क्यों होना चाहिए CBI जांच, कठुआ रेप व मर्डर केस : 1

कठुआ रेप व मर्डर केस में हिन्दू संगठन CBI जांच की मांग कर रहे हैं.

क्यों???

इसे जानने के लिए कश्मीर के अलगाववादी आंदोलन का इतिहास खंगालना पड़ेगा और ये समझना पड़ेगा कि पाकिस्तान परस्त कश्मीरी अलगाववादी कैसे लाशों पर चढ़ के अजेंडा चलाते हैं.

29 May 2009 को शोपियां – कश्मीर से दो युवतियाँ, 22 वर्षीय निलोफर जान और उसकी ननद 17 वर्षीय आसिया जान अपने सेब के बाग से वापस आते हुए लापता हो गईं.

30 May, पुलिस ने उनकी लाश स्थानीय Rambiar नाले से बरामद की. जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पाया गया कि मृत्यु नाले में अचानक आये flash flood में डूबने से हुई… No fowl play… no marks of injury on body or private parts.

अलगाववादियों की पॉलिटिक्स शुरू. आरोप लगा कि Indian Army ने Gang rape और Murder किया. कश्मीर घाटी में बंद, हड़ताल, curfew शुरू. अगले 47 दिन तक लगातार Curfew रहा.

ओमर अब्दुल्लाह सरकार ने पुलिस जांच को नकारते हुए Judicial Enquiry बैठा दी. जस्टिस मुज़फ्फर जान के नेतृत्व में एक सदस्यीय कमीशन गठित. 30 दिन में रिपोर्ट देने को कहा.

जस्टिस मुज़फ्फर जान ने 30 दिन में सब लीप पोत बराबर कर दिया. दोनो महिलाओं का Gang Rape – Murder हुआ था… शोपियां Civil Hospital के Doctors और शोपियाँ पुलिस ने जानबूझ के झूठ बोला… बाकायदे फोरेंसिक सबूत आ गए… सारा Evidence आ गया…

कुल 13 Doctor और पुलिस वाले Criminal Conspiracy और Negligence में Suspend हुए या जेल चले गए… यहां तक कि SP शोपियाँ जावेद मट्टू और DSP Rohit Barkotra तक suspend हो गए.

इस बीच पूरे काश्मीर में नंगा नाच हुआ… लगातार 47 दिन Curfew रहा… पूरा काश्मीर Indian Army के खिलाफ आंदोलनरत रहा…

इसके अलावा शोपियाँ Bar Association और J&K High Court की Bar ने अपनी अलग अलग Fact Finding teams बनायीं जिसमें Indian Army द्वारा Gang Rape और Murder की पुष्टि कर दी.

अंततः CBI Enquiry हुई… AIIMS Delhi से Doctors की team कश्मीर गयी. दोनो महिलाओं की लाशें उनकी कब्रों से दुबारा निकाली गयीं. दुबारा Postmortem हुआ… in camera हुआ…

उस medical board में स्थानीय Doctors (मुसलमान) भी थे और AIIMS वाले भी थे… Victims के DNA Samples और Vaginal Swabs लिए गए और देश की 3 अलग अलग CFSL labs में भेजे गए.

फोरेंसिक जांच में पाया गया कि मौत वाकई डूबने से हुई थी. किसी किस्म के Ante Mortem Injury यानी जीवित अवस्था में लगी चोट का कोई लक्षण शरीर पर नहीं था…

इसके अलावा जो सबसे ज़्यादा खतरनाक बात CBI enquiry में सामने आई वो ये कि Justice मुज़फ्फर जान ने जो फोरेंसिक जांच कराई उसमें भेजे गए samples Victims के थे ही नहीं… पूरा case और पूरा Narrative फ़र्ज़ी और Manufactured था.

CBI ने शोपियाँ Police और Doctors को clean chit दे दी. उनकी प्रारंभिक जांच सही थी… सच थी.

CBI ने 13 लोगों के खिलाफ झूठा evidence create करने, सबूतों से छेड़छाड़, और Criminal Conspiracy के जुर्म में चार्जशीट दाखिल की…

अंततः CBI जांच में ये स्पष्ट हुआ कि शोपियाँ में Indian Army ने कोई Gang Rape – Murder नहीं किया था और दो अभागी महिलाओं की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु पर उन दो लाशों को मोहरा बना के अलगाववादी भारत विरोधी राजनीति करते रहे.

कठुआ में हुए तथाकथित Rape – Murder में सच क्या है, कोई नहीं जानता… पर यदि इतिहास से सबक लिया जाए तो…

* CBI enquiry होनी चाहिए.

* Victim की body का AIIMS के Doctors द्वारा पुनः पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच की जानी चाहिए जिस से सच सामने आ सके.

Truth must Prevail. JUSTICE SHOULD BE DONE TO the Victim.

यदि वाकई Gang Rape हुआ है तो दोषियों को पकड़ के मृत्यु दंड दिया जाए… लाशों पर राजनीति बंद हो.

Note : शोपियाँ के इस केस के सारे तथ्य public Domain में हैं। जज मुज़फ्फर जान की न्यायिक जांच की रिपोर्ट और CBI की रिपोर्ट सब public domain में है. मैंने पहले पूरे तथ्य जुटाए, दस्तावेज पढ़े तब ये सब लिखा है.

क्रमशः… अगली लेख में पढ़िए कि बक्करवाल गूजर और रोहंगिया connection क्या है कठुआ कांड में.

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