कल को आपका ‘डॉ नारंग’ हो जाए तो आश्चर्य कैसा!

धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः

धर्म उनकी रक्षा करता है जो धर्म की रक्षा करते हैं.

कठुआ काण्ड के बहाने से हिन्दुओं पर हमला करने वालों के खिलाफ आपने तो कोई पोस्ट तक शेयर नहीं की.

कल को आपका डॉ. नारंग हो जाए तो आश्चर्य क्यों करना चाहिए? कल को फिर कोई मारा जाएगा तो दोगले पक्षकार फिर से कोई फर्जी ट्वीट लाकर आपको ही झूठा कहेंगे.

जिस समय ये जघन्य काण्ड हुआ, उस समय ‘प्रगतिशील’ समाचार इसे किसी गाय रखने की जगह किया गया अपराध बता रहे थे.

चंद टुकड़ों की चाह में इन कुत्तों ने इसे देवी-स्थान में हुई घटना बता दिया. स्थानीय लोकदेवता कालीवीर जी के नाम में से आधा लेकर इन्होंने देवता को देवी भी बना डाला.

दिल्ली में किसी एक का ज़मानत भरने से इनकार करना खबर होती है, वहां के 150 ग्रामीणों का ज़मानत भरने से इनकार करना खबर क्यों होती?

ये लड़ाई अधिकार बनाम कर्तव्य की भी है. पटना शहर ने बेवजह ही भीड़ को इकठ्ठा होकर कल ही ‘दीन बचाओ’ का नारा लगाते देखा है, सवाल ये भी है कि आप और हम कितनी बार ऐसे हमलों के खिलाफ एकजुट होकर सामने आये हैं?

जो झूठे नैरेटिव गढ़कर ‘आतंक का मज़हब नहीं होता’ कहते कहते, बलात्कारी का धर्म ढूँढने लगते हैं, क्यों नहीं उनका और उनकी फिल्मों का सम्पूर्ण बहिष्कार किया जाना चाहिए? जब तक सार्वजनिक माफ़ी ना मांगे इन्हें खदेड़ते रहना जारी क्यों नहीं रखा जाए?

नैतिकता का सारा बोझ कुलियों की तरह सनातनी समुदाय पर ही क्यों हो? जिन मीडिया से जुड़े लोगों ने एथिक्स में साफ़ साफ़ पढ़ रखा है कि समाचार को सिर्फ सत्य नहीं, सम्पूर्ण भी होना चाहिए, उन्हें भी सरे बाजार नंगा किया जाए.

जो मक्कारी का नकाब वो चेहरे पर बांधे होते हैं, वो पिछले कुछ सालों में एक-दो बार नहीं, बार बार उतरता रहा है. इन लाश खसोट गिद्धों का चेहरा तो अब सब पहचानते हैं! बहिष्कार सम्पूर्ण गांधीवादी तरीका है, पिकेटिंग या बॉयकॉट से तो आप रोक नहीं सकते.

स्वरा भास्कर, कल्कि, सोनम कपूर, हुमा कुरैशी या करीना जैसी सिने तारिकाओं के बॉयकॉट से मेरा मतलब उनकी फिल्मों को टीवी-थिएटर में देखने से इनकार है.

दूसरा जो पिकेटिंग है, उसका मतलब इनकी फिल्म देखने जा रहे लोगों को मना करना और वो ना मानें तो उनके किसी भी काम में, किसी भी किस्म की मदद से स्पष्ट इनकार है.

अंग्रेजी कहावत बताती है कि भेड़ियों के साथ खेलना, और खरगोशों से भी दोस्ती एक साथ तो नहीं होती.

हम पर हमला करने वालों के साथ, या हमारे साथ, दोनों एक साथ तो नहीं चलेगा!

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