भेड़ की खाल पहनकर भेड़िये बन रहे दलितों के ठेकेदार

दलितों का दुश्मन कौन? पढ़ने के बाद फैसला आप स्वयं करिये.

मई 2004 में UPA के सत्ता में आने के बाद उसके पहले पूर्ण एक वर्ष का कार्यकाल 2005 था. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के दस्तावेज़ों के अनुसार इस वर्ष 2005 में दलितों पर अत्याचार के 8 हज़ार 497 केस पूरे देश में दर्ज हुए थे.

मई 2014 में सत्ता से विदाई के पूर्व का पूर्ण एक वर्ष के कार्यकाल वाला अन्तिम वर्ष 2013 था. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के दस्तावेजों के अनुसार इस वर्ष 2013 में दलितों पर अत्याचार के 46 हज़ार 114 केस दर्ज हुए थे.

स्पष्ट कर दूं कि क्योंकि 2004 में पहले 5 माह (मई तक) अटल सरकार का कार्यकाल था तथा 2014 के अंतिम 7 माह (जून से दिसम्बर तक) मोदी सरकार का कार्यकाल था इसलिए आंकड़े 2005 से 2013 तक के दे रहा हूं यानि कि यूपीए के 9 वर्ष के पूर्ण कार्यकाल के.

अतः उपरोक्त आंकड़े चीख चीख कर बता रहे हैं कि यूपीए के 9 वर्ष के कार्यकाल में पूरे देश में दलितों पर अत्याचार के मामलों में लगभग 542% (37,617 केस) की वृद्धि हुई थी.

यह शर्मनाक सच्चाई यह बता रही है कि राहुल गांधी व सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के शासन में दलितों पर अत्याचार के मामले भयंकर सुनामी की तरह तूफानी गति से बढ़े.

यही नहीं कांग्रेस जिन अखिलेश यादव को अपना राजनीतिक गठबन्धन साथी सहयोगी बनाकर घूम रही है, उत्तरप्रदेश में उन अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार के शासनकाल के अंतिम वर्ष 2016 में उत्तरप्रदेश दलितों पर अत्याचार के 10 हज़ार 426 केसों के साथ दलितों पर अत्याचार के मामले में देश में पहले नम्बर पर था.

जबकि जिस मोदी सरकार को दलितों का दुश्मन सिद्ध करने का घृणित दुष्प्रयास कांग्रेस समेत उसी यूपीए के सदस्य रहे सपा, बसपा, राजद सरीखे दल कर रहे हैं उस मोदी सरकार के शासन में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के दस्तावेज़ों के अनुसार पूरे देश में दलितों पर अत्याचार के 40 हज़ार 401 केस 2014 में दर्ज हुए. यह संख्या यूपीए सरकार के कार्यकाल के अंतिम पूर्ण वर्ष 2013 में दर्ज हुए ऐसे केसों से 5 हज़ार 713 (12.5%) कम थी.

मोदी सरकार के शासन में 2015 में दलितों पर अत्याचार के 38 हज़ार 670 केस दर्ज हुए. यह संख्या यूपीए सरकार के कार्यकाल के अंतिम पूर्ण वर्ष 2013 में दर्ज हुए ऐसे केसों से 7 हज़ार 444(16%) कम थी.

वर्ष 2016 में मोदी सरकार के शासन में दलितों पर अत्याचार के 40 हज़ार 801 केस के दर्ज हुए यह संख्या यूपीए सरकार के कार्यकाल के अंतिम पूर्ण वर्ष 2013 में दर्ज हुए ऐसे केसों से 5 हज़ार 313 (11.5%) कम है.

वर्ष 2017 से सम्बन्धित ऐसे आंकड़े NCRB कुछ महीनों बाद जारी करेगा. लेकिन उपरोक्त आंकड़े यह अवश्य बता रहे हैं कि केंद्र में मोदी सरकार के बनने के बाद से दलितों पर अत्याचार के मामलों में 12 से 16 प्रतिशत की कमी लगातार दर्ज हुई है.

NCRB के यह आंकड़े बता रहे हैं कि… भेड़ की खाल पहनकर भेड़िये अब दलितों का ठेकेदार बनने की कोशिश कर रहे हैं.

उपरोक्त खबरों के स्क्रीन शॉट ही ऊपर प्रदर्शित किया गया है.

 

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