उनका असली लक्ष्य ही है देश में संघर्ष, गृहयुद्ध, देश की बर्बादी

सत्ता क्या होती है?

एक मित्र ने समझाया था… दूसरे के behalf पर निर्णय लेने की शक्ति को सत्ता कहते हैं.

सत्ता उसकी नहीं है जो कुर्सी पर बैठा है. सत्ता उसकी है जो निर्णय ले रहा है…

उससे भी बड़ी सत्ता उसकी है जो वे सिद्धांत बनाता है जिसके आधार पर निर्णय लिए जाते हैं…

इस शक्ति को एंटोनियो ग्राम्स्की ने हेजेमनी कहा था.

[हेजेमनी के बारे में और पढ़ें : यह भूत भगाओ, मिल जाएगा पुराना मोदी]

इस देश में हर कुर्सी पर भाजपाई बैठे हैं, सत्ता कांग्रेसियों की है और हेजेमनी वामपंथियों की है.

मोदी और शाह चुनाव जीत रहे हैं, कुर्सियाँ बटोर रहे हैं. सत्ता और हेजेमनी को चुनौती नहीं दे रहे हैं, नहीं दे पा रहे.

कांग्रेसी सत्ता की परतें खुरचने में तो थोड़ी-थोड़ी सफलता मिली भी है, पर वामपंथी हेजेमनी को छूना भी है, इसकी समझ भी नहीं है…

प्रकाश जावड़ेकर जैसा मानव संसाधन मंत्री होना ही इसका प्रमाण है.

हम कांग्रेस और वामपंथियों के चरित्र के आकलन में एक छोटी सी चूक कर रहे हैं. चुनाव जीतना इसका मूल उद्देश्य नहीं है.

वे समाज में कुत्सित विभेद और संघर्ष चुनाव जीतने के लिए नहीं फैला रहे. उनका मूल उद्देश्य ही यही है. सत्ता तो इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एक साधन मात्र है.

अगर सत्ता हाथ में होती है तो वे यह काम आराम और फुरसत से करते हैं. कोई डेस्पेरेशन नहीं होती. अगर सत्ता नहीं होती है तो इसी काम के लिए थोड़ा अधिक प्रयत्न करना पड़ रहा है.

पर आपके शासनकाल में भी वे यह काम कर ही ले रहे हैं. उनका काम नहीं रुका है, उन्होंने बस जरा सा डायवर्सन ले लिया है.

आपने सड़कों पर कब्जा किया, वे गलियों से पहुँच गए. आप गलियाँ रोकेंगे, वे पगडंडियों से चलते रहेंगे…

आपने उनकी गाड़ियाँ ले लीं, उन गाड़ियों के गद्देदार सीट का मज़ा ले रहे हैं, उसे चलाना सीख रहे हैं, कुछ उसमें सवारी का मजा ले रहे हैं. और उधर वे अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे हैं. साईकल से, हाथी से, हाथ हिलाते, झाड़ू पकड़े… रिक्शा, ठेला, पैदल…

चुनाव तो एक refuelling स्टेशन है, सत्ता एक गाड़ी है… उनका असली लक्ष्य है देश में संघर्ष, गृहयुद्ध, देश की बर्बादी. उनके कमिटमेंट को कम मत आंकिए.

कांग्रेसी और वामपंथी वे नराधम हैं जो खुद को बर्बाद कर के भी देश को बर्बाद करेंगे. उन्हें रोकना है तो आपको दिखाई देना चाहिए कि वे जा कहाँ रहे हैं, करना क्या चाहते हैं…

और उन्हें रोकना है तो उनकी टाँगें तोड़नी होंगी… बहुत गाँधी गाँधी करते हैं ना… तो गाँधी के पास भी एक लाठी थी… वही काम आएगी…

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY