फ़र्ज़ी फिल्मी टाइगर में उलझा रहा देश और चला गया असली टाइगर : भाग 2

उधर बोफोर्स तोप की बमबारी और इधर कर्नल रविन्द्रनाथ के 90 जांबाज़… 3 अलग अलग टीम अभिमन्यु, भीम और अर्जुन बना के अलग अलग दिशाओं से ऊपर चढ़ने लगे…

बाकी सेना रसद और गोला-बारूद पहुंचाने में जुटी थी… बोफ़ोर्स की भीषण बमबारी के बावजूद पाकिस्तानी ऊपर से ग्रेनेड और एलएमजी का फायर झोंक रहे थे…

शाम के साढ़े 6 बजे हमला शुरू हुआ पर रात ढाई बजे तक सेना टॉप तक नहीं पहुंच पाई थी… समय हाथ से निकला जा रहा था…

सुबह 5 बजे उजाला होने वाला था और अगर सुबह हो गयी तो कोई ज़िंदा वापस नहीं आएगा क्योंकि उस पहाड़ी पर छिपने की कोई जगह ही नहीं थी…

अंततः सुबह 3 बजे के आसपास सेना ऊपर पहुंचने में कामयाब हुई… फिर शुरू हुआ Hand to Hand Combat… जिसमें एक एक बंकर में घुस के, एक एक पाकिस्तानी को मार के, तोलोलिंग को खाली कराना था…

[फ़र्ज़ी फिल्मी टाइगर में उलझा रहा देश और चला गया असली टाइगर : भाग 1]

मेजर विवेक गुप्ता तोलोलिंग टॉप से सिर्फ 5 मीटर पहले शहीद हुए… उनके साथ उस रात शहीद होने वालों में कुल 4 अफसर, 2 JCO और 17 जवान थे…

उन शहीदों में एक सूबेदार भंवर सिंह तोमर भी थे… कुल 70 जवान गंभीर रूप से घायल हुए… उनमें से 23 ऐसे थे जिन्होंने अपने हाथ पैर गंवा दिए…

अंततः 13 जून, सुबह 4:10 पर भारतीय सेना ने तोलोलिंग पर अपना झंडा फहरा दिया और वो ध्वज फहराने वाला जवान था नायक दिगेंद्र कुमार, जिसके एक हाथ और कंधे में LMG की गोली लगने के बावजूद वो अपनी LMG से फायरिंग करता रहा.

सुबह 7 बजे जब कर्नल एम बी रविन्द्रनाथ ने अपने ब्रिगेड कमांडर को वायरलेस पर सिर्फ एक लाइन का ये मैसेज भेजा… ‘Sir… Col. MB Ravindranath reporting from Tololing Top…’, तो उस समय उनके इर्द गिर्द उनके 8 जवानों के शव पड़े हुए थे…

सवाल उठता है कि वो कौन लोग होते हैं तो इस तरह सामने खड़ी निश्चित मृत्यु से भी नहीं घबराते? आखिर उनमें वो जज़्बा कहां से आता है?

आर्मी की लीडरशिप में ऐसी क्या खासियत होती है कि उनका फॉलोवर उनके एक आदेश पर मौत के मुंह में कूद जाता है?

2 राजपुताना राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल एम बी रविन्द्रनाथ में ऐसा क्या गुण था कि उस युद्ध में उनके 50 से ज़्यादा योद्धाओं ने अपनी जान न्योछावर कर दी…

आपके सामने आपके बेटे की, आपके भाई की लाश पड़ी होगी तो आप कैसे व्यवहार करेंगे? आपके सामने आपका पूरा परिवार शहीद हो जाये तो आप कैसे खुद को सम्हाल के अगले दिन पुनः युद्ध भूमि में पहुंच जाएंगे?

युद्ध भूमि में तो वीरों के पास अपने साथियों के लिए रोने का मौका भी नहीं होता…

13 जून को तोलोलिंग विजय के बाद अभी 2 राजपुताना राइफल्स अपने शहीदों के शव तक नहीं उतार पाई थी कि ‘Three Pimples’ पर हमला करने का आदेश आ गया…

क्रमशः…

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