मीडिया के मुकाबले तो पूजनीय है परिवार पालने के लिए वेश्यावृत्ति करने वाली महिला

मुझे मीडिया से कोई शिकायत नहीं है, क्योंकि वह मेरा विश्वास, बहुत पहले खो चुकी है. मेरी दृष्टि में एक अपना घर चलाने के लिये वेश्यावृति पर उतरी एक महिला इस मीडिया से लाख गुना पूजनीय है.

हमारा मीडिया हर उस बात को सामने लाता है, जिसका सीधा सम्बन्ध भारत और उसके समाज को तोड़ने में सहायक होता है…

या हर उस बात को दबा देता है, जो भारत की आहत अस्मिता को राहत देती है और भारतीयों को उनके अस्तित्व के सुदृढ़ होने का बोध कराती है.

सलमान खान द्वारा काले हिरण को मारने पर क्या फैसला आयेगा, इसको लेकर हज़ारों फेसबुक स्टेटस देख कर ही मन खिन्न हो गया था.

सलमान खान का एजेंडा किसी और ने सेट किया था लेकिन चाशनी समझ सबसे ज्यादा उस पर चिपकने वाले हिन्दू राष्ट्रवादी ही रहे हैं.

वैसे तो, यह जो पेशेवर हिंदूवादी और राष्ट्रवादी है उनसे, मैं किसी मौलिकता की उम्मीद नहीं करता हूं लेकिन पिछले 4 वर्षों में मीडिया और अब कैंब्रिज एनालिटिका के टेस्ट ट्यूब बेबियों ने इतना तो न्यूनतम समझा ही दिया है कि हर पल आपको यह सचेत रहना है और अपनी दृष्टि को व्यापक बनाना है.

बिना सही नम्बर का चश्मा लगाये जो देख कर आप समझ रहे है वह सत्य नहीं है. आपके चश्मे का नम्बर ठीक होना चाहिये, वह हम सब कई बार पहले ही बता चुके है.

अब बताता हूँ, मैं क्यों ऐसा कह रहा हूँ.

आज भारत की मीडिया और सोशल मीडिया के लिये सबसे बड़ी खबर सलमान खान के सज़ा सुनाना है, जो न भारत के लिये है और न ही मेरे लिये है.

इस के जेल जाने, या न जाने से भारत की अस्मिता या उसके अस्तित्व पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है. उसकी इस सज़ा से भारत की न्यायपालिका की प्रतिष्ठा में भी कोई नया इज़ाफा नहीं होना है.

19 वर्ष पुराने केस में एक अदालत द्वारा सुनाये गये निर्णय से इन अदालतों की बेचारगियों पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है.

फैसले के बाद सलमान का वकील सुप्रीम कोर्ट जायेगा और वहां फिर तारीखों की एक नई बरात निकलेगी और फैसला आने तक मेरी उम्र के बहुत से लोग राम राम सत्य हो चुकेंगे.

भारत के साथ सभी भारतीयों के लिये सबसे बड़ी खबर यह है कि प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार ने 9 लाख करोड़ के बैंक एनपीए में से 4 लाख करोड़ की वसूली कर ली है.

जिस एनपीए को यूपीए की भ्रष्ट और राष्ट्रद्रोही सरकार ने, भारत की जनता को उसे 36% बता, झुनझुना पकड़ा कर भ्रष्टाचार की अफीम चटा मस्त रक्खा था, उसके 82% होने की सच्चाई बताने वाले को इसी अफीमची भारतीय जनता ने मीडिया की अगुवाई में सोशल मीडिया के राष्ट्रवादी वीरों ने उलाहना देने में भी परहेज नहीं रक्खा था.

यह यूपीए की मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी की सरकार द्वारा, एनपीए में 46% की गई हेरफेर, राष्ट्र की अस्मिता और अस्तित्व के साथ किया गया बलात्कार था, जिसकी भीषणता व संवेदनशीलता को समझ पाने में ज्यादातर भारतीय जनता पूरी तरह असफल रही है.

आज जो घोषणा हुई है वह भले ही 9 लाख करोड़ के मुकाबले 4 लाख करोड़ की वसूली लोगों को समझ में नहीं आ रही है लेकिन शायद यह समझ मे आ जाये कि मोदी सरकार द्वारा बैंकों के कुल वास्तविक एनपीए का 36% से ज्यादा वसूल कर लिया है. आज इस सरकार ने यूपीए की सरकार द्वारा 2014 में, बैंकों की एनपीए के दिए गए आधिकारिक आंकड़ो को वसूल कर लिया है.

इसका अर्थ यह है कि सोनिया गांधी द्वारा नियुक्त भारत के भ्रष्टतम भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बैंकों के एनपीए की घोषणा की थी, जितनी यह उनको उम्मीद थी कि भविष्य में वसूल हो जायेंगे. जिन लोनों की किश्त कांग्रेस हाई कमान के पास जाती थी, उसको एकाउंटिंग में छुपा दिया गया था.

मेरे लिये यह गर्व व विश्वास का पल है कि मैंने नरेंद्र मोदी जी पर बिना विचलित हुये जो विश्वास बनाये रखा हुआ है, वह फलीभूत हो रहा है.

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