अगर कुछ लोग मुझे भक्त कहते हैं, तो मुझे सहर्ष स्वीकार है यह सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण मैं समय मिलने पर सुनने या पढ़ने का प्रयास करता हूँ.

एक-एक वाक्य में वे भारत के बारे में अपने विज़न और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान से ना केवल अवगत कराते है, बल्कि बतलाते है कि कैसे उस विज़न और समाधान को लागू किया जा सकता है.

जैसे कि एक सहृदयी और सहानुभूतिशील व्यक्ति, मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक हमसे संवाद कर रहा हो.

उदहारण के लिए, 9 अप्रैल को पब्लिक सेक्टर के बारे में उन्होंने कहा कि बिज़नेस और ज़िंदगी में हमें किसी व्यक्ति से उसकी क्षमता के मुताबिक काम करवाने के लिए उसे निरंतर प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि ठहराव और निष्क्रियता की स्थिति से बचा जा सके. लेकिन जब हम प्रोत्साहन की बात करते हैं तो ये सिर्फ वित्तीय हो ये ज़रूरी नहीं है.

कई बार बेहतर परफॉर्म करने वाले की फोटो बुलेटिन बोर्ड में लगाने भर से या फिर चेयरमैन की तरफ से पीठ पर जरा थपकी लगा दें, वह सैकड़ों कर्मचारियों को प्रेरित कर सकती है.

रचनात्मकता के बारे में प्रधानमंत्री बतलाते हैं कि अहमदाबाद में किसी समय मिल की बड़ी-बड़ी चिमनियां शान हुआ करती थी. लेकिन टेक्नोलॉजी को ना लाने के कारण वो सारी दुनिया बिखर गई.

आज एक भी चिमनी से धुंआ नहीं निकलता. क्‍यों? इमेजिनेशन का अभाव था. बनी-बनाई चीज़ों पर गुज़ारा करने की आदत हो गई थी.

और जो समयानुकूल बदलाव नहीं लाते, परिवर्तन नहीं लाते, दूर का देख नहीं पाते, सोच नहीं पाते, निर्णय नहीं कर पाते वो वहीं के वहीं ठहर जाते हैं. और धीरे-धीरे उनका नष्‍ट होना निर्धारित हो जाता है.

वे आगे कहते है कि बीते कुछ समय में दुनिया में ऐसे कई उद्हारण सामने आए हैं जहां रिस्क ना लेने की सोच की वजह से सरकारी उपक्रमों को नुकसान झेलना पड़ा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने PSUs से अपनी जनरल बॉडी मीटिंग, लकीर से हटकर नए पर्यटक स्थलों पर करने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा कि अगर मान लीजिए देश में एक साल में ऐसे 25 स्थल तय किए, और आपकी तीन सौ कंपनियां हैं. अगर आप वहां अपनी जनरल बॉडी मीटिंग शुरू करेंगे तो हर स्‍थान पर, मैं समझता हूं हर महीने एक-दो, एक-दो मीटिंग होंगी ही होंगी.

मुझे बताइए वहां की इकॉनमी आगे बढ़ेगी कि नहीं बढ़ेगी? वहां इंफ्रास्ट्रक्चर आएगा कि नहीं आएगा? यानी आप तो अपनी मीटिंग करते ही हैं, मुंबई में करते होंगे, बंगलौर में करते होंगे, चैन्‍नई में करते होंगे, 5 स्‍टार होटल में करते होंगे, लेकिन क्‍या कभी ऐसी जगहों में रह के कर सकते हैं? आपका वो रूटीन काम है लेकिन देश के टूरिज्म को बल मिलेगा.

उन्होंने कहा कि एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2020 तक Global Internet of Things (सारी मशीनों, वाहनों, घरेलू उपकरणों को इंटरनेट से कनेक्ट करना जिसमे इसके मध्य डेटा एक्सचेंज होगा) मार्केट में भारत की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत तक होगी.

ये लगभग 20 लाख करोड़ रुपए का बाज़ार है. अनुमान ये भी है कि इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग में Internet of Things की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत की होगी.

उन्होंने पूछा कि क्या भारतीय PSUs इसे ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति बना रहे हैं? क्या आप Data Analysis कर रहे हैं?

फिर सुझाव दिया कि PSUs को digitization, analytics, e-mobility और block-chain जैसी नई टेक्नॉलॉजी की मदद लेनी चाहिए ताकि ये तकनीक नए बिज़नेस में उनके लिए नए अवसर पैदा करें.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान की चुनौतियों के मुताबिक बदलाव की भी ज़रूरत अनिवार्य होती है और कहा कि आर्थिक निर्णयों में आदर्शवाद और आइडियोलॉजी काफी नहीं है.

इसकी जगह व्यवहारिकता और समझ से निर्णय लेना चाहिए, सेक्‍टर चाहे कोई भी हो. लेकिन जब 21वीं सदी की अर्थव्‍यवस्‍था की बात करते हैं तब उद्यम और इनोवेशन हम सभी को गाइड करे, हमारा ड्राइविंग फ़ोर्स हो.

और भी बहुत सी बातें कही. अगर समय मिले तो प्रधानमंत्री जी के वेबपेज पर उनका भाषण पढ़ सकते है. इससे ना केवल आपकी समझ बढ़ेगी, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओ में निबंध लिखने में मदद भी मिलेगी.

[प्रधानमंत्री का पूरा भाषण इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ें3 Is – Incentives, Imagination and Institution Building are the success mantras for both public & private sector: PM]

क्या ऐसा विज़न अभी तक भारत में किसी भी नेता या पत्रकार से सुनने को मिला?

अगर कुछ लोग मुझे भक्त कहते हैं, तो मुझे यह सम्मान सहर्ष स्वीकार है.

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