह है आपका जाना पहचाना विषैला वामपंथ.

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