Hicham El Guerrouj : हार के आगे जीत है

Olympics Atheletics में 100 M और 1500 M की दौड़ सबसे बड़ा आकर्षण होती है…

90 के दशक में अल्जीरिया का नूरुद्दीन मोरसेली 1500 M की दौड़ का बेताज बादशाह था और 1990 से ले के 1995 तक उसने सभी बड़े tournaments में ये रेस जीती थी…

फिर 1994 में उसके बगल के देश मोरक्को में एक नया लड़का उभरने लगा… उसका नाम था Hicham El Gueroouj… हिकम एल गेरूज़… गेरूज़ पिछले दो साल से मोरसेली की बादशाहत को चुनौती दे रहा था.

1996 में Atlanta Olympics हुए… 1500 मी. की दौड़ में सबकी निगाहें मोरसेली और गेरूज़ पर टिकी हुई थी… दौड़ शुरू हुई…

तीसरे राउंड में गेरूज़ अन्य धावकों की भीड़ में घिरा लड़खड़ा के गिर पड़ा… उठ के फिर भागा पर फिर वो लीड उस से कवर न हुई…

उसने सबसे पीछे finish किया और उसे 12वाँ स्थान मिला… एक पदक ओलंपिक गेरूज़ के हाथ से फिसल गया था…

पर सिर्फ एक महीने बाद वो फिर मोरसेली के सामने खड़ा था… मौका था Milan – Italy में 1996 Grand Prix फाइनल का… और उस दिन गेरूज़ ने मोरसेली से Atlanta का बदला ले लिया…

अब विश्वपटल पर 1500 M. का नया सितारा आ चुका था. अगले 8 साल तक विश्व Atheletics में एल गेरूज़ का एकछत्र राज रहा…

इस बीच उसने 30 बार 1500 मी की दौड़ 3:30 के नीचे दौड़ी और 5 बार विश्व रिकॉर्ड बनाया.

कई-कई बार विश्व चैंपियन बना… अब सिर्फ एक हसरत बाकी थी… 1500 M का ओलंपिक गोल्ड…

फिर आया सन 2000 का Sydney Olympics… सबकी निगाहें अल गेरूज़ पर ही टिकी थीं. Race शुरू हुई और अंतिम क्षणों में Kenya के धावक Noah Ngeny ने अंतिम दौर में गेरूज़ को पछाड़ते हुए Gold medal झटक लिया…

गेरूज़ को Silver Medal से ही संतोष करना पड़ा… Olympic Gold फिर उसके हाथों से फिसल गया था…

अगले चार साल भी गेरूज़ की बादशाहत कायम रही और वो दुनिया की सारी बड़ी races जीतता रहा… विश्व record उसके नाम था ही…

अब उसकी अलमारी में सिर्फ एक मैडल की कमी थी… Olympic Gold की…

सब कुछ ठीक चल रहा था… 2004 में एक दिन उसे अस्थमा का दौरा पड़ा… और इलाज के लिए उसे 4 महीने ट्रैक से दूर रहना पड़ा… ओलंपिक Gold जीतने का उसका सपना चकनाचूर हो गया था…

पर नियति में कुछ और ही लिखा था… उसके कोच को अब भी भरोसा था… उसने ट्रेनिंग दोबारा शुरू की…

और आखिर वो दिन भी आ गया जब वो 1500 मी. के फाइनल की Starting Line पर खड़ा था… race शुरू हुई…

उसने पहले ही तय कर लिया था कि वो भीड़ में घुसने की Atlanta वाली गलती नहीं दोहराएगा. इसलिए वो पूरी दौड़ चढ़ के 2nd lane में ही दौड़ता रहा…

उसे पता था कि ये उसके जीवन का अंतिम मौका था… Sydney में भी वो अंतिम राउंड में धोखा खा गया था जहां Kenyans ने उसे घेर के मार लिया था…

उस दिन उसके आगे Noah Ngeny और पीछे Bernard Lagat लगा हुआ था… पर आज वो खुद pace setter था…

अंतिम राउंड शुरू हुआ तो वो सबसे आगे आ गया… और फिर जो race हुई उसे सदी की महानतम रेस माना जाता है…

और अंतिम क्षणों में जब कि मुश्किल से 40 मीटर बचे थे Kenya का Bernard Lagat उससे आगे निकल गया… ये वही Lagat था जिसने Sydney में Bronze जीता था…

गेरूज़ ने फिर ज़ोर मारा… और race के अंतिम क्षणों में फिर आगे निकल गया… उस दौड़ में इतना कड़ा मुकाबला हुआ और हार जीत का अंतर इतना कम था कि 100 M race का रोमांच भी फेल हो गया…

वो दौड़ ओलंपिक इतिहास की सबसे रोमांचक दौड़ मानी जाती है… विडंबना ये रही कि Lagat ने जीवन मे 5 ओलंपिक खेले, विश्व चैंपियन बना पर ओलंपिक गोल्ड कभी नसीब न हुआ…

इतिहास में उसे उस धावक के रूप में याद किया जाता है कि जिसने गेरूज़ जैसों को दो दो बार नाकों चने चबवा दिए… पर ओलंपिक गोल्ड नहीं जीत सका.

गेरूज़ ओलंपिक गोल्ड जीत के ट्रैक पर लेट के फूट फूट के रोया…

एक इंटरव्यू में गेरूज़ ने बताया कि वो सारी जिंदगी इस ओलंपिक गोल्ड का बोझ लिए जीता रहा…

और उस दिन जब अंतिम दौर में Lagat मुझसे आगे निकलने लगा तो मैंने खुद से कहा… नहीं गेरूज़… आज नहीं… तुम ये बोझ ले के मर भी न पाओगे…

और फिर न जाने कौन सी अदृश्य ताकत मुझे दौड़ाने लगीं… मुझे सिर्फ जीतना था… उस दिन मेरे दिल से एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया…

उस रात, मैं बरसों बाद चैन की नींद सोया… और फिर सिर्फ 3 दिन बाद गेरूज़ फिर ओलंपिक ट्रैक पर था… इस बार 5000 मी. के फाइनल में…

और उसने एक और चमत्कार करते हुए 5000 M. का गोल्ड भी जीत लिया… ऐसा करने वाला वो पावो नूरमी के बाद पहला Athelete था जिसने 1924 हेलसिंकी ओलंपिक में 1500 और 5000 M का गोल्ड जीता था…

गेरूज़ का 1500 M. का 1998 में बना 3:26 का विश्व रिकॉर्ड आज भी कायम है और उसकी गिनती सदी के महानतम धावकों / खिलाड़ियों में होती है.

गेरूज़ की ये तमाम races Youtube पे उपलब्ध हैं…

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