फिलहाल भारत में नहीं मोदी जैसा कद्दावर नेता

समझ ये कहती है (मेरी समझ नहीं लिखना चाहता), कि मामले को आंख बंद करके समझना चाहिए, जैसे कोई गणित का इक्वेशन सॉल्व करना हो, या कोई कविता कहानी लिखनी हो या अभिनय ही करना पड़े, तो बहुत अलग से मामले दिखाई पड़ते हैं.

कई बार लिखा भी है और उसी को अलग तौर पर लिखने की चेष्टा भी करता रहता हूँ.

1. मामला या प्रॉबल्म ये है कि जनता की सरकार सुन नहीं रही. या एक अजीब सी बात देखने को मिल रही है. ओके नो प्रॉबल्म, आंख बंद करके बैठ जाईये, क्या विचार आते हैं वो बहने दीजिये, क्या उपलब्ध है उनकी तरफ ध्यान लगाइये. क्या आता है?

मोदी जैसा कद्दावर नेता फिलहाल भारत में नहीं है. पुराने नेता नए को आने नहीं देंगे. मोदी के मोदी बनने की यात्रा उनकी खुद की है. ये क्लियर है.

ये भी क्लियर है कि किसी को वैसा नेता बनना होता तो उसकी यात्रा दिखाई देने लगती, जहां पैदा हुआ, वहां से लेकर शहर, फिर जिला, फिर राज्य, फिर देश. मेरी नजर कमजोर हो सकती है, आपको दिखे तो बताइयेगा. मुझे तो नहीं दिखता. तो मोदी विशेषता वो विशेषता है. उनकी यात्रा सबने देखी है. ये भी क्लियर है.

मोदी निकले कहाँ से? संघ से. संघ क्या है? दशकों से बना समर्पित कार्यकर्ताओं का जुड़ा संगठन है. जो काफी काम करता है. क्या आप संघ से परिचित भी हैं? वो कैसे सोचता है या क्या करता है या कौन कौन से मुद्दों पर उसकी विचारधारा क्या है? मुझे भी पता नहीं था, पूछा भी, फिर खुद ही ऑफिशियल वेबसाइट और fb पेज का सहारा लिया, तब जाकर समझ में कुछ कुछ आया.

अब आते हैं समस्या पर, सरकार कुछ नहीं कर रही, या अजीब कर रही है. उत्तर में दो बातें ऊपर सम्मिलित हैं, मोदी संघ से हैं, संघ क्या है वो जानना अनिवार्य है. फेसबुक पर अमूमन संघी आपको मिलेंगे नहीं, जो हैं, वो बहुत अलग हैं. वैसे लड़ने झगड़ने वाले तो बिल्कुल नहीं मिलेंगे. कार्यकर्ता अवश्य हो सकते हैं, पर मैं जिम्मेदार पद वाले की बात कर रहा हूँ.

यहां पेंच है. आपकी फेसबुकिया तौर पर क्या अपेक्षा है, वो अगर संघ के रास्ते में नहीं है तो आपको प्रॉबल्म हो सकती है. आपका अपना व्यक्तिगत जीवन या नजरिया हो सकता है पर आप कोई सौ बरस पुराने से संगठन नहीं हैं स्वयं में जिसने जीवन ही होम कर दिया हो!! आपकी थ्योरी या विजन बहुत बहुत सीमित हो सकता है. इतराने या शिकायत करने की जरा भी आवश्यकता नहीं है.

आपको क्या लगता है? संघ के पास विभिन्न मुद्दों पर कोई विचार नहीं है या विजन नहीं है? अगर ये आपको पता नहीं है तो गलती आप ही की है. समाधान एकमात्र यही है, संघ के विषय में जानिए तब स्पष्ट हो पाएंगे.

मोदी संघ की विचारधारा और विजन से जुड़े समर्पित मानव हैं. तब मोदी जी के कदमो की ताल का संगीत भी समझ में आने लगेगा.

2. राजनीतिक रूप से सबके शत्रु और मित्र होते हैं. आप जिन्हें शत्रु मान रहे हैं , हो सकता है वो शत्रु ही न हों !! अगर संघ आपको समझ नहीं आया है तो. मसलन, गांधी और गोडसे, दोनों को बराबर सम्मान देने की बात नजर आयी रही. दोनों हिन्दू, ऐसा बोलके. तो उसी नजरिये से मोदी और रवीश को भी बराबर सम्मान दे ही सकते हैं. है न? दोनों हिन्दू हैं.

शब्द फिल्टर हिन्दू हो रहा है, संघ का हिन्दू या हिंदुत्व शब्द का क्या परिभाषा है, वो गौर से देखना होगा. वरना समस्या आपको हो सकती है. आपके पास फेसबुक है, संगठन नहीं है. संघ दशकों की तपस्या और कर्म का फल है, आपकी फेसबुक ही जुम्मा जुम्मा चार छह साल पुरानी होगी. क्या करेंगे आप ?

मेरी समझ से संघ का भारत में कोई शत्रु स्वयं में नहीं है. सब हिन्दू ही हैं. बस प्रेयर करने का तरीका अलग अलग है. सवा अरब भारतवासी शब्द इसी की ध्वनि है. सुना होगा आपने.

3. आप मोदी को सपोर्ट करते हैं. मैं भी करता हूँ, और करता रहूंगा, क्योंकि कोई और ऑप्शन ही नहीं है. जो संघ से जुड़ा है वो मोदी जी को अच्छे से समझ पायेगा. जिसको परेशानी है, या अजीब लगता है, तो उनको संघ की कोई जानकारी नहीं है. संघी ऐसे फेसबुक पर टाइम बर्बाद भी नहीं करते. ऐसे में कहा जा सकता है कि आप मोदी जी को न जानते हुए भी उनके सिम्पेथाइजर हैं जिन्हें लगता है कि मोदी सशक्त नेता हैं भारत के और वो सही हैं.

पर कोई और अपेक्षा अजीबोगरीब आप कर रहे हैं तो वो आपका ही प्रॉबल्म है. समाधान इतना सा है कि आप संघ को जानें. और कोई उपाय नहीं है. संघ आपकी पर्सनल प्रॉबल्म ऑफ विचारधारा पर गौर करने नहीं बैठा है, नजर पड़ी, उपयोगी लगा, तो अपना लेगा. वरना आपका नज़रिया खास काम का नहीं है.

4. संघ सबकुछ उपयोग करता है. भागवत जी के भाषण के अनुसार, जो मैंने देखा, जो व्यक्ति जिस लायक होता है, और संघ के पास आता है, उसको उसी प्रकार से तैयार किया जाता है ताकि मानव बनकर देश धर्म और समाज के काम आ सके. मेरे खुद के हाथ पाँव फूल जाते हैं. क्योंकि हम तो हैं मस्ती करने वाले, संघ वाले हैं तपस्वी जैसे उत्तरदायित्व लेने वाले साफ स्पष्ट लोग. हम जैसे संघ को क्या दे पाएंगे?

5. मेरे ख्याल से काफी कुछ स्पष्ट हो गया होगा, सो अध्ययन में देरी कैसी? परिचय करिए, प्रसन्न रहिये. जितना सुनकर, देखकर, पढ़कर समझ पाया उतना प्रस्तुत कर दिया. विचारधारा के साथ घटनाएं उसका प्रमाण होती हैं, सो यही है मेरे मतानुसार.

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