काठमांडू-दिल्ली-कोलकाता प्रोजेक्ट से थर्राए चीन-पाकिस्तान, भारत में दे रहे विघटनकारियों को बढ़ावा

यूँ ही नहीं ड्रैगन बौखला कर इतने दिनों की शांति के बाद अब अरुणाचल में भिड़ने को चल पड़ा है.

ऐसा ही डोकलाम विवाद भी था – डोकलाम विवाद चीन ने अपना OBOR (One Belt One Road) बचाने और मिल रही चुनौतियों से बचने को किया था.

अब अरुणाचल विवाद उछालना भी चीन की एक उग्र स्ट्रेटेजी है और कुछ नहीं…

दो दिन पहले भारत के प्रधान मंत्री और नेपाल के प्रधानमंत्री ने मुलाकात की. चुनाव बाद दुनिया और चीन की चाह के उलट नेपाल के प्रधानमंत्री ने चीन से पहले भारत का दौरा किया.

इस दौरे में समझौता हुआ कि भारत, काठमांडू से कोलकाता और काठमांडू से दिल्ली तक का रेल मार्ग बनाएगा.

ये आपके लिए बस एक खबर हो सकती है. कुछ लोगों के लिए आम प्रोजेक्ट का अनाउंसमेंट है, तो कुछ लोगों के लिए शायद कोई इंटरेस्ट की बात ही नहीं, ऐसा होता रहता है…

लेकिन उस दूरगामी असर को देखना चाहिए जिसको ही लोग भूल जाते हैं… अंतरराष्ट्रीय समझौते और प्रोजेक्ट बस ऐसे ही इन्वेस्टमेंट नहीं होते…

एक तो कांडला से चाबहार समुद्री मार्ग चालू हुआ… फिर भारत, ईरान और रूस मिलकर चाबहार से St. Petersberg तक रेल लाइन बना रहे हैं.

इससे मुंबई सीधे St. Petersberg से जुड़ जाएगा और सारे लैंडलॉक देशों को भारत अपना माल दे सकेगा…

इस काठमांडू-दिल्ली-कोलकाता प्रोजेक्ट से चीन और पाकिस्तान की CPEC (China–Pakistan Economic Corridor) की बची खुची उम्मीद भी ख़त्म हो रही है.

काठमाण्डू पहले ही Lhasa (तिब्बत) से रेलमार्ग से जुड़ा है. Lhasa से Lanzhou रेल मार्ग है ही और Lanzhou एक जंक्शन है जहाँ Beijing – Shanghai – Chengdu और Guangzhou से मालगाड़ी और सवारी गाड़ी, माल और सवारी लेकर आती जाती है.

अब चीन के व्यापारियों के लिए, जो कि मुख्यतः Beijing – Shanghai – Chengdu और Guangzhou से माल भेजते हैं, उनके लिए Lanzhou – Lhasa – Kathmandu – Delhi – Kandla और यहाँ से पूरे अफ्रीका तथा मिडिल ईस्ट के लिए माल भेजना CPEC से भी ज्यादा आसान है, सुरक्षित है.

ये रूट चीन के String of Pearls से भी आसान है और कम खर्चीला भी होगा, समय भी आधा लगेगा. इसी तरह अफ्रीका आदि के व्यापारी भी अपना माल नेपाल, भूटान, चीन और मंगोलिया आदि को सीधे इस छोटे, सस्ते और काम समय लगने वाले रस्ते से भेज सकेंगे.

मुझे अब इसमें इंटरेस्ट आ रहा है कि चीन और ISI से फण्ड पाए हुए भारत में बैठे लोग उसके इशारे पर अब भारत में कितनी अराजकता, असहिष्णुता का राग, मुसलमानों के लिए असुरक्षा, सवर्ण-दलित लड़ाई आदि में कितना योगदान देने जाने वाले हैं.

अगर भारत में ये सब बढ़ता है तो इसके पीछे एक कारण ये अहम प्रोजेक्ट है जिसको चीन नहीं होने देना चाहेगा… चीन, भारत के साथ नेपाल में मधेसियों और नेपालियों में टकराव को बढ़ावा देगा… आने वाला समय बहुत उठा पटक का होने वाला है…

इस सबके बीच सिर्फ एक बात… Trust NAMO, अपने नेता पर भरोसा रखिए, मोदी जी में विश्वास बनाए रखिए.

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