निश्चित जानिए, सब शुभ ही शुभ है…

उन्हें क्यों कोसना, 2013 से 16 मई 2014 तक का समय याद करिए… वो उत्तेजना, वो सिहरन… नतीजे का पुख्ता अनुमान होने के बाद भी अंतिम नतीजा आने तक बढ़ी हुई अपनी धड़कनें 🙂

अब पांच साल बाद, 2018 से लोकसभा चुनाव तक का दौर आया है…

यहाँ ध्यान दिला दूं, 2018 से मई 2019 नहीं, अगले लोकसभा चुनाव लिख रहा हूँ… जोकि ज़रूरी नहीं कि 2019 में ही हो…

वे बेचारे तो अपने नेताओं के मारे हैं, और उनके नेता खूनी ‘पंजे’ के शिकार… और ये ‘पंजा’ कहाँ से संचालित हो रहा है, ये मुझसे बेहतर आप जानते हैं…

करने योग्य काम तो ये है कि आज की घटनाओं को सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना मानते हुए एक मुकदमा दायर किया जाए…

बाक़ी, जो कुछ हुआ और जो होने वाला है… है तो सब मज़ेदार… बिलकुल नाराज़ या उत्तेजित न हों, सब कुछ तो एक well planned strategy के तहत हो रहा है…

मुझे पूरा विश्वास है नेतृत्व पर, और उन सूक्ष्म सत्ताओं पर जो करवट बदलते भारत पर निगाह रख रही हैं… निश्चित जानिए, सब शुभ ही शुभ है…

दोनों तरफ से कुछ सिर लुढ़केंगे… खून बहेगा… शायद मेरा या/और आपका… पर हम रहें न रहें, अजर-अमर-भारत रहेगा…

वंदे मातरम

– स्वामी ध्यान विनय

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