भारत में भी प्रोत्साहित की जानी चाहिए इंटर्नशिप

पश्चिमी यूरोप और अमेरिका में हर वर्ष 11-12वीं से लेकर स्नातकोत्तर कर रहे छात्र विभिन्न सरकारी, गैर-सरकारी, अंतर्राष्ट्रीय, निजी क्षेत्र में इंटर्नशिप करते है; यानि कि ये छात्र किसी ऑफिस में वेतन, कुछ पारिश्रमिक, या फिर बिना वेतन या पारिश्रमिक के, कार्य करते है.

ऐसा करने के पीछे उनका उद्देश्य अनुभव या ट्रेनिंग प्राप्त करना होता है, जबकि एम्प्लायर को फ्री में, या सस्ते में कुछ महीनों के लिए अतिरिक्त मदद मिल जाती है.

इससे भी बढ़कर, एम्प्लायर को इन किशोर और युवा छात्र-छात्राओं के नए विचारों, रचनात्मकता, उत्साह और ऊर्जा का लाभ मिलता है.

कुछ इंटर्न कई बार भोलेपन या फिर अपने तीक्ष्ण, फ्रेश दिमाग से ऐसे प्रश्न पूछ लेते है या ऐसे सुझाव दे देते है, जो हम जैसे ‘परिपक्व’ एम्प्लायर और सुपरवाइजर को दिखाई नहीं देता क्योंकि हम अपनी ही धुन में फूले रहते है. परिणामस्वरूप, ऐसे इंटर्न, एम्प्लायर को नए सिरे से समस्या देखने के लिए मजबूर कर देते हैं.

संयुक्त राष्ट्र इंटर्नशिप के लिए पारिश्रमिक नहीं देता, ना ही मेरी पत्नी का हॉस्पिटल. लेकिन यूरोपियन यूनियन, कई सरकारें, और निजी क्षेत्र पारिश्रमिक देते हैं.

मेरी टीम में लगातार इंटर्न रहते हैं, क्योकि संयुक्त राष्ट्र में एक इंटर्न अधिकतम 6 महीने तक कार्य कर सकता है और एक वर्ष में हम उन्हें दो बार रिक्रूट करते हैं.

मेरी पत्नी के साथ इन गर्मियों में 11-12वीं कक्षा के दो इंटर्न लगभग ढाई महीने कार्य करेंगे. पत्नी उन्हें पेशेंट का डेटाबेस बिना उनके नाम-पते के उपलब्ध करवाती है, उनसे रिसर्च के लिए डाटा एनालिसिस करने को कहती है, लेटेस्ट उपकरण पर पेशेंट की बीमारी की इमेज दिखाती है, समझाती है. साथ ही वे इंटर्न मीटिंग्स और सेमिनार में भाग लेते है, कार्य प्रणाली को समझते है.

बदले में उनका नाम उस प्रकाशित रिसर्च पेपर में शामिल होता है. बाद में वे इंटर्न पत्नी से विश्वविद्यालय में एडमिशन या नौकरी के लिए रिफरेन्स लेटर लेते है.

मेरे बेटे ने भी, जो अभी किशोरावस्था में है, पिछले वर्ष एक स्टार्ट-अप में पेड इंटर्नशिप की थी; उसके एम्प्लायर ने उससे वर्चुअल रियलिटी के सॉफ्टवेयर बनवाये, बेटे को कहा कि वह उन सॉफ्टवेयर को निवेशकों को प्रस्तुत करे, जो उसके लिए अद्वितीय और रोमांचक अनुभव था.

लेकिन भारत में मोटे तौर पर ऐसा नहीं है, यद्यपि कुछ क्षेत्रो में इंटर्न लिए जाने का प्रचलन है.

अतः मैं प्रधानमंत्री मोदी को एक सुझाव देना चाहूंगा कि वे सभी सरकारी उपक्रमों, जिसमें सेना की गैर संवेदनशील छावनियाँ भी शामिल है, और निजी क्षेत्र में गर्मियों और जाड़े में दो महीने की इंटर्नशिप को प्रोत्साहन दें.

यह इंटर्नशिप उन छात्रों को मिलनी चाहिए जो 22 वर्ष से कम हो और किसी मान्यता-प्राप्त, फुल-टाइम कोर्स में पढ़ाई कर रहे हो.

वह यह अनिवार्य कर सकते हैं कि सरकारी उपक्रमों में 33 प्रतिशत इंटर्नशिप उस उपक्रम के बाहर वाले प्रांतों के छात्रों को मिलेगी. सारी एप्लीकेशन एक सेंट्रल ऑफिस में कंप्यूटर के द्वारा भेजी जायेगी और इंटर्नशिप का आवंटन कंप्यूटर के द्वारा ऑटोमेटिकली किया जाएगा.

ना कोई इंटरव्यू, ना लिखित परीक्षा. उप सचिव से लेकर सचिव तक, हर अधिकारी को, चाहे वह केंद्र या राज्य सरकार हो, चाहे एयर इंडिया, विश्वविद्यालय, या सरकारी बैंक हो, वर्ष में एक इंटर्न लेना होगा और उनसे सम्मानित व्यवहार करना होगा.

हर ऐसे इंटर्न को सरकार 8000 या 10000 रुपये महीने का पारिश्रमिक दे सकती है. ऐसे ही, निजी क्षेत्र अगर इंटर्न रखते है, तो उन्हें GST में कुछ प्रोत्साहन दिया जा सकता है. और अगर वे उस इंटर्न को पारिश्रमिक देते है तो उन्हें उस पारिश्रमिक पर कोई टैक्स नहीं भरना होगा.

एक बार सोचिये, डॉक्टर्स, वकील, उद्यम, बड़े कृषक, बिल्डर, उद्योग इत्यादि में कितने छात्रों को बहुमूल्य अनुभव अर्जित करने का अवसर मिलेगा, उनके फलक का विस्तार होगा, और स्वरोजगार की प्रेरणा मिलेगी.

वे किताबी और आभासी पटल से निकलकर वास्तविक दुनिया से सामना करेंगे; परिश्रम और पारिश्रमिक की वैल्यू पहचानेगे, और उनमे आत्मविश्वास बढेगा.

अगर आपको यह सुझाव सार्थक लगता है तो इसे प्रधानमंत्री जी को इस रविवार को प्रेषित कर दूंगा.

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