उदयन स्वरोजगार : एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो, कैसे नहीं होगा आसमान में छेद!

आपसे मिलिये, आप हैं श्री विजय कुमार जी. मेरे गांव माहपुर के हैं. इनकी पत्नी रंजना उदयन में बच्चों की देखभाल करती हैं और उदयन के सिलाई सेंटर में मछरदानियाँ सिलती हैं. उदयन की staff हैं तो इस नाते इनकी दो बेटियां भी उदयन में ही पढ़ती हैं.

तो किस्सा यूँ है कि पिछले दिनों जब स्वरोजगार पे चर्चा चल रही थी, कुछ बच्चे Chinese फ़ूड बनाना सीखने Pune गए थे. फिर स्वरोजगार fund बन गया और फिर उसमें लगभग 70,000 रु एकत्र हो गए.

फिर आपको ये भी याद होगा कि माहपुर स्टेशन पर एक महिला अपने पति के साथ मनियारी cosmetics इत्यादि की दुकान करती है उनको आर्थिक मदद के रूप में हमने 10,000 रु भी दिए थे. और वो पैसे सुभाष शर्मा सर ने यशवंत यादव जी जो कि उनके proposer थे उनके Acc में ट्रांसफर भी कर दिए थे.

बहरहाल, ऐन मौके पर उस परिवार ने वो पैसा लेने से मना कर दिया क्योंकि उनको न जाने किसने भड़का दिया कि ऐसे कौन पैसा देता है. ई सब ठाकुर हैं. कल को तुमसे 15% महीना का ब्याज वसूलेंगे और अंत मे दुकान कब्जा कर लेंगे.

सो उन्ने वो पैसे लेने से मना कर दिया. इधर मैं फोन से बड़े भाई विक्रम सिंह जी से सारी रिपोर्ट लेता था. तो हमारी बात ये रंजना सुनती थी. एक दिन उसने पूछ लिया कि सर जी, ये स्वरोजगार का क्या चक्कर है?

भाई ने उसे समझाया – वो बोली सर मेरे पति को ठेला लगवा दीजिये.

किसका ठेला लगवा दें? क्या आता है उसे?

जी आता तो कुछ नहीं पर सीख लेगा.

ठीक है, सीखना शुरू करो. और इस तरह दोनों पति पत्नी ने उदयन में ही laptop पर Youtube पर निशा मधुलिका जी के चैनल से चाट इत्यादि बनाना सीखना शुरू किया. उदयन की ही kitchen में रोज़ाना कुछ नया बनाते और उदयन के बच्चों को खिलाते.

इधर उदयन में ही इनका ठेला बनने लगा. वहीं सारा design तैयार हुआ decoration हुई. डेढ़ महीने में इधर ठेला बन के तैयार हुआ और उधर रंजना और विजय ने चाट पापड़ी और चाऊमीन बनाना सीख ली. जो 10,000 चौरसिया परिवार को देने थे वो रंजना और विजय को दे दिए गए.

और आज शाम बौरवाँ बाज़ार में रंजना और विजय के स्वरोजगार का शुभारंभ हुआ. पहली बोहनी करायी उदयन के बच्चों ने. आज पहले दिन लगभग 600 Rs की sale हुई है.

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो, कैसे नहीं होगा आसमान में छेद!

 

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